PoK में शहबाज सरकार के खिलाफ गुस्सा, इंटरनेट बंद- टूरिस्ट के आने पर रोक; क्यों आंदोलन पर उतारू लोग?

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PoK में शहबाज सरकार के खिलाफ गुस्सा, इंटरनेट बंद- टूरिस्ट के आने पर रोक; क्यों आंदोलन पर उतारू लोग?

06 जून 2026 को 09:43 am बजे
PoK में शहबाज सरकार के खिलाफ गुस्सा, इंटरनेट बंद- टूरिस्ट के आने पर रोक; क्यों आंदोलन पर उतारू लोग?
PoK में शहबाज सरकार के खिलाफ गुस्सा, इंटरनेट बंद- टूरिस्ट के आने पर रोक; क्यों आंदोलन पर उतारू लोग?
शहबाज सरकार के खिलाफ पीओके में बड़े पैमाने पर हिंसक प्रदर्शन होने की आशंका जताई जा रही है. (फाइल फोटो)
AFP

पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पाकिस्तान सरकार की मनमानी जारी है.पाकिस्तान की कठपुतली सरकार ने पीओके के सबसे बड़े नागरिक अधिकार संगठन 'जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JKJAAC) पर बैन लगा दिया है. इतना ही नहीं, अपनी दमनकारी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने वाले इस संगठन को पाकिस्तानी हुक्मरानों ने 'आतंकवादी संगठन' घोषित कर दिया है. इस फैसले के बाद पूरे पीओके में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं और किसी भी वक्त बड़े पैमाने पर हिंसा और विद्रोह भड़कने की आशंका है.

इसके साथ ही खबर है कि पाकिस्तानी फौज ने JKJAAC के नेताओं पर आधी रात को हमला किया है. जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के लीडर उमर नजीर कश्मीरी घायल हो गए. ऐसा लगता है कि ये हमला ग्रुप पर बैन लगने के बाद प्लान किए गए प्रोटेस्ट को रोकने के लिए किया गया था. इस हमले में JAAC मेंबर मारा गया, जबकि कई दूसरे घायल हो गए. 

दरअसल, यह अवामी कमेटी पिछले कई महीनों से पाकिस्तान सरकार और पाकिस्तानी सेना की तानाशाही के खिलाफ सड़कों पर है. पीओके के लोग लंबे समय से पाकिस्तान की ओर से किए जा रहे सौतेले व्यवहार, संसाधनों की लूट और बुनियादी अधिकारों के हनन के खिलाफ शांतिपूर्ण आंदोलन चला रहे थे. इस आंदोलन को कुचलने के लिए अब पाकिस्तानी हुकूमत ने सीधे तौर पर अवामी कमेटी को ही प्रतिबंधित कर दिया है.

दमन और भेदभाव के खिलाफ उठ रही थी आवाज

अवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में पीओके की जनता पिछले कई महीनों से लगातार विरोध प्रदर्शन और आंदोलन कर रही थी. इस आंदोलन की मुख्य वजह पाकिस्तान सरकार और उसकी सेना की तरफ से पीओके के लोगों के साथ किया जा रहा दोयम दर्जे के नागरिकों जैसा बर्ताव है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि पाकिस्तान उनके प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल तो करता है, लेकिन बदले में उन्हें सिर्फ तबाही और भेदभाव मिलता है.

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पीओके में बुनियादी मानवाधिकार और मौलिक अधिकार नाम की कोई चीज नहीं बची है. महंगाई, आटे-बिजली के आसमान छूते दाम और बुनियादी सुविधाओं की कमी से त्रस्त जनता जब सड़कों पर उतरी, तो पाकिस्तानी सेना ने उन्हें दबाने के लिए हर हथकंडा अपनाया. जब सेना के दम पर आंदोलन नहीं रुका, तो सरकार ने इस पूरे नागरिक संगठन पर ही आतंकवाद का ठप्पा लगा दिया ताकि इस आवाज को हमेशा के लिए खामोश किया जा सके.

पूरे पीओके में इंटरनेट बंद, पर्यटकों के लिए एडवाइजरी जारी

इस तानाशाही फैसले के बाद पूरे पीओके में बड़े पैमाने पर हिंसक प्रदर्शन होने की आशंका जताई जा रही है. लोग इस प्रतिबंध के विरोध में सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं. भड़कते जनआक्रोश को देखते हुए घबराई पाकिस्तान सरकार ने पूरे पीओके में इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह से ठप कर दिया है, ताकि लोग एक-दूसरे से संपर्क न कर सकें और विरोध की तस्वीरें या वीडियो बाहर न आ सकें.

पाकिस्तान सरकार ने एक ट्रैवल एडवाइजरी भी जारी की है. इसमें पर्यटकों और आम नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे 5 जून से लेकर 20 जून के बीच पीओके की यात्रा करने से पूरी तरह बचें.

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