खड़े होकर पानी पीने से खराब हो जाती हैं हड्डियां? जानिए क्या कहता है साइंस
खड़े होकर पानी पीने से खराब हो जाती हैं हड्डियां? जानिए क्या कहता है साइंस

खड़े होकर पानी पीना नुकसानदायक है. यह बात हममें से ज्यादातर लोगों ने बचपन से सुनी है. कहा जाता है कि इससे घुटनों में दर्द, कमजोर हड्डियां और पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. लेकिन क्या इन दावों के पीछे कोई वैज्ञानिक आधार है? आइए जानते हैं कि आयुर्वेद इस बारे में क्या कहता है और मॉडर्न मेडिकल साइंस की राय इससे कितनी अलग है.
क्या खड़े होकर पानी पीना सच में नुकसान पहुंचाता है?
आयुर्वेद के अनुसार पानी हमेशा बैठकर और धीरे-धीरे पीना चाहिए. माना जाता है कि खड़े होकर पानी पीने पर वह शरीर में तेजी से पहुंचता है, जिससे शरीर उसे सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता.
आयुर्वेद क्यों देता है बैठकर पानी पीने की सलाह?
आयुर्वेदिक डॉ. राम अवतार कहते हैं कि मान्यताओं के मुताबिक लंबे समय तक ऐसा करने से पाचन पर असर पड़ सकता है. साथ ही जोड़ों, घुटनों और शरीर के संतुलन से जुड़ी परेशानियों का खतरा भी बढ़ सकता है.
मेडिकल साइंस के अनुसार पानी शरीर में पहुंचने के लिए भोजन नली (esophagus) की मांसपेशियों द्वारा संचालित प्रक्रिया Peristalsis का इस्तेमाल करता है. यही वजह है कि पानी का अवशोषण केवल बैठने या खड़े होने पर निर्भर नहीं माना जाता.

मॉडर्न मेडिकल साइंस की क्या राय है?
मॉडर्न मेडिकल साइंस इस विषय को अलग नजरिए से देखती है. इस बारे में एनडीटीवी ने बात की हड्डियों के नामी डॉक्टर ईश्वर बोहरा से. वे कहते हैं कि खड़े होकर पानी पीने को हड्डियों के कमजोर होने, जोड़ों में दर्द या किडनी की बीमारी की सीधी वजह नहीं माना जाता. हालांकि, कई हेल्थ एक्सपर्ट यह जरूर सलाह देते हैं कि बैठकर, आराम से और छोटे-छोटे घूंट में पानी पीना अच्छी आदत है. इससे लोग जल्दबाजी में बहुत ज्यादा पानी पीने से बचते हैं और पाचन भी ज्यादा आरामदायक महसूस हो सकता है.
सोशल मीडिया पर अक्सर दावा किया जाता है कि खड़े होकर पानी पीने से घुटनों में दर्द या हड्डियां कमजोर हो सकती हैं. हालांकि वर्तमान वैज्ञानिक शोध इन दावों का समर्थन नहीं करते. जोड़ों की सेहत का संबंध मुख्य रूप से उम्र, जीवनशैली, शारीरिक गतिविधि और पोषण से होता है.
हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि समस्या खड़े होकर पानी पीने में नहीं, बल्कि बहुत तेजी से पानी गटकने में हो सकती है। जल्दी-जल्दी पानी पीने से कुछ लोगों को पेट भरा हुआ महसूस होना, ब्लोटिंग या असहजता जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. इसलिए पानी हमेशा छोटे-छोटे घूंट में पीने की सलाह दी जाती है.
क्या पाचन और किडनी पर पड़ता है असर?
डॉ. राम अवतार बताते हैं कि आयुर्वेद और कई पारंपरिक मान्यताओं में कहा जाता है कि खड़े होकर पानी पीने से पाचन ठीक से नहीं हो पाता और किडनी पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. वहीं मॉडर्न मेडिकल साइंस इन दावों को उसी तरह स्वीकार नहीं करती. कुल मिलाकर इस मुद्दे पर आयुर्वेद और मॉडर्न मेडिकल साइंस की राय अलग-अलग है. आयुर्वेद बैठकर और आराम से पानी पीने की सलाह देता है, जबकि मॉडर्न मेडिकल साइंस खड़े या बैठकर पानी पीने में कोई खास अंतर नहीं मानती.
आखिर पानी पीने का सही तरीका क्या माना जाता है?
हालांकि दोनों ही इस बात पर जरूर सहमत हैं कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और उसे धीरे-धीरे पीना ज्यादा महत्वपूर्ण है. ऐसे में अगर आप बिना किसी जोखिम के सुरक्षित विकल्प चुनना चाहते हैं, तो बैठकर और धीरे-धीरे पानी पीना बेहतर आदत हो सकती है. इस तरीके पर न सिर्फ आयुर्वेद जोर देता है, बल्कि मॉडर्न हेल्थ एक्सपर्ट्स भी आराम से और छोटे-छोटे घूंट में पानी पीने की सलाह देते हैं.
(डॉ. राम अवतार अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर जाने-माने योग/आयुर्वेद ट्रेनर और प्रैक्टिशनर हैं)
(डॉ. ईश्वर बोहरा (Dr. Ishwar Bohra) एक प्रसिद्ध ऑर्थोपेडिक और ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन हैं. उन्हें घुटने और कूल्हे के रिप्लेसमेंट, आर्थ्रोस्कोपी और स्पोर्ट्स मेडिसिन में 24 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वे वर्तमान में नई दिल्ली के BLK-Max Super Specialty Hospital में वरिष्ठ निदेशक (Senior Director) के रूप में कार्यरत हैं.)
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