आकांक्षा की मौत का सदमा! पिता की बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में भर्ती

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आकांक्षा की मौत का सदमा! पिता की बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में भर्ती

05 जून 2026 को 09:19 am बजे
आकांक्षा की मौत का सदमा! पिता की बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में भर्ती

मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले के मगनिया गांव की रहने वाली छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी की मृत्यु के बाद परिवार शोक में डूबा हुआ है. परिजनों का कहना है कि वह NEET परीक्षा की तैयारी कर रही थी और हाल ही में आयोजित परीक्षा में करीब 650 अंक मिलने की उम्मीद जता रही थी. उनका आरोप है कि पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की घटनाओं के बाद वह लगातार मानसिक दबाव में रहने लगी थी, जिसके बाद यह दुखद घटना हुई.

आकांक्षा चतुर्वेदी अब इस दुनिया में नहीं हैं. डॉक्टर बनने का सपना देखने वाली इस होनहार छात्रा की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है. परिवार का आरोप है कि NEET पेपर लीक और परीक्षा को लेकर बनी अनिश्चितता ने उनकी बेटी को इतना तोड़ दिया कि उसने आत्मघाती कदम उठा लिया. अब इस मामले पर राजनीति भी तेज हो गई है. राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है, जबकि बीजेपी ने इसे विपक्ष का प्रोपेगेंडा बताया है.

मऊगंज के आकांक्षा के छोटे से घर में आज सन्नाटा पसरा है. हर कोना आकांक्षा की याद दिलाता है. मां की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे. परिवार का कहना है कि डॉक्टर बनने का सपना देखने वाली उनकी इकलौती बेटी अब हमेशा के लिए उन्हें छोड़ गई.

मां नीलम चतुर्वेदी का कहना है कि पेपर तो दोबारा करा लोगे, लेकिन मेरी बेटी को लौटा पाओगे क्या? आकांक्षा नागपुर में रहकर NEET की तैयारी कर रही थी. परिवार के मुताबिक परीक्षा देने के बाद वह बेहद खुश थी और उसे अच्छे अंक आने की उम्मीद थी. लेकिन पेपर लीक और फिर परीक्षा रद्द की खबरें सामने आने के बाद वह गहरे तनाव में चली गई. परिजनों का कहना है कि घटना से तीन दिन पहले उसने खाना-पीना तक छोड़ दिया था. पेपर लीक की खबर के बाद वह बिल्कुल बदल गई थी.

आकांक्षा के पिता कृष्ण कुमार चतुर्वेदी किसान हैं. बेटी को डॉक्टर बनाने के लिए उन्होंने लाखों रुपये का कर्ज लिया. परिवार का दावा है कि पढ़ाई और कोचिंग के लिए 15 से 20 लाख रुपये तक का कर्ज हो चुका है. बेटी की मौत की खबर सुनने के बाद पिता की तबीयत बिगड़ गई और वे अस्पताल में भर्ती हैं. मां नीलम चतुर्वेदी बताती हैं कि पति दो बार हार्ट अटैक झेल चुके हैं. लकवे के बाद भी उन्होंने बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत करना नहीं छोड़ा. उन्हें भरोसा था कि एक दिन उनकी बेटी डॉक्टर बनकर परिवार की तकदीर बदल देगी. मां नीलम चतुर्वेदी का कहना की वो कहते थे कि 'बेटी डॉक्टर बन जाएगी तो सारी परेशानी दूर हो जाएगी.'

इस मामले ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए. राहुल गांधी ने लिखा कि आकांक्षा की मौत सिर्फ आत्महत्या नहीं बल्कि एक भ्रष्ट और टूटी हुई व्यवस्था की देन है. कांग्रेस ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दावा किया कि NEET विवाद और उससे जुड़े तनाव के बीच छह छात्रों की मौत हुई है. पार्टी ने इसे शिक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता बताया. दूसरी तरफ बीजेपी ने कांग्रेस पर झूठ और भय फैलाने का आरोप लगाया है.

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