Save Yamuna: 225 साल में दिल्ली में 68% सिकुड़ी यमुना, पानी का बहाव 89 फीसदी घटा; नदी का बाढ़ क्षेत्र भी सीमित

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Save Yamuna: 225 साल में दिल्ली में 68% सिकुड़ी यमुना, पानी का बहाव 89 फीसदी घटा; नदी का बाढ़ क्षेत्र भी सीमित

17 जुलाई 2026 को 06:29 am बजे
Save Yamuna: 225 साल में दिल्ली में 68% सिकुड़ी यमुना, पानी का बहाव 89 फीसदी घटा; नदी का बाढ़ क्षेत्र भी सीमित

Save Yamuna: 225 साल में दिल्ली में 68% सिकुड़ी यमुना, पानी का बहाव 89 फीसदी घटा; नदी का बाढ़ क्षेत्र भी सीमित

अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 17 Jul 2026 06:29 AM IST
सार

डीयू के भूविज्ञान विभाग और भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, भोपाल के शोधकर्ताओं के अध्ययन में यह बात सामने आई है।

दिल्ली में 2023 में आई बाढ़ के दौरान यमुना - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यमुना नदी बीते 225 वर्षों में करीब 68 प्रतिशत तक सिकुड़ चुकी है। साल 1799 में यमुना की औसत चौड़ाई करीब 658 मीटर थी, जो 2024 में घटकर 210 मीटर ही रह गई। डीयू के भूविज्ञान विभाग और भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, भोपाल के शोधकर्ताओं के अध्ययन में यह बात सामने आई है।अध्ययन के अनुसार, नदी में बहने वाले पानी की मात्रा (डिस्चार्ज) में भी करीब 89 प्रतिशत की गिरावट आई है। अध्ययनकर्ताओं के अनुसार, इसके लिए उन्होंने 1799 के एक पुराने नक्शे, अन्य ऐतिहासिक नक्शों और आधुनिक सैटेलाइट तस्वीरों का अध्ययन किया है। 



नदी की चौड़ाई घटने के आधार पर शोधकर्ताओं का अनुमान है कि नदी में पानी का बहाव 30 हजार क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड से घटकर 3,900 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड रह गया है। शोधकर्ता प्रो. विमल सिंह ने बताया कि इसके पीछे सबसे बड़ा कारण बढ़