12वीं तक पढ़ा था, करने लगा अल्ट्रासाउंड, चाइनीज डिवाइस से भ्रूण जांच की कहानी

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12वीं तक पढ़ा था, करने लगा अल्ट्रासाउंड, चाइनीज डिवाइस से भ्रूण जांच की कहानी

04 जून 2026 को 09:44 am बजे
12वीं तक पढ़ा था, करने लगा अल्ट्रासाउंड, चाइनीज डिवाइस से भ्रूण जांच की कहानी

महाराष्ट्र के पुणे जिले के दौंड तहसील में हैरान कर देने वाली कहानी सामने आई है. यहां एक कमरे में अवैध तरीके से भ्रूण लिंग जांच की जा रही थी. यह काम 12वीं तक पढ़ाई करने वाला आदमी कर रहा था. इसके लिए वह 5 से 15 हजार रुपये तक वसूलता था. भ्रूण जांच करने के बाद वह महिलाओं को डॉक्टरों के पास भेज देता था. पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है.

एजेंसी के अनुसार, भ्रूण जांच करने वाला आरोपी कभी फार्मेसी कोर्स में दाखिला लेकर फेल हो चुका था, लेकिन इसके बावजूद उसने खुद को ‘मेडिकल विशेषज्ञ’ की तरह पेश कर एक अवैध नेटवर्क खड़ा कर लिया. जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह कोई छोटा-मोटा ऑपरेशन नहीं था. यह एक पूरी तरह से संगठित नेटवर्क था.

सबसे पहले महिलाओं को 'कंसल्टेशन' के नाम पर आरोपी तक लाया जाता था. यहां पर उनसे भ्रूण जांच के लिए 5,000 से 15,000 रुपये तक वसूले जाते थे. इस प्रॉसेस में आरोपी कथित तौर पर भ्रूण का जेंडर बताने का दावा करता था. अगर कोई केस आगे के स्टेप की ओर बढ़ता, तो उन महिलाओं को नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों या डॉक्टरों के पास रेफर किया जाता था, जहां आगे की प्रक्रिया कराई जाती थी.

यह भी पढ़ें: हरियाणा की टीम ने UP के बिजनौर में चल रहे भ्रूण लिंग परीक्षण रैकेट का किया भंडाफोड़, डॉक्टर समेत 3 गिरफ्तार

पुलिस जांच में सबसे अहम चीज जो सामने आई, वह थी एक पोर्टेबल चाइनीज अल्ट्रासाउंड डिवाइस. यह मशीन मोबाइल एप्लीकेशन से जुड़ी हुई थी और ब्लूटूथ के जरिए काम करती थी. इसी डिवाइस के आधार पर आरोपी भ्रूण की जांच करने का दावा करता था.

मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की मशीन का इस्तेमाल बिना लाइसेंस और बिना मेडिकल निगरानी के करना पूरी तरह अवैध है और PCPNDT Act का सीधा उल्लंघन है. पुलिस ने इस डिवाइस को जब्त कर लिया है और इसकी तकनीकी जांच की जा रही है.

इस पूरे मामले का खुलासा एक वायरल वीडियो से हुआ. सोशल मीडिया पर एक क्लिप सामने आई, जिसमें कथित रूप से अवैध भ्रूण लिंग जांच की गतिविधियां दिख रही थीं. वीडियो वायरल होते ही स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और शिकायत दर्ज कराई गई. इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की और धीरे-धीरे इस पूरे नेटवर्क की परतें खुलने लगीं.

मुख्य आरोपी ने पुलिस पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने 2024 से यह काम शुरू किया था. उसने बताया कि वह न तो डॉक्टर है, न ही उसके पास कोई मेडिकल डिग्री है. वह केवल 12वीं तक पढ़ा है और फार्मेसी कोर्स में फेल हो चुका है. इसके बावजूद उसने खुद को ‘विशेषज्ञ’ बताकर महिलाओं की जांच शुरू कर दी. पुलिस का कहना है कि वह हर महीने 15 से 50 महिलाओं की जांच करता था, हालांकि सभी मामलों में भ्रूण लिंग निर्धारण हुआ या नहीं, इसकी पुष्टि अभी जांच का हिस्सा है.

इस जांच के लिए 5,000 से 15,000 तक की वसूली की जाती थी. यह रकम सीधे आरोपी तक पहुंचती थी, जबकि नेटवर्क में जुड़े अन्य लोग रेफरल सिस्टम के जरिए हिस्सा पाते थे. पुलिस को जांच में पता चला है कि यह मामला सिर्फ दो लोगों तक सीमित नहीं है. कुछ अन्य डॉक्टरों और बिचौलियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है.

पुलिस ने कहा कि आरोपियों में एक आयुर्वेदिक डॉक्टर भी शामिल है. मुख्य आरोपी 12वीं कक्षा तक पढ़ा-लिखा है और कथित तौर पर भ्रूण का लिंग पता लगाने के लिए एक मोबाइल एप्लिकेशन से जुड़े, चीन में बने एक पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड डिवाइस का इस्तेमाल करता था. मुख्य आरोपी की पहचान 42 वर्षीय अन्नासाहेब गिरी के रूप में हुई है.

यावत पुलिस स्टेशन के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर नारायण देशमुख ने बताया कि आरोपी 2024 से इस अवैध गतिविधि में शामिल था. वह डॉक्टर नहीं है और उसने केवल 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की है. उसने दावा किया कि उसने कुछ समय के लिए बी. फार्मेसी कोर्स में दाखिला लिया था, लेकिन पहले साल में फेल होने के बाद पढ़ाई छोड़ दी. कथित तौर पर भ्रूण लिंग जांच के लिए ब्लूटूथ के जरिए एक मोबाइल एप्लिकेशन से जुड़े, चीन में बने एक पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड डिवाइस का इस्तेमाल करता था.

जांचकर्ताओं के अनुसार, आरोपी जांच के लिए 5,000 से 15,000 रुपये के बीच फीस लेता था और गर्भपात चाहने वाली महिलाओं को इस नेटवर्क से जुड़े डॉक्टरों के पास भेज देता था. इस मामले में वाघोली के रहने वाले एक बीएएमएस डॉक्टर अतुल जाधव को भी अरेस्ट कर लिया गया है, दो अन्य डॉक्टर फरार हैं. पुलिस एक अन्य आरोपी नरेंद्र ठाकरे की हिरासत की मांग कर रही है, जिसने कथित तौर पर अल्ट्रासाउंड मशीन मुहैया कराई थी. शुरुआती जांच का हवाला देते हुए पुणे (ग्रामीण) के पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल ने बताया कि गिरी एक महीने में 30 से 50 जांचें करता था.

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