'हमें छूते भी नहीं हैं मुस्लिम...' पाकिस्तानी हिंदुओं ने बताया कैसा है माहौल?

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'हमें छूते भी नहीं हैं मुस्लिम...' पाकिस्तानी हिंदुओं ने बताया कैसा है माहौल?

07 जुलाई 2026 को 10:10 am बजे
'हमें छूते भी नहीं हैं मुस्लिम...' पाकिस्तानी हिंदुओं ने बताया कैसा है माहौल?

'मेरे साले की तीन महीने की बेटी का वीजा नहीं लगा. मां-बाप भारत आ गए, लेकिन बेटी पाकिस्तान में रह गई. कई साल बीत गए, आज भी वो अपनी बेटी से नहीं मिल पाए हैं.'

ये सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है. पाकिस्तान से भारत आए कई हिंदू परिवारों  की ऐसी ही कहानी है. कोई अपने बेटे को पीछे छोड़कर आया, कोई पत्नी को, कोई मां को और कोई अपनी बच्ची को. उनका कहना है कि अपनों से बिछड़ने का दर्द जरूर है, लेकिन पाकिस्तान में हिंदू पहचान के साथ रहने का दर्द उससे भी बड़ा है.

वहां से आए हिंदुओं से जब बात की तो धर्मांतरण का डर, पहचान छिपाकर जीने की मजबूरी, बेटियों की सुरक्षा की चिंता, लूटपाट, सामाजिक भेदभाव और परिवारों के टूटने की ऐसी कहानियां सामने आईं, जिन्हें सुनकर समझ आता है कि आखिर क्यों कई लोग अपना सबकुछ छोड़कर भी भारत आने का फैसला करते हैं.

आजतक डॉट इन की सीरीज ‘सरहद पार के हिंदू’ के दूसरे पार्ट में बताएंगे कि कैसे पाकिस्तान में रह रहे हिंदू का ही लक्ष्य बन गया है कि उन्हें वहां से भागना है.

पाकिस्तान से आए हिंदू वहां के माहौल के बारे में बताते हैं कि पाकिस्तान में आज भी बड़ी संख्या में हिंदू भारत आने का सपना लेकर जी रहे हैं.

'हर किसी का एक ही टारगेट है कि कैसे भी भारत चले जाएं. सुबह उठते हैं तो पासपोर्ट बनवाने निकल जाते हैं. जिनका पासपोर्ट बन गया, वो वीजा के लिए एजेंटों के चक्कर काट रहे हैं. सुबह-सुबह पासपोर्ट बनाने के लिए लाइन लग जाती है, जिनका बन गया वो एजेंट के यहां लाइन लगाता है. हर कोई बस वहां से भागना चाहता है.' — सोभराज भील

उनका कहना है कि लोग अपना घर, जमीन, दुकान, बाइक और वर्षों की कमाई तक छोड़ने को तैयार हैं. बस एक मौका मिल जाए कि भारत पहुंच सकें.

पाकिस्तान से आए हिंदुओं की कहानियों में सबसे ज्यादा दर्द परिवारों के बिछड़ने का है. पाकिस्तान से भारत आने वाले हिंदुओं के जीवन का एक लक्ष्य है और वो है भारत का वीजा. हालात ये हैं कि कई बार पूरे परिवार का वीजा नहीं लग पाता. ऐसे में जिन लोगों का वीजा मंजूर हो जाता है, वे बाकी परिवार को पीछे छोड़कर भारत आ जाते हैं. उनका मानना है कि परिवार में जो भी इस नरक से निकल जाए वो ही अच्छा.

इसके पीछे की एक और वजह ये होती है कि वहां हर हिंदू इसलिए पैसे जोड़ रहा है ताकि वो कैसे भी एंजेंट को पैसे  देकर भारत आ जाए. ऐसे में उसकी जीवन भर की कमाई वीजा प्रोसेस में लग जाती है तो उसे परिवार को छोड़कर भी यहां आना पड़ता है. क्योंकि एक बार मौका गंवा दिया तो फिर से उतना पैसा खर्च करना पड़ेगा, जो उनके पास नहीं है.

