चढ़ावा चोरी का मनी ट्रेल 7 बैंकों तक फैला, आरोपियों पर क्या-क्या खुलासे हुए?

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चढ़ावा चोरी का मनी ट्रेल 7 बैंकों तक फैला, आरोपियों पर क्या-क्या खुलासे हुए?

01 जुलाई 2026 को 09:06 am बजे
चढ़ावा चोरी का मनी ट्रेल 7 बैंकों तक फैला, आरोपियों पर क्या-क्या खुलासे हुए?

उत्तर प्रदेश की पुलिस और विशेष जांच टीम ने राम मंदिर दान चोरी मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों के न्यायिक हिरासत में होने के बीच सात प्रमुख बैंकों तक फैले फाइनेंशियल ट्रेल यानी मनी ट्रेल का पता लगाया है. जांच टीम ने इस पूरे गबन की गहराई तक जाने के लिए बैंकों से पिछले पांच सालों के रिकॉर्ड मांगे हैं, जिसमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक शामिल हैं. पुलिस ने बैंक खातों, लॉकरों और डिजिटल सबूतों के साथ-साथ एसबीआई के डोनेशन खातों को अपनी कड़ी निगरानी में ले लिया है. इस जांच के दायरे में ट्रस्ट के चंपत राय और अनिल मिश्रा के खाते भी आ गए हैं, जबकि अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच मंदिर का दान 157 करोड़ रुपये से घटकर 82.78 करोड़ रुपये रह गया है.

चंपत राय और अनिल मिश्रा के खाते रडार पर पुलिस की जांच टीम अब इस बात की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है कि ये वित्तीय हेराफेरी सिर्फ कुछ लोगों का काम था या इसके पीछे कोई बहुत बड़ी व्यवस्थागत खामी जिम्मेदार थी. बैंक ऑफ बड़ौदा ने इस पूरे मामले में अपनी भूमिका को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया है. वहीं दूसरी तरफ, ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों चंपत राय और अनिल मिश्रा के बैंक खाते भी अब पूरी तरह से पुलिस जांच के रडार पर आ चुके हैं.

दान की रकम में भारी गिरावट जांच में ये भी सामने आया है कि अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 की अवधि के दौरान भक्तों द्वारा किए जाने वाले दान में एक बड़ी गिरावट देखी गई है. हालांकि, राम मंदिर ट्रस्ट लगातार किसी भी बड़े पैमाने पर गबन होने की बात से साफ इनकार कर रहा है. ट्रस्ट का दावा है कि श्रद्धालुओं का चढ़ावा पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन पुलिस कई अन्य संदिग्धों को नोटिस जारी कर उनके बयान दर्ज कर रही है.अब तक क्या-क्या खुलासे हुए चंदा चोरी की बात सामने आने के बाद SIT ने गहन जांच के बाद आठ आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कर सभी को गिरफ्तार कर लिया है  जो फिलहाल 14 दिन की न्यायिक हिरासत में हैं. पुलिस ने आरोपियों के बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल सबूत (मोबाइल, मैसेज, ईमेल) और सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है. पुलिस ने आठ आरोपियों में एक, अविनाश शुक्ला समेत कुछ आरोपियों के ठिकानों से बड़ी रकम बरामद की है. साथ ही पुलिस पूछताछ में चढ़ावे की राशि को डायवर्ट करने, नकदी की आवाजाही और अन्य लोगों की भूमिका के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है. जांच टीम का मानना है कि ये अकेले कुछ लोगों का काम है या फिर ट्रस्ट में सिस्टेमैटिक गड़बड़ी भी शामिल हैं.

इसके अलावा पुलिस अधिकारी मंगलवार को दिनभर अदालत में आरोपियों की पुलिस कस्टडी रिमांड की अर्जी दाखिल करने के लिए जरूरी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करते नजर आए. पुलिस का मानना है कि इस पूरे घोटाले के काम करने के तरीके (मोडस ऑपेरंडी) को समझने, वित्तीय लेन-देन के पूरे रास्ते का पता लगाने और आरोपियों को डॉक्यूमेंट्स तथा इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के सामने बैठाकर पूछताछ करने के लिए उन्हें हिरासत में लेना जरूरी है.

सुप्रीम कोर्ट ने टाली जांच की सुनवाई उधर, इस पूरे मामले को लेकर कानूनी लड़ाई भी अब काफी तेज हो गई है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अदालत की निगरानी में इस घोटाले की सीबीआई जांच कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई को जुलाई तक के लिए टाल दिया है. इस बीच फैजाबाद बार एसोसिएशन ने एक बड़ा फैसला लेते हुए ऐलान कर दिया है कि उनका कोई भी सदस्य कोर्ट में इन आठों आरोपियों की तरफ से वकालत नहीं करेगा.

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