'भारत अब पहले से ज्यादा पसंद ', विदेश से लौटी महिला ने बताया अनुभव
'भारत अब पहले से ज्यादा पसंद ', विदेश से लौटी महिला ने बताया अनुभव

विदेश में नौकरी करना और नई जिंदगी शुरू करना लाखों लोगों का सपना होता है. बेहतर सैलरी, अच्छी लाइफस्टाइल और नए अवसरों की तलाश में हर साल बड़ी संख्या में भारतीय दूसरे देशों का रुख करते हैं. लेकिन विदेश में रहने के बाद जिंदगी को लेकर हर किसी की सोच एक जैसी नहीं रहती. Google की पूर्व कर्मचारी अनु शर्मा ने भी विदेश में छह महीने बिताने के बाद कुछ ऐसे अनुभव साझा किए हैं, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गए हैं.
Google, X और Intuit जैसी कंपनियों में काम कर चुकी अनु शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा-मैं पिछले छह महीने से विदेश में रह रही हूं. इस दौरान मुझे छह ऐसी बातें समझ आईं, जिनकी मैंने कभी उम्मीद नहीं की थी."
अनु शर्मा ने कहा कि विदेश में रहने के बाद उन्हें भारत को लेकर नया नजरिया मिला. उनके मुताबिक, विदेश जाने के बाद ही उन्हें एहसास हुआ कि भारत में अवसरों की कोई कमी नहीं है.
उन्होंने लिखा कि विडंबना यह है कि विदेश आने के बाद मैं भारत को लेकर पहले से ज्यादा आशावादी हो गई हूं. अब मुझे समझ आया कि भारत में कितने अवसर मौजूद हैं.
I've been living abroad for the past 6 months. Here are 6 lessons I didn't expect: 1. Your quality of life upgrades and downgrades at the same time. 2. You realise just how many opportunities exist back home. Ironically, moving abroad made me more optimistic about India. 3.…
अनु ने माना कि विदेश में रहने का सबसे कठिन हिस्सा अपनों से दूर रहना होता है. उन्होंने लिखा कि होमसिकनेस (घर की याद) एक ऐसी भावना है, जिसका असर लोगों पर उनकी उम्मीद से कहीं ज्यादा होता है.उनके मुताबिक, चाहे विदेश में सुविधाएं कितनी भी अच्छी क्यों न हों, परिवार और करीबी लोगों की कमी हमेशा महसूस होती है.
अनु शर्मा ने अपनी पोस्ट में लिखा कि विदेश में रहने के बाद उन्हें सबसे बड़ी सीख यह मिली कि घर किसी शहर या देश का नहीं, बल्कि अपने लोगों का नाम है. उन्होंने लिखा कि आप दुनिया के सबसे खूबसूरत शहर में रह सकते हैं, लेकिन अगर आपके अपने लोग आपके साथ नहीं हैं, तो हमेशा कुछ कमी महसूस होगी."
अनु ने बताया कि विदेश में रहने के दौरान उनके सहकर्मी ही उनका परिवार बन गए. इस अनुभव ने उन्हें पहले से कहीं ज्यादा आत्मनिर्भर बना दिया. उन्होंने लिखा, "मुझे लगता है कि छह महीने में मैं छह साल जितनी परिपक्व हो गई हूं."
अनु के मुताबिक, विदेश में रहने से उनकी जिंदगी के कुछ पहलू पहले से बेहतर हुए, लेकिन कुछ चीजें पहले से ज्यादा कठिन भी हो गईं. यही वजह है कि विदेश में रहना सिर्फ अच्छी सैलरी या खूबसूरत शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ भावनात्मक चुनौतियां भी जुड़ी होती हैं.
अनु शर्मा की पोस्ट पर बड़ी संख्या में लोगों ने प्रतिक्रिया दी. कई यूजर्स ने लिखा कि उन्होंने भी विदेश में रहने के दौरान बिल्कुल ऐसा ही महसूस किया. कुछ लोगों ने कहा कि अपनों से दूर रहना आसान नहीं होता, जबकि कई यूजर्स ने माना कि विदेश में रहने से व्यक्ति अधिक आत्मनिर्भर बन जाता है.
फिलहाल, अनु शर्मा की यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है. उनकी छह सीखों ने विदेश में बसने का सपना देखने वाले लोगों के बीच नई चर्चा छेड़ दी है.
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