न्यूजीलैंड के ऑफिस में क्यों कहा जाता है- '40 घंटे से ज्यादा काम मत करो'?

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न्यूजीलैंड के ऑफिस में क्यों कहा जाता है- '40 घंटे से ज्यादा काम मत करो'?

11 जुलाई 2026 को 01:33 pm बजे
न्यूजीलैंड के ऑफिस में क्यों कहा जाता है- '40 घंटे से ज्यादा काम मत करो'?

भारत में काम के घंटे (वर्किंग आवर्स), ओवरटाइम और वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर अक्सर बहस होती रहती है. बेहतर नौकरी, अच्छी सैलरी और जीवन स्तर की तलाश में बड़ी संख्या में भारतीय विदेशों का रुख भी करते हैं. ऐसे में जब कोई भारतीय विदेश के वर्क कल्चर का अपना अनुभव साझा करता है, तो वह सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो जाता है. इन दिनों न्यूजीलैंड में काम कर रहीं भारतीय महिला यामिका गांधी का एक ऐसा ही वीडियो चर्चा में है.

यामिका ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर वीडियो शेयर करते हुए बताया कि न्यूजीलैंड में कर्मचारियों को सिर्फ काम करने वाली मशीन नहीं, बल्कि एक इंसान की तरह देखा जाता है. उन्होंने कहा कि वहां कर्मचारियों के समय, मेहनत और निजी जिंदगी का सम्मान किया जाता है.

यामिका ने वीडियो में अपना ऑफिस दिखाया, जो शुक्रवार शाम करीब 4 बजे लगभग खाली नजर आता है. उन्होंने बताया कि शुक्रवार को उनके ज्यादातर सहकर्मी घर से काम करते हैं. उनके मुताबिक, न्यूजीलैंड में तय समय के बाद देर तक ऑफिस में रुकना सामान्य बात नहीं मानी जाती.

यामिका ने बताया कि हाल ही में उन्होंने एक महत्वपूर्ण काम पूरा किया था. इसके बाद उनके एक सहकर्मी ने उन्हें मैसेज भेजा.Thank you Yamika, really appreciate the work that you do.

यामिका ने कहा कि शुरुआत में उन्हें यह सुनकर अजीब लगता था, क्योंकि वह इसे अपनी सामान्य जिम्मेदारी मानती थीं. लेकिन वहां छोटे-से-छोटे काम के लिए भी सहकर्मी एक-दूसरे की सराहना करते हैं.

यामिका के मुताबिक, उनके सहकर्मी अक्सर कहते हैं कि बहुत देर तक ऑफिस में मत रुको, घर जाओ.उन्होंने बताया कि नौकरी शुरू करने के समय ही उनके मैनेजर ने साफ कहा था कि सप्ताह में 40 घंटे से ज्यादा काम नहीं करना है. अगर किसी डेडलाइन की वजह से अतिरिक्त घंटे काम करना पड़े, तो किसी दूसरे दिन छुट्टी या समय लेकर उसकी भरपाई करने की सलाह दी जाती है.

यामिका का कहना है कि न्यूजीलैंड में कर्मचारियों को सिर्फ एक एम्प्लॉयी नहीं, बल्कि इंसान के तौर पर देखा जाता है. अगर कोई कर्मचारी किसी परेशानी से गुजर रहा हो या अच्छा महसूस नहीं कर रहा हो, तो मैनेजर और सहकर्मी उसका हालचाल पूछते हैं और जरूरत पड़ने पर सहयोग भी करते हैं.

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यामिका ने अपने अनुभव के आधार पर कहा कि भारत के कई कार्यस्थलों पर कर्मचारियों से ओवरटाइम और कभी-कभी वीकेंड में भी काम करने की अपेक्षा की जाती है. कई जगह मेहनत का आकलन काम की गुणवत्ता के बजाय ऑफिस में बिताए गए घंटों से भी जोड़ा जाता है. हालांकि, अलग-अलग कंपनियों का वर्क कल्चर अलग हो सकता है और हर कर्मचारी का अनुभव भी एक जैसा नहीं होता.

वीडियो वायरल होने के बाद हजारों लोगों ने अपनी राय साझा की. कई यूजर्स ने लिखा कि उन्हें भी ऐसा वर्क कल्चर चाहिए, जहां कर्मचारियों के काम के साथ-साथ उनके निजी जीवन का भी सम्मान किया जाए.

हालांकि, कुछ लोगों ने अलग राय भी रखी. उनका कहना था कि किसी एक कर्मचारी के अनुभव के आधार पर पूरे देश के वर्क कल्चर के बारे में निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता, क्योंकि हर कंपनी की कार्य संस्कृति अलग होती है.

फिलहाल, यामिका गांधी का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और वर्क-लाइफ बैलेंस, ओवरटाइम और कर्मचारियों के प्रति व्यवहार को लेकर नई चर्चा छेड़ रहा है.

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