अमेरिका के आरोपों पर बिफरा भारत, कहा- अपने लिए बनाते हैं सामान

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अमेरिका के आरोपों पर बिफरा भारत, कहा- अपने लिए बनाते हैं सामान

10 जून 2026 को 07:06 pm बजे
अमेरिका के आरोपों पर बिफरा भारत, कहा- अपने लिए बनाते हैं सामान

अमेरिका के एक आरोप का भारत सरकार ने तगड़ा जवाब दिया है. दरअसल अमेरिका ने आरोप लगाया कि भारत टेक्सटाइल और स्टील सेक्टर में जरूरत से ज्यादा प्रोडक्शन कर रहा है. इससे वैश्विक व्यापार प्रभावित हो सकता है. इस आरोप को भारत ने सिरे से खारिज कर दिया है.

भारत ने अमेरिका को साफ शब्दों में कह दिया है कि उसका प्रोडक्शन पूरी तरह से स्थानीय मांग और देश की 140 करोड़ आबादी की जरूरतों से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे किसी भी रूप में वैश्विक बाजार को प्रभावित करने वाली ओवरसप्लाई नहीं माना जा सकता.

यूएसटीआर की 'धारा 301' जांच  यह विवाद तब शुरू हुआ जब यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने अपने 'सेक्शन 301' के तहत एक व्यापक जांच शुरू की. इस जांच में वाशिंगटन ने भारत सहित कई व्यापारिक भागीदारों पर आरोप लगाया है कि वे सरकारी नीतियों और सब्सिडी के माध्यम से सोलर मॉड्यूल, पेट्रोकेमिकल्स, स्टील और टेक्सटाइल जैसे उद्योगों में जरूरत से ज्यादा निर्माण कर रहे हैं.

इसके अलावा अमेरिका ने वर्ष 2025 में भारत के साथ अपने 42 बिलियन डॉलर के माल ट्रेड सरप्लश को लेकर भी आपत्ति जताई थी, जिसके आधार पर वह भारतीय उत्पादों पर जवाबी टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है.

भारत ने आरोपों को किया खारिज  अमेरिकी आरोपों पर सख्त आपत्ति जताते हुए भारत के वाणिज्य मंत्रालय के अतिरिक्त व्यापार सचिव अमिताभ कुमार ने कहा कि भारत में टेक्सटाइल या स्टील उद्योग में कोई भी अतिरिक्त क्षमता मौजूद नहीं है. उन्होंने तर्क दिया कि किसी भी देश की उत्पादन क्षमता का आकलन उसकी आबादी के आकार, घरेलू मांग और विकास की आवश्यकताओं के संदर्भ में किया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा, 'ओवरकैपेसिटी किसी देश के अपने दृष्टिकोण पर निर्भर करती है. हमारा मानना है कि भारत के पास किसी भी चीज की अतिरिक्त क्षमता नहीं है.' उन्होंने आगे जोड़ा कि भारत में कपड़ा उत्पादों की प्रति व्यक्ति खपत, विशेष रूप से मानव निर्मित फाइबर के मामले में अभी भी विकसित देशों की तुलना में काफी कम है.

अमेरिका के आरोपों में दम नहीं  इसके अलावा भारतीय कपड़ा उद्योग के शीर्ष संगठन TEXPROCIL ने भी यूएसटीआर को सौंपे अपने जवाब में अमेरिकी दावों को चुनौती दी है. संगठन के अनुसार, भारत के सूती कपड़ा उद्योग का 80 प्रतिशत से अधिक उत्पादन घरेलू बाजार में ही खप जाता है, यानी 20 फीसदी हिस्सा ही निर्यात हो पाता है. जिससे निर्यात-आधारित अतिरिक्त क्षमता की अमेरिकी दलील बेबुनियाद साबित होती है.

इसी तरह, स्टील क्षेत्र को लेकर भारत ने कहा कि दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक होने के बावजूद, देश में प्रति व्यक्ति स्टील की खपत वैश्विक स्तर पर सबसे कम है. फिलहाल में भारत का इस्पात उत्पादन पूरी तरह से देश के अपने बुनियादी ढांचे के विकास और निर्माण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए हो रहा है.

वहीं जानकारों का मानना है कि अमेरिका द्वारा 'धारा 301' के तहत अतिरिक्त क्षमता और जबरन श्रम जैसे मुद्दों को उठाना वास्तव में भारत पर दबाव बनाने की एक सोची-समझी रणनीति है. वाशिंगटन इस दबाव के जरिए भारत को अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए अपना बाजार खोलने और अधिक मात्रा में अमेरिकी ऊर्जा और रक्षा उपकरणों को खरीदने के लिए मजबूर करना चाहता है.

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