एक हिंदू बताते हैं- ‘जब मैं भारत आया था तो मेरे बेटे का वीजा नहीं लगा. उसे पाकिस्तान में छोड़ना पड़ा. पूरे दस साल बाद वो मेरे पास आ पाया.'

यह भी पढ़ें: Exclusive: 'पहचान छुपाने के लिए मुस्लिम नाम रखते हैं...' पाकिस्तान में किस हाल में रह रहे हिंदू?

करीब 28 साल पाकिस्तान में रहने वाले जान बहादुर सिंह कहते हैं कि भारत आने के बाद पहली बार उन्हें लगा कि वे आजाद हुए हैं. वहां से आए एक हिंदू ने बताया कि हालात इतने बुरे हैं कि अगर वो किसी हिंदू के टच हो जाएंगे तो वो नापाक हो जाएंगे और नमाज नहीं बढ़ पाएंगे. इस तरह की चीजें वहां के मौलवी लोग सिखाते हैं.

'हम वहां घुटन की जिंदगी जी रहे थे. यहां आकर पहली बार लगा कि आजाद हुए हैं. वहां हर हिंदू घुट-घुटकर जी रहा है. एक-एक दिन काटना मुश्किल है.' — जान बहादुर सिंह

पाकिस्तान से एक वक्त भारत आए हिंदू सिंह सोढ़ा पाकिस्तान से आने वाले हिंदुओं के हितों के लिए काम कर रहे हैं, वो बताते हैं कि हिंदू लड़कियों को उठाकर ले जाने, जबरन धर्म परिवर्तन करवाने और उत्पीड़न की घटनाओं का डर लोगों के मन में हमेशा रहता है. एक-एक दिन काटना मुश्किल है.

‘वहां हिंदू बेटियां बिल्कुल सुरक्षित नहीं है. उनका रेप कर दिया जाता है, जबरदस्ती उठाकर ले जाते हैं, मुस्लिम लड़कों  से शादी कर दी जाती है. इतना ही नहीं, वहां एक साथ कई लड़कियों  को उठा लिया जाता है और अपनी बेटियों की रक्षा के लिए घुटन की जिंदगी से बचने के लिए वहां का हिंदू मुस्लिम बनने को मजबूर हो जाता है.’ -हिंदू सिंह सोढ़ा

वहीं, सोभराज भील बताते हैं धर्म परिवर्तन हमेशा एक ही तरीके से नहीं होता.वो बताते हैं कि वहीं फैक्टरी में काम करने वाले लोगों को समझाया जाता है कि इस्लाम अपनाओ, जन्नत मिलेगी. कई बार डराया भी जाता है. गरीब लोगों को ज्यादा निशाना बनाया जाता है.

हिंदू सिंह सोढ़ा का कहना है कि कुछ लोग लगातार दबाव झेलते-झेलते टूट भी जाते हैं. कई लोगों को लगता है कि रोज-रोज की परेशानी झेलने से अच्छा धर्म परिवर्तन कर लिया जाए. वहां ऐसी मजबूरियां हैं, जिनकी कल्पना करना भी मुश्किल है.

पाकिस्तान में कई दशक बिताने वाले लोगों का कहना है कि कई बार सिर्फ नाम ही परेशानी का कारण बन जाता है. जान बहादुर सिंह बताते हैं कि कई हिंदू परिवार अपने बच्चों के नाम मुस्लिम समाज से मिलते-जुलते रखते हैं.

'अगर नाम के पीछे 'राम' लगा है तो कई जगह दिक्कत बढ़ जाती है. इसलिए लोग ऐसे नाम रखने लगे हैं, जिससे पहली नजर में पहचान न हो.' — जान बहादुर सिंह

दिलीप सिंह सोढ़ा पाकिस्तान में रोजमर्रा के भेदभाव का एक उदाहरण सुनाते हैं. उनके मुताबिक हाल ही में एक मुस्लिम होटल संचालक ने एक हिंदू दूध वाले से दूध खरीद लिया. बाद में इस बात पर विवाद खड़ा हो गया.

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