आखिर ईरान से डील ही क्यों करना चाहते हैं ट्रंप? खुद गिनाए फायदे

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आखिर ईरान से डील ही क्यों करना चाहते हैं ट्रंप? खुद गिनाए फायदे

31 मई 2026 को 11:16 am बजे
आखिर ईरान से डील ही क्यों करना चाहते हैं ट्रंप? खुद गिनाए फायदे

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहली बार खुलकर बताया है कि वह तेहरान के साथ समझौता करने के पक्ष में क्यों हैं. ट्रंप का कहना है कि अगर डील हो जाती है तो इससे सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को फायदा होगा.

फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल न कर सके. उन्होंने दावा किया कि ईरान इस बात पर सहमत हो गया है कि वह परमाणु बम नहीं बनाएगा.

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राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "मेरे पास एक गारंटी है कि परमाणु हथियार नहीं होंगे. उन्होंने इस बात पर सहमति जताई है." हालांकि ईरान की तरफ से अब तक इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, जबकि ईरान ट्रंप के इस तरह के दावे को पहले खारिज कर चुका है.

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि डील का दूसरा बड़ा फायदा होर्मुज स्ट्रेट का दोबारा खुलना होगा. दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है. पिछले महीनों में संघर्ष और नाकेबंदी के कारण यहां तनाव बना हुआ है. ट्रंप का मानना है कि समझौते के साथ ही समुद्री यातायात सामान्य हो सकता है और ऊर्जा बाजारों में स्थिरता लौट सकती है.

ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य दबाव की वजह से ईरान कमजोर स्थिति में पहुंचा है. उन्होंने कहा, "हमने उनकी सेना को लगभग हरा दिया है. लेकिन मैं सैन्य कार्रवाई की बजाय समझौता करना पसंद करूंगा, क्योंकि डील साइन होते ही होर्मुज खुल सकता है." हालांकि उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर बातचीत नाकाम रही तो अमेरिका पीछे नहीं हटेगा. ट्रंप ने कहा, "हम एक बेहतरीन डील के करीब हैं. अगर ऐसा नहीं हुआ तो हम सैन्य तरीके से इसे खत्म करेंगे."

हाल ही में व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में ईरान को लेकर एक अहम बैठक हुई थी. इसके बाद प्रशासन की ओर से कहा गया कि ट्रंप सिर्फ ऐसे समझौते को मंजूरी देंगे जो अमेरिका के हितों के मुताबिक हो और उनकी तय की गई शर्तों को पूरा करे. इनमें ईरान का परमाणु हथियार कार्यक्रम खत्म करना और होर्मुज स्ट्रेट को बिना किसी टोल या प्रतिबंध के खोलना शामिल है.

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ट्रंप ने यह भी स्वीकार किया कि ईरान के साथ बातचीत आसान नहीं है. उन्होंने कहा, "वे बहुत कठिन वार्ताकार हैं. हमें धीरे-धीरे वह मिल रहा है जो हम चाहते हैं. मैं किसी जल्दबाजी में नहीं हूं, क्योंकि जल्दबाजी में अच्छी डील नहीं होती."

उधर ईरान अब भी कई अमेरिकी शर्तों से सहमत नहीं दिख रहा. तेहरान के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि संभावित समझौते में परमाणु मुद्दा शामिल नहीं है और कई महत्वपूर्ण मतभेद अब भी बने हुए हैं.

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