कछुओं और मछलियों से क्यों डर रहा चीन? समंदर में जासूसी का खतरा

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कछुओं और मछलियों से क्यों डर रहा चीन? समंदर में जासूसी का खतरा

15 जून 2026 को 10:58 am बजे
कछुओं और मछलियों से क्यों डर रहा चीन? समंदर में जासूसी का खतरा

चीन और विदेशी खुफिया एजेंसियों के बीच चल रहा जासूसी का खेल अब एक बेहद अजीबोगरीब और आधुनिक मोड़ पर पहुंच गया है. चीन के राज्य सुरक्षा मंत्रालय ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि विदेशी खुफिया एजेंसियां चीन के समुद्री क्षेत्र में जासूसी करने के लिए 'जासूस कछुओं' और 'जासूस मछलियों' का इस्तेमाल कर रही हैं.

मंत्रालय ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'वीचैट' पर पोस्ट करते हुए चेतावनी दी है कि चीन के तटीय इलाकों और गहरे समंदर में 'जासूसी का एक अदृश्य और गुप्त युद्ध' छिड़ा हुआ है. चीन का आरोप है कि विदेशी ताकतें उसके समुद्री डेटा को चुराने के लिए अत्याधुनिक और नए जमाने के जासूसी उपकरणों का सहारा ले रही हैं.

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जीवित समुद्री जीवों पर लगाए जा रहे हैं हाई-टेक सेंसर

चीनी सुरक्षा मंत्रालय ने इस जासूसी के काम करने के तरीके का खुलासा करते हुए दावा किया कि कुछ खास चीनी जलक्षेत्रों में बड़े आकार के जीवित समुद्री जीवों, जैसे कछुओं को पकड़ा जाता है. इसके बाद उनके शरीर पर अत्याधुनिक ट्रैकिंग सेंसर फिट कर दिए जाते हैं.

इन जीवों को फिर विशेष समुद्री इलाकों में तैरने के लिए छोड़ दिया जाता है. जैसे-जैसे ये जीव समंदर में आगे बढ़ते हैं, उनके शरीर पर लगे सेंसर वहां का संवेदनशील डेटा इकट्ठा करते हैं और उसे सीधे विदेशी उपग्रहों को ट्रांसफर कर देते हैं. हालांकि, चीन ने अपनी इस रिपोर्ट में किसी खास देश का नाम नहीं लिया है. न ही यह बताया है कि ये जासूस जीव किस इलाके में पकड़े गए हैं.

समंदर में तैर रहे हैं विदेशी 'ग्लाइडर' और 'नेविगेशन बुआए'

चीन के अनुसार, विदेशी एजेंसियां केवल समुद्री जीवों का ही इस्तेमाल नहीं कर रही हैं, बल्कि उन्होंने चीनी नौसेना की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कई अन्य हाई-टेक उपकरण भी तैनात किए हैं. इनमें पानी पर तैरने वाले 'डिटेक्शन बुआए' और नए जमाने के 'वेव ग्लाइडर्स' शामिल हैं.

चीनी मंत्रालय का कहना है कि इन उपकरणों का मुख्य मकसद चीन के तटीय इलाकों का अंडरवाटर मैप तैयार करना, चीनी नौसेना के जहाजों और पनडुब्बियों की आवाजाही को ट्रैक करना और चीन के तेल और गैस भंडारों की जानकारी जुटाना है.

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इस गुप्त खतरे से निपटने के लिए चीन सरकार ने अपने देश के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, नाविकों और विशेषकर मछुआरों से सतर्क रहने की अपील की है. सरकार ने कहा है कि समंदर में मछली पकड़ने के दौरान अगर किसी को भी कोई संदिग्ध उपकरण या अजीब व्यवहार करने वाला समुद्री जीव दिखे, तो तुरंत उसकी रिपोर्ट की जाए.

चीन पहले भी संदिग्ध समुद्री जासूसी उपकरणों को खोज निकालने और सरकार को सौंपने वाले मछुआरों को भारी-भरकम नकद इनाम देता रहा है. कुछ मछुआरों को जासूसी डिवाइस ढूंढने के बदले 5 लाख युआन (60 लाख रुपये से अधिक) तक का इनाम दिया जा चुका है.

जब रूस पर लगा था जासूस 'व्हेल' और 'डॉल्फिन' पालने का आरोप

समुद्री जीवों को सेना या जासूसी में शामिल करने का यह कोई पहला मामला नहीं है. साल 2019 में नॉर्वे के तट पर एक 'बेलुगा व्हेल' मिली थी, जिसके शरीर पर एक बेल्ट बंधी हुई थी. इस बेल्ट पर एक छोटा कैमरा लगाने का स्टैंड बना हुआ था, जिसके बाद दुनिया भर में यह चर्चा तेज हो गई थी कि इस व्हेल को रूसी नौसेना द्वारा जासूसी के लिए ट्रेनिंग दी गई थी.

इसके अलावा, साल 2023 में ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने भी दावा किया था कि रूस यूक्रेन के गोताखोरों और कमांडो हमलों से बचने के लिए क्रीमिया के पास अपने ब्लैक सी बेस पर 'किलर डॉल्फिन'को ट्रेनिंग दे रहा है.

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