'आज भूख हड़ताल खत्म कर दूंगा, अगर...', सोनम वांगचुक ने रखीं 3 शर्तें
'आज भूख हड़ताल खत्म कर दूंगा, अगर...', सोनम वांगचुक ने रखीं 3 शर्तें

सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने अपना अनशन खत्म करने का ऐलान कर दिया है. हालांकि, उन्होंने सरकार के सामने अपनी कुछ शर्तें भी रखी हैं. उनका कहना है कि अगर सरकार उनकी तीन शर्तों में से किसी एक शर्त को भी पूरी कर देती है तो वह अपना अनशन तोड़ देंगे.
वांगचुक ने अपना अनशन खत्म करने का ऐलान करते हुए एक्स पर लिखा, '...मैं 20 जुलाई को अपना अनशन खत्म कर दूंगा, अगर.' उन्होंने अपनी पहली शर्ते रखते हुए सरकार से मांग की कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में हालिया नाकामियों, पेपर लीक वगैरह की जिम्मेदारी ले.
वांगचुक ने दूसरी शर्त में कहा है कि यदि वह और सीजेपी (CJP) का नेतृत्व संसद के दरवाजे तक पहुंचते हैं और विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद एवं नेता उन्हें संसद में इस विषय को प्रमुखता से उठाने का आश्वासन देते हैं तो वह भूख हड़ताल खत्म कर देंगे. तीसरी शर्त के अनुसार, उन्होंने कहा कि अगर मेरे स्वास्थ्य या दूसरी अन्य वजह से ऐसा करना संभव नहीं हो तो अलग-अलग पार्टियों के सांसद और नेता अस्पताल में आकर ऊपर रखी गई शर्तें पूरा करने का भरोसा दिलाएं.
WHEN WILL I END THE FAST….! Not withstanding my health my fast continues till after the Sansad Chalo March, and will be broken only under the following circumstances… pic.twitter.com/kaOGx2Nk4T
सफदरजंग अस्पताल में ‘अवैध हिरासत’ का आरोप उन्होंने अंत में मांग की कि सफदरजंग अस्पताल में अपनी स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि वह इस वक्त अस्पताल में अवैध हिरासत का सामना कर रहे हैं. वांगचुक के अनुसार, अस्पताल परिसर के अंदर उनकी आवाजाही की आजादी, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोगों से बातचीत व संचार करने के अधिकारों को प्रशासन द्वारा पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है.
इसी बीच सफदरगंज अस्पताल ने सोमवार सुबह 10 बजे हेल्थ बुलेटिन जारी कर कहा, 'सोनम वांगचुक को VMMC और सफदरजंग अस्पताल में व्यापक मेडिकल देखभाल मिल रही है. उनके वाइटल पैरामीटर्स स्थिर हैं. ब्लड पैरामीटर्स की बारीकी से क्लिनिकल निगरानी की जरूरत बनी हुई है. वांगचुक लगातार मेडिकल देखरेख और विशेषज्ञों की एक मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम की कड़ी निगरानी में हैं.'
बुलेटिन में कहा गया, 'VMMC और सफदरजंग अस्पताल तथा AIIMS, नई दिल्ली की इलाज करने वाली टीमों के क्लिनिकल आकलन के आधार पर, किसी भी संभावित जटिलता का जल्द पता लगाने और समय पर इलाज सुनिश्चित करने के लिए लगातार मेडिकल हस्तक्षेप और बिना रुकावट क्लिनिकल निगरानी जरूरी है. उन्हें सभी जरूरी मेडिकल देखभाल मिल रही है और विशेषज्ञों की एक मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम उनकी क्लिनिकल स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही है.'
बता दें कि सोनम वांगचुक CJP के आंदोलन में शामिल होकर 28 जून से अनशन कर रहे हैं, जिसमें मुख्य मांग शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करना है. इसमें NEET समेत विभिन्न परीक्षाओं के पेपर लीक, परीक्षा अनियमितताओं पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और छात्रों के मुद्दों पर सरकार से जवाबदेही की मांग शामिल है. साथ ही वह लद्दाख के पर्यावरण, संस्कृति संरक्षण और छठी अनुसूची सहित संवैधानिक सुरक्षा, स्टेटहुड और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की लंबित मांगों पर केंद्र सरकार से संवाद और जवाबदेही के लिए भी लड़ाई लड़ रहे हैं.
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