वयस्कों के लिए 'जहर' है दूध? पिएं या छोड़ दें, डॉक्टर्स ने बताया सच

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वयस्कों के लिए 'जहर' है दूध? पिएं या छोड़ दें, डॉक्टर्स ने बताया सच

04 जुलाई 2026 को 07:09 am बजे
वयस्कों के लिए 'जहर' है दूध? पिएं या छोड़ दें, डॉक्टर्स ने बताया सच

Milk for adults health debate: हमेशा से ही दूध का सेहत के लिए काफी फायदेमंद माना जाता रहा है. बच्चों को कम उम्र से ही माता-पिता दूध देना शुरू कर देते हैं क्योंकि उनका मानना होता है कि दूध ताकत देता है और उससे कैल्शियम मिलता है और हड्डियां मजबूत होती हैं. लेकिन एक पक्ष ये सवाल उठाता है कि क्या दूध केवल शिशुओं के लिए बना है और वयस्कों के लिए नहीं है? सोशल मीडिया से लेकर हेल्थ कम्युनिटी तक, यह सवाल एक बड़ी बहस का मुद्दा बना हुआ है. हाल ही में डेली मेल में पब्लिश्ड एक रिपोर्ट में एक डॉक्टर ने दावा किया कि दूध वयस्कों के लिए नहीं है और डेयरी इंडस्ट्री हमें भ्रम में रख रही है.

लेकिन क्या यह दावा पूरी तरह सही है? या फिर यह केवल एक मार्केटिंग नैरेटिव के खिलाफ एक तरफा प्रतिक्रिया है? इस बारे में हमने गट हेल्थ एक्सपर्ट, डायटीशियन और क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट्स से बात की और यह समझने की कोशिश की कि दूध का आपकी सेहत और गट माइक्रोबायोम पर क्या असर पड़ता है. साथ ही यह फायदेमंद है या नहीं?

इस बहस की शुरुआत डेली मेल की उस रिपोर्ट से हुई, जिसमें गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. ग्रीम फोंटेन ने एक बड़ा दावा किया. उनका कहना है, 'दूध का सेवन वयस्कों के लिए एक अन-नेचुरल आदत है. उनका तर्क है कि प्रकृति में कोई भी स्तनधारी जीव दूध पीना तब बंद कर देता है, जब वह दूध पीने की उम्र पार कर लेता है. इंसान एकमात्र ऐसी प्रजाति है जो वयस्क होने के बाद भी अन्य जानवरों का दूध पीना जारी रखती है.'

डॉ. फोंटेन के अनुसार, डेयरी उद्योग ने सालों से हमें यह विश्वास दिलाया है कि दूध कंपलीट डाइट है और हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी है लेकिन वास्तव में यह मार्केटिंग नैरेटिव से अधिक कुछ नहीं है.'

डॉ. फोंटेन का यह भी दावा है कि वयस्कों में होने वाली कई तरह की पेट संबंधी समस्याएं, ब्लोटिंग और डाइजेशन की परेशानियां सीधे तौर पर दूध के सेवन से जुड़ी हो सकती हैं. दूध में मौजूद लैक्टोज को पचाने के लिए जरूरी एंजाइम यानी लैक्टेज की क्षमता उम्र बढ़ने के साथ प्राकृतिक रूप से कम हो जाती है जो इस बात का संकेत है कि वयस्क होने पर शरीर को दूध की जरूरत नहीं है.'

'कई लोग जो दूध पीना बंद करते हैं वे अपनी गट हेल्थ और ओवरऑल एनर्जी लेवल्स में सुधार देखते हैं जो यह साबित करता है कि वयस्कों के शरीर के लिए दूध एक जरूरी पोषक तत्व नहीं बल्कि एक अनावश्यक बोझ है.'

मुंबई के अपोलो हॉस्पिटल में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी और हेपेटोलॉजी में कंसल्टेंट डॉ. रोहन येवले ने Aajtak.in को बताया, 'अक्सर लोग हमारे पास आते हैं दूध पीने के बाद ब्लोटिंग, पेट फूलने या पेट खराब होने की शिकायत करते हैं. ऐसे में हमें उनके लक्षणों को ध्यान में रखकर काफी सावधानी से निष्कर्ष निकालते हैं क्योंकि ब्लोटिंग के हर मामले को दूध की गलती मानना गलत है. दरअसल, दूध पीने के बाद पेट फूलने का कारण सबसे अधिक मामलों में 'लैक्टोज इनटॉलरेंस' होता है.'

'लैक्टोज इनटॉलरेंस कोई बीमारी नहीं है बल्कि एक बायोलॉजिकल बदलाव है. उम्र बढ़ने के साथ बहुत से लोगों की बॉडी में लैक्टेज एंजाइम का लेवल नेचुरल रूप से कम हो जाता है जिससे लैक्टोज (नेचुरल शुगर या कार्बोहाइड्रेट) को पचाना काफी मुश्किल हो जाता है. लेकिन यह इस बात को सही साबित नहीं करता कि इंसान दूध पीने के लिए नहीं बने हैं. यह हर इंसान के अलग-अलग डाइजेशन और आनुवंशिक बनावट का मामला है.'

'हर बार जब पेट में समस्या हो तो उसका जिम्मेदार दूध नहीं होता. इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS), छोटी आंत में बैक्टीरिया का अधिक विकास (SIBO) या फिर गट का अधिक संवेदनशील होना भी ऐसे ही लक्षण पैदा कर सकता है. इसलिए बिना किसी मेडिकल जांच के अपनी डाइट से दूध को पूरी तरह हटा लेना सही नहीं है क्योंकि इससे शरीर में जरूरी पोषण की कमी हो सकती है.'

