Sunday Surya Dev Puja: रविवार के दिन सुबह, दोपहर, शाम को सूर्य की पूजा करने का क्या होता है मतलब?

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Sunday Surya Dev Puja: रविवार के दिन सुबह, दोपहर, शाम को सूर्य की पूजा करने का क्या होता है मतलब?

14 जून 2026 को 06:00 am बजे
Sunday Surya Dev Puja: रविवार के दिन सुबह, दोपहर, शाम को सूर्य की पूजा करने का क्या होता है मतलब?
Sunday Surya Dev Puja: रविवार के दिन सुबह, दोपहर, शाम को सूर्य की पूजा करने का क्या होता है मतलब?

Surya Dev Worship on Sunday: सनातन धर्म में सूर्य को देवता का दर्जा प्राप्त है. पंच देवों में सूर्य ही एकमात्र ऐसे देवता हैं जो प्रत्यक्ष रूप से नजर आते हैं. रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित किया गया है. इस दिन भगवान सूर्य की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. साथ ही व्रत रखा जाता है. रविवार के दिन सुबह, दोपहर और शाम को सूर्य की पूजा की जा सकती है. धार्मिक मान्यता है रविवार के दिन सूर्य देव को जल चढ़ाने से यश-पुण्य, सुख-सौभाग्य और प्रतिष्ठा प्राप्त होती है.

मान्यता ये भी है कि रविवार को की जाने वाली पूजा से प्रसन्न होकर भगवान सूर्य आरोग्यता और सफलता का आशीर्वाद देते हैं. ऋग्वेद के अनुसार, सूर्योदय होने के 1 घंटे के अंदर सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए, क्योंकि इस दौरान सूर्य देव शीतल होते हैं. इस समय सूर्य की किरणें शरीर पर पड़ने से बीमारियों से मुक्ति मिलती है. साथ ही कार्यों में सफलता, आत्म बल में वृद्धि और राजकृपा का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

अलग-अलग समय पर सूर्य पूजा का अर्थ और लाभ

रविवार को सुबह सूर्य देव की पूजा करने से शारीरिक ऊर्जा, मानसिक शांति और सकारात्मकता बढ़ती है.रविवार के दिन दोपहर के समय सूर्य की पूजा में मंत्रों का जाप करने की सलाह दी जाती है. दोपहर के समय ‘ॐ सूर्याय नमः’ या अन्य मंत्रों का जाप करने से आध्यात्मिक शुद्धि और आंतरिक तेज बढ़ता है. मानसिक स्पष्टता के लिए दोपहर को सूर्य पूजा बड़ी लाभकारी मानी जाती है. वहीं ढलते हुए सूर्य (यानि ‘प्रत्यूषा’) की पूजा कृतज्ञता व्यक्त करने और दिनभर की नकारात्मकता को दूर करने के लिए की जाती है.

सूर्य पूजा का धार्मिक महत्व

ज्योतिष के अनुसार, सूर्यदेव को अन्य सभी ग्रहों का राजा माना जाता है. प्राचीन काल से ही सुबह के समय सूर्य देव का पूजन किया जा रहा है. सिर्फ मनुष्य ही नहीं देवता भी सूर्य की पूजा के बाद ही अपनी दिनचर्या शुरू करते थे. भगवान श्रीराम ने भी लंका जाने से पहले सूर्य को जल चढ़ाया था और उनकी पूजा की थी. भविष्य पुराण में श्रीकृष्ण ने अपने पुत्र को सूर्य पूजा का महत्व बताया है. श्रीकृष्ण के पुत्र सांब का कुष्ठ रोग सूर्य की उपासना से ही दूर हुआ था.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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