24 घंटे बीत गए, बोलीं नहीं सयानी! शत्रुघ्न और यूसुफ पठान भी खामोश!
24 घंटे बीत गए, बोलीं नहीं सयानी! शत्रुघ्न और यूसुफ पठान भी खामोश!

पश्चिम बंगाल की राजनीति में टीएमसी के अंदर भारी उथल-पुथल मची हुई है. टीएमसी के भीतर सुलग रही सियासी बगावत की आग अब खुलकर सामने आ गई है. टीएमसी विधायक के बाद सांसद भी अपना गुट बना लिए हैं. टीएमसी के उन 19 बागी सांसदों के लिस्ट सामने आ गई है, जिन्होंने काकोली घोष को अपना नेता और एनडीए को समर्थन करने के लिए लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखा है.
टीएमसी के बागी सांसदों के द्वारा लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को लिए गए पत्र में सयानी घोष, शत्रुघ्न सिन्हा और यूसुफ पठान के नाम भी शामिल हैं. इसके बाद भी तीन सबसे ग्लैमरस और बड़े चेहरे अभी तक चुप्पी साधे हुए हैं.
बागी सांसदों की लिस्ट आउट होने के 24 घंटे से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन सयानी घोष, शत्रुघ्न सिन्हा और यूसुफ पठान तीनों ने ही इस पर पूरी तरह से खामोशी अख्तियार कर रखी है, न तो कोई आधिकारिक बयान आया है और न ही सोशल मीडिया पर कोई सफाई. इस चुप्पी ने राजनीतिक गलियारों में कयासों के बाजार को बेहद गर्म कर दिया है.
शत्रुघ्न सिन्हा बगावत पर पूरी तरह खामोश शत्रुघ्न सिन्हा अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए मशहूर हैं, लेकिन उनका 24 घंटे तक चुप रहना किसी अचरज से कम नहीं है. आसनसोल लोकसभा सीट से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं. बागी लिस्ट में नाम आने के बाद आम तौर पर नेता तुरंत मीडिया के सामने आकर खंडन करते हैं, लेकिन शत्रुघ्न सिन्हा की तरफ से ऐसा न होना यह संकेत देता है कि वे फिलहाल 'वेट एंड वॉच' के मोड में हैं.
शत्रुघ्न सिन्हा की एंट्री मार्च 2022 में टीएमसी में हुई थी. बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा बाद में आसनसोल से टीएमसी के सांसद चुने गए. ममता बनर्जी ने साल 2022 के उपचुनाव में आसनसोल लोकसभा सीट से उन्हें जीतकर सांसद भेजा. 2024 लोकसभा चुनाव दोबारा से जीतने में सफल रहे. ममता बनर्जी ने गैर-बंगाली नेता को पार्टी के भीतर जो सम्मान और राजनीतिक तरजीह दी, लेकिन अब बागी घुट के साथ हो गए हैं.
क्रिकेट का हिटर पठान सियासी पिच पर शांत बहरामपुर से लोकसभा चुनाव जीतकर टीएमसी के सांसद बने पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान भी पूरी तरह मौन हैं. यूसुफ पठान को ममता बनर्जी ने सियासत में लेकर आईं और एक बड़े धर्मनिरपेक्ष चेहरे के रूप में प्रमोट करती रही हैं. ऐसे में बागी लिस्ट में उनका नाम होना और उसके बाद उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया न आना टीएमसी नेतृत्व के लिए माथे पर शिकन लाने वाला है. क्या यूसुफ पठान बंगाल की इस उलझी हुई राजनीति से खुद को दूर कर रहे हैं,या पर्दे के पीछे कोई नई स्क्रिप्ट लिखी जा रही है?
बगावत पर सयानी घोष कुछ नहीं बोलीं टीएमसी के बागी सांसदों में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नाम सयानी घोष का है.सयानी टीएमसी की युवा विंग की बड़ी नेता रही हैं और उन्हें ममता बनर्जी व अभिषेक बनर्जी का बेहद करीबी माना जाता रहा है. सयानी हर मुद्दे पर पार्टी का पक्ष रखने के लिए सोशल मीडिया और टीवी डिबेट्स में बेहद आक्रामक रहती हैं, लेकिन अब चुप हैं. सयानी के बागी होने की खबरों पर कोई खंडन न जारी करना यह दर्शाता है कि पार्टी के भीतर 'सब कुछ ठीक नहीं है'.
सयानी के बदल जाने को लेकर ममता बनर्जी भी बेचैन हैं. ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की चिंताएं बढ़ा दी हैं. सत्ता गंवाने के बाद पार्टी पहले से ही बिखराव के दौर से गुजर रही है, ऐसे में सयानी का बागी गुट के साथ जाने पर सवाल खड़े होने लगे हैं.
टीएमसी की तरह से बागी नेताओं से संपर्क साधने की कोशिश की जा रही है ताकि डैमेज कंट्रोल किया जा सके. कीर्ति आजाद ने कहा कि सयानी घोष से संपर्क के लिए कई बार फोन किया, लेकिन उन्होंने फोन उठाया नहीं. सयानी की तरफ सेकोई सकारात्मक प्रतिक्रिया न मिलना यह दिखाता है कि बगावत की जड़ें अनुमान से कहीं ज्यादा गहरी हैं.
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