'जब बात गट माइक्रोबायोम की आती है तो दूध इसमें एक घटक मात्र है. यदि शरीर दूध पचा पा रहा है तो यह गट हेल्थ को नुकसान नहीं पहुंचाता. माइक्रोबायोम एक बेहद गतिशील इकोसिस्टम है जो फाइबर के सेवन, नींद, तनाव, दवाइयों और जेनेटिक्स से प्रभावित होता है. वास्तव में फर्मेंटेड डेयरी उत्पाद जैसे दही, छाछ और केफिर प्रोबायोटिक्स का अच्छा सोर्स हैं जो गट हेल्थ में सुधार कर सकते हैं इसलिए किसी एक फूड को 'विलेन' मानना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है.'

क्या दूध सिर्फ बच्चों के लिए है? मार्केटिंग या हकीकत

'दूध सिर्फ बच्चों के लिए है', यह बहस पूरी तरह मार्केटिंग मिथक नहीं है लेकिन इसे सिर्फ मार्केटिंग के खिलाफ प्रतिक्रिया भी नहीं माना जा सकता. बायोलॉजिकल नजरिए से देखें तो इंसान एकमात्र ऐसी प्रजाति है जो वयस्क होने के बाद भी दूसरे जानवर का दूध पीती है. नेचर जर्नल में पब्लिश्ड 'लैक्टेस पर्सिस्टेंस' पर हुई रिसर्च बताती है कि दुनिया की करीब 65 प्रतिशत आबादी एडल्ट होने पर लैक्टोज को पचाने की क्षमता खो देती है.

मुंबई में कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल की क्लिनिकल डाइटीशियन सिफा चिश्ती (Sifa Chishti) ने Aajtak.in को बताया, 'दूध को दूध को अच्छी सेहत की पहचान या फिर दूध को हेल्दी लाइफस्टाइल का जरूरी हिस्सा बनाने में दशकों की मार्केटिंग का बड़ा हाथ रहा है. दूध एक हेल्दी ऑप्शन हो सकता है लेकिन इसे किसी भी वयस्क के लिए जरूरी मानना गलत है.'

'दूध में मौजूद न्यूट्रिएंट्स को नकारा नहीं जा सकता लेकिन इसे वयस्क इंसानों के लिए हर हाल में जरूरी मानना साइंटिफिकली डिबेटेबल है. यह कहना अधिक सही होगा कि दूध एक हेल्दी ऑप्शन हो सकता है लेकिन यह किसी के लिए भी अनिवार्य नहीं है. यदि कोई इसे अपनी डाइट से हटाना चाहता है तो हटा सकता है बस शर्त यह है कि वो पोषण अन्य चीजों से प्राप्त कर ले'

दूध छोड़ने पर कैल्शियम और प्रोटीन की कमी का क्या करें?

हार्वर्ड टी.एच. चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की रिसर्च के मुताबिक, कैल्शियम के लिए केवल दूध पीना ही एकमात्र जरिया नहीं है. कैल्शियम के लिए अपनी डाइट में ब्रोकली, मेथी के पत्ते, सहजन के पत्ते, चौलाई, केल और सरसों जैसी हरी पत्तेदार सब्जियों को शामिल करना सबसे बेस्ट तरीका है. इसके अलावा सोयाबीन, टोफू और दालें प्रोटीन के बेहतरीन और सुरक्षित विकल्प हैं.

डायटीशियन सिफा चिश्ती ने कहा, 'यदि आप अपनी डाइट से डेयरी को बाहर कर रहे हैं तो कैल्शियम और प्रोटीन की कमी को पूरा करने के लिए डाइट में कुछ बदलाव करना चाहिए. चिया सीड्स, तिल और बादाम कैल्शियम का पावरहाउस हैं. यदि आप नॉन-वेजिटेरियन हैं तो छोटी मछलियां जिनमें हड्डियां साथ में खाई जा सकें, वे कैल्शियम का बेहतरीन विकल्प हैं. प्रोटीन की बात करें तो दालें, बीन्स और खास तौर पर सोयाबीन और टोफू बेहतरीन प्लांट-बेस्ड ऑप्शंस हैं.'

बाजार में मिलने वाले कई फोर्टिफाइड फूड्स भी कैल्शियम की कमी को पूरा करने में काफी मददगार साबित होते हैं. बस खरीदते समय लेबल ध्यान से चेक करना जरूरी है कि उनमें पोषण की मात्रा कितनी है.

बेंगलुरु के स्पर्श हॉस्पिटल में डायटिक्स & न्यूट्रिशन के एचओडी डी.टी. गौसिया अजीज ने Aajtak.in को बताया, 'आजकल बादाम, ओट्स और सोया मिल्क का चलन बढ़ा है लेकिन ये सभी ऑपशंस में न्यूट्रिशन में एक जैसे नहीं होते. गाय के दूध में प्राकृतिक रूप से हाई क्वालिटी वाला प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन B12 मिलता है जो बादाम या ओट मिल्क में अक्सर कम होता है. हालांकि, सोया मिल्क न्यूट्रिशन के मामले में गाय के दूध के सबसे करीब है क्योंकि इसमें प्रोटीन की मात्रा बेहतर होती है.'

यूएसडीए डाइट्री गाइडलाइंस के अनुसार, यदि आप प्लांट-बेस्ड मिल्क चुनते हैं तो यह चेक करना जरूरी है कि वो फोर्टिफाइड है या नहीं, ताकि विटामिन D, B12 और कैल्शियम की कमी न हो. कुल मिलाकर सिर्फ किसी भी प्लांट-बेस्ड मिल्क को गाय के दूध का पूर्ण विकल्प मान लेना सही नहीं होगा.

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