शहरों में 'मौत के कुएं' बने खुले मैनहोल, 9 साल में 1200 से ज्यादा लोगों की जान गई, आंकड़े डरा रहे

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शहरों में 'मौत के कुएं' बने खुले मैनहोल, 9 साल में 1200 से ज्यादा लोगों की जान गई, आंकड़े डरा रहे

04 जुलाई 2026 को 06:19 am बजे
शहरों में 'मौत के कुएं' बने खुले मैनहोल, 9 साल में 1200 से ज्यादा लोगों की जान गई, आंकड़े डरा रहे
शहरों में 'मौत के कुएं' बने खुले मैनहोल, 9 साल में 1200 से ज्यादा लोगों की जान गई, आंकड़े डरा रहे
खुले मैनहोल का खौफनाक सच
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  • पिछले नौ साल में भारत में खुले मैनहोल या सीवर में गिरने से 1200 से अधिक लोगों की मौत
  • 2024 में मैनहोल में गिरने से होने वाली मौतों की संख्या वर्ष 2023 की तुलना में 61 प्रतिशत बढ़कर 192 हो गई है
  • मैनहोल में गिरने वाले मृतकों में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं की संख्या भी बढ़ रही है

मुंबई में भारी बारिश के बीच खुले मैनहोल में गिरने से 55 साल के शख्स की मौत हो गई. देश में नए-नए रोड हाईवे और एक्सप्रेसवे बन रहे हैं. सड़कों पर गाड़ियां चमचमाती गाड़ियां रफ्तार भरती दिखती हैं. लेकिन इसी चमचमाती सड़क के नीचे एक ऐसा अंधेरा कुआं है, जो हर साल चुपचाप कई लोगों की जिंदगियां निगल रहा है. हम बात कर रहे हैं सड़कों पर खुले मैनहोल यानी सीवर की. बारिश के मौसम में जलभराव के दौरान हर साल कई लोगों की जान मैनहोल में गिरने की वजह हो जाती है.

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि पिछले 9 सालों में देश के भीतर मैनहोल या सीवर में गिरने से 1200 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. सबसे डरावनी बात यह है कि साल 2023 के मुकाबले 2024 में इन मौतों के मामलों में अचानक एक बहुत बड़ा उछाल आया है.

सिर्फ एक साल में 61% बढ़ीं मौतें

आंकड़ें बताते हैं कि साल 2023 में जहां मैनहोल और सीवर में गिरने से कुल 119 लोगों का मौत हो गई थी. इसके अगले साल यानी 2024 में यह आंकड़ा 61 प्रतिशत से ज्यादा की छलांग लगाकर 192 पर पहुंच गया. खुले मैनहोल सिस्टम की लापरवाही की कहानी बयां करते हैं. 

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पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं भी शिकार

मैनहोल में गिरकर जान गंवाने वालों में पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं भी शामिल हैं. सड़क चलती कई महिलाओं को इन खुले मैनहोल ने अपना शिकार बनाया है. साल 2023 में मैनहोल में गिरने से जहां 11 महिलाओं की मौत हुई थी, वहीं अगले साल 2024 में ये संख्या बढ़कर 21 हो गई.

साल 2022 इन नौ सालों में सबसे भयानक रहा, जब रिकॉर्ड 207 लोगों की मौत खुले सीवर या मैनहोल में गिरने की वजह से हुई. इसमें 179 पुरुष और 28 महिलाएं शामिल थीं. वहीं 2023 में थोड़ी गिरावट के बाद 2024 में यह आंकड़ा 192 मौतों पर पहुंच गया.

लापरवाही का जिम्मेदार कौन?

बारिश के मौसम में जलभराव होने पर ये खुले मैनहोल सड़कों पर अदृश्य मौत बन जाते हैं. कभी कोई बच्चा, कभी काम से घर लौटता मजदूर, तो कभी कोई महिला इनमें समा जाती है. NCRB के ये आंकड़े प्रशासनिक तंत्र की नींद उड़ाने के लिए काफी हैं. सरकार और प्रशासन को इसके लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करनी चाहिए. खासतौर पर बारिश के मौसम से पहले स्थानीय प्रशासन को युद्ध स्तर पर मैनहोन और खुले सीवर को बंद करना चाहिए.

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