इजरायल के हमले का डर? पिता के जनाजे में शामिल क्यों नहीं हो रहे मोजतबा

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इजरायल के हमले का डर? पिता के जनाजे में शामिल क्यों नहीं हो रहे मोजतबा

03 जुलाई 2026 को 09:23 am बजे
इजरायल के हमले का डर? पिता के जनाजे में शामिल क्यों नहीं हो रहे मोजतबा

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के जनाजे से पहले पूरे देश में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. इसी बीच सबसे बड़ी खबर यह है कि उनके बेटे और मौजूदा सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई जनाजे में शामिल नहीं होंगे. इसकी वजह इजरायल की तरफ से संभावित हमले का खतरा बताया जा रहा है.

भारत में ईरान के प्रतिनिधि अयातुल्लाह हकीम इलाही के मुताबिक, इजरायल की निगरानी और हमले की आशंका को देखते हुए मोजतबा का सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होना सुरक्षित नहीं माना गया है. यही वजह है कि उन्होंने जनाजे में शामिल नहीं होने का फैसला किया है.

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अली खामेनेई की मौत 28 फरवरी को उस समय हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर सैन्य अभियान शुरू किया था. इसके बाद पश्चिम एशिया में बड़ा युद्ध छिड़ गया था.

कब से कब तक चलेगा अली खामेनेई के जनाजे का कार्यक्रम?

4 जुलाई को तेहरान से शुरू होने वाले कार्यक्रम 9 जुलाई को उनके गृह नगर मशहद में दफन के साथ पूरे होंगे. इस दौरान क़ोम समेत कई शहरों में धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे. ईरानी सरकार को उम्मीद है कि लाखों लोग अंतिम विदाई में शामिल होंगे. हालांकि, सुरक्षा कारणों से अली खामेनेई के बेटे और सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई इसमें शामिल नहीं हो सकेंगे.

अली खामेनेई करीब 36 वर्षों तक ईरान के सर्वोच्च नेता रहे. ईरान सरकार ने उनके जनाजे के लिए छह दिन का कार्यक्रम तय किया है.  ईरानी अधिकारियों को उम्मीद है कि इस दौरान लाखों लोग सड़कों पर उतरेंगे. राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में अली खामेनेई की तस्वीरों वाले बड़े-बड़े पोस्टर और होर्डिंग लगाए गए हैं. पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था भी बेहद कड़ी कर दी गई है.

इस बीच अमेरिका और इजरायल के बीच ईरान को लेकर मतभेद की एक बड़ी कहानी भी सामने आई है. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका को डर था कि युद्धविराम वार्ता के दौरान इजरायल ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ को निशाना बना सकता है. अगर ऐसा होता, तो अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता पूरी तरह टूट सकती थी.

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रिपोर्ट के मुताबिक, इसी आशंका के चलते अमेरिका ने खाड़ी के कुछ देशों के जरिए तेहरान को संभावित खतरे की जानकारी भी पहुंचाई थी. बताया गया कि इजरायल ने शुरुआत से ही ईरान के शीर्ष नेताओं को निशाना बनाने की रणनीति अपनाई थी, लेकिन अमेरिका चाहता था कि बातचीत जारी रहे और युद्ध दोबारा न भड़के.

उधर, भारत ने भी अली खामेनेई के जनाजे में अपना प्रतिनिधिमंडल भेजा है. वे आज ही भारत से रवाना हुए हैं. सूत्रों के मुताबिक, विदेश राज्य मंत्री पवित्रा मार्गेरिटा, बिहार के राज्यपाल जनरल सैयद हसनैन और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद अंतिम संस्कार में शामिल हो सकते हैं. हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की संभावना नहीं है.

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