50% कारें बंद, 50,000 जॉब्स कट! दिग्गज कार कंपनी का बड़ा फैसला

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50% कारें बंद, 50,000 जॉब्स कट! दिग्गज कार कंपनी का बड़ा फैसला

15 जुलाई 2026 को 08:13 am बजे
50% कारें बंद, 50,000 जॉब्स कट! दिग्गज कार कंपनी का बड़ा फैसला

अब तक कार कंपनियों की स्ट्रेटजी रही है कि, हर सेगमेंट में अपनी मौजूदगी हो. कंपनी के पोर्टफोलियो में हर वो गाड़ी हो, जिसकी लोगों को चाहत हो. लेकिन फॉक्सवैगन ग्रुप ने खेल के नियम ही बदल दिए हैं. कंपनी ने तय किया है कि कम गाड़ियां बनाएगी, कम वेरिएंट रखेगी और उसी पर दांव लगाएगी, जिसकी सबसे ज्यादा मांग है.

दरअसल, Volkswagen ने आने वाले सालों की सबसे बड़ी रणनीति का ऐलान कर दिया है. कंपनी ने फैसला किया है कि साल 2030 तक अपने ग्लोबल मॉडल पोर्टफोलियो को करीब 50 फीसदी तक कम कर दिया जाएगा. यानी आने वाले समय में कंपनी की कई कारें बाजार से गायब हो सकती हैं. कंपनी का कहना है कि वह कारोबार को आसान, तेज और कम खर्च वाला बनाना चाहती है. इसके साथ ही अलग-अलग ब्रांड्स के बीच तकनीक को ज्यादा साझा किया जाएगा और प्रोडक्शन में भी कटौती की जाएगी.

Volkswagen का कहना है कि, अब हर सेगमेंट में कई अलग मॉडल रखने की बजाय उन्हीं गाड़ियों पर फोकस होगा, जिनकी बाजार में ज्यादा मांग है और जिनसे बेहतर कारोबार हो सकता है. हालांकि कंपनी ने अभी यह साफ नहीं किया है कि किन मॉडलों को बंद किया जाएगा. इस फैसले का असर फॉक्सवैगन, स्कोडा, सीएट, पॉर्शे, बेंटले और लेम्बोर्गिनी जैसे सभी ब्रांड्स पर पड़ सकता है.

बता दें कि, फॉक्सवगैन ग्रुप के पास 10 से ज्यादा कार ब्रांड का मालिकाना हक है. जिन्हें वो अलग-अलग देशों में बेचती है.

कंपनी सिर्फ मॉडल ही नहीं घटाएगी, बल्कि गाड़ियों के अलग-अलग वेरिएंट और फीचर ऑप्शन भी काफी कम करेगी. Volkswagen का टार्गेट अपनी प्रोडक्ट कॉम्प्लेक्सिटी को करीब 75 फीसदी तक घटाने का है. इसका मतलब है कि भविष्य में कम ट्रिम लेवल, कम फीचर कॉम्बिनेशन और लिमिटेड ऑप्शन देखने को मिल सकते हैं. इससे गाड़ियों की मैन्युफैक्चरिंग आसान होगी, लागत कम होगी और नए मॉडल जल्दी तैयार किए जा सकेंगे.

कंपनी आगे चलकर कम प्लेटफॉर्म और कम इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम का इस्तेमाल करेगी, जिससे अलग-अलग ब्रांड्स की गाड़ियों में एक जैसी तकनीक का उपयोग किया जा सके. इसका सीधा असर लागत को कम करने में मदद के तौर पर देखने को मिल सकता है.

फॉक्सवैगन व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग के लिहाज से दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी है. टोयोटा ने पिछले साल दुनिया भर में कुल 11,322,000 यूनिट वाहनों का प्रोडक्शन किया था. वहीं फॉक्सवैगन ने इस दौरान 8,983,000 यूनिट कारों की मैन्युफैक्चरिंग की थी. लेकिन ख़बर है कि, कंपनी अब प्रोडक्शन क्षमता को कम करना चाहती है. कोविड-19 महामारी से पहले कंपनी हर साल करीब 1.2 करोड़ वाहन बनाने की क्षमता रखती थी. पिछले कुछ वर्षों में यह क्षमता पहले ही कम हो चुकी है और अब यूरोप व चीन जैसे बड़े बाजारों में इसे और घटाने की तैयारी है.

जर्मनी की इस कार कंपनी का कहना है कि ऑटो इंडस्ट्री तेजी से बदल रही है. चीन की कंपनियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा, नए सरकारी नियम, रिसर्च और डेवलपमेंट पर बढ़ता खर्च और दुनिया भर में बदलती ग्राहकों की मांग ने कारोबार पर दबाव बढ़ाया है. इसके अलावा साल 2021 की तुलना में कंपनी के मुनाफे में भी बड़ी गिरावट आई है. इसी वजह से लागत घटाना अब Volkswagen की सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है. कंपनी के CEO ओलिवर ब्लूम का कहना है कि इस नई स्ट्रेटजी से कंपनी पहले से ज्यादा तेज, प्रतिस्पर्धी और भविष्य के लिए मजबूत बनेगी.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी की इस बड़ी रीस्ट्रक्चरिंग के दौरान कुछ फैक्ट्रियां बंद हो सकती हैं और कर्मचारियों की संख्या में भी कटौती की जा सकती है. हालांकि Volkswagen ने अभी इन योजनाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. लेकिन अगर रॉयटर्स की एक रिपोर्ट की माने तो कंपनी के CEO ओलिवर ब्लूम ने कर्मचारियों को भेजे एक इंटरनल मैसेज में कहा है कि, बढ़ते कम्पटीशन में टिके रहने के लिए कंपनी को करीब 50,000 अतिरिक्त नौकरियां कम करनी पड़ सकती हैं. अगर ऐसा होता है तो फॉक्सवैगन ग्रुप में कुल मिलाकर करीब 1 लाख कर्मचारियों की नौकरी प्रभावित हो सकती है.

फिलहाल इतना तय है कि अगले पांच वर्षों में कंपनी अपने ग्लोबल मॉडल लाइन-अप को आधा करने जा रही है. इसे फॉक्सवैगन ग्रुप के इतिहास में सबसे बड़े प्रोडक्ट बदलावों में से एक माना जा रहा है और इसका असर आने वाले समय में उसके सभी ब्रांड्स की नई गाड़ियों पर देखने को मिल सकता है.

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