भारत के चीनी एक्सपोर्ट पर लगेगा कई साल का ब्रेक!

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भारत के चीनी एक्सपोर्ट पर लगेगा कई साल का ब्रेक!

23 जून 2026 को 08:43 am बजे
भारत के चीनी एक्सपोर्ट पर लगेगा कई साल का ब्रेक!

भारत दुनिया के चीनी उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन आने वाले सालों में तस्वीर बदल सकती है. मौसम विशेषज्ञों ने इस साल अल-नीनो के असर से कम बारिश की आशंका जताई है. सरकार के इथेनॉल पर बढ़ते फोकस की वजह से गन्ने का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है. ऐसे में जानकारों का कहना है कि कम से कम तीन साल तक भारत के पास इतनी ज्यादा चीनी नहीं बच सकती कि वह बड़े पैमाने पर देशों को बेच सके.

भारत में गन्ने की खेती काफी हद तक मॉनसून पर निर्भर करती है. मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, इस साल बारिश सामान्य से कम रह सकती है. जून महीने में भी कई जगहों पर सामान्य से कम बारिश हुई है. इसी वजह से कुछ किसान गन्ने की जगह सोयाबीन, अरहर और दूसरी कम पानी वाली फसलें लगाने का फैसला कर रहें हैं. अगर ऐसा ही रहा तो आने वाले सीजन में गन्ने की खेती और उत्पादन दोनों पर असर पड़ सकता है.

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उद्योग के अनुमान के मुताबिक, 2025-26 सीजन में भारत का चीनी उत्पादन करीब 2.79 करोड़ टन रह सकता है. वहीं देश में हर साल करीब 2.85 करोड़ टन चीनी की खपत होती है. यानी देश में जितनी चीनी बन रही है, उससे ज्यादा चीनी की जरूरत है. इसी वजह से मिलों में चीनी का स्टॉक घटकर करीब 35 लाख टन रह सकता है, जो कई दशक में सबसे कम लेवल में से एक होगा.

सरकार पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ाने पर जोर दे रही है ताकि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम की जा सके. इसके लिए गन्ने और उससे जुड़े उत्पादों का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में बढ़ रहा है. फिलहाल देश में इथेनॉल की मांग करीब 12 से 13 अरब लीटर है. आने वाले सालों में यह बढ़कर 30 अरब लीटर तक पहुंच सकती है. ऐसे में गन्ने का बड़ा हिस्सा चीनी की बजाय इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल हो सकता है.

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भारत पहले दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी का एक्सपोर्टर था. 2022-23 तक पांच सालों में देश हर साल आमतौर पर 68 लाख टन चीनी विदेशों में बेचता था, जो वैश्विक चीनी करोबार का करीब 10% हिस्सा था. अब हालात बदल चुके हैं. सरकार की प्राथमिकता देश के भीतर चीनी की उपलब्धता बनाए रखना है. आने वाले सीजन में भी चीनी निर्यात को लेकर सख्त रुख देखने को मिल सकता है.

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अल-नीनो का असर ज्यादा रहा और गन्ने की खेती में बड़ी गिरावट आई, तो आने वाले वर्षों में भारत को विदेशों से चीनी खरीदने की जरूरत भी पड़ सकती है. भारत ने आखिरी बार 2016-17 और 2017-18 में चीनी आयात की थी. उस समय सूखे और कम उत्पादन की वजह से ऐसी स्थिति बनी थी.

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इससे पहले 2009 और 2010 में भारत की बड़ी खरीदारी ने दुनिया भर में चीनी की कीमतों को काफी ऊपर पहुंचा दिया था. कम बारिश की आशंका, गन्ने की खेती पर बढ़ता दबाव और इथेनॉल की बढ़ती मांग भारत के चीनी सेक्टर के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभर रहे हैं.

अगर मौसम के अनुमान सही साबित होते हैं, तो आने वाले कुछ सालों तक देश के पास विदेशों में बेचने के लिए अतिरिक्त चीनी कम बच सकती है. इतना ही नहीं, हालात ज्यादा बिगड़े तो भारत को भविष्य में चीनी आयात करने पर भी विचार करना पड़ सकता है.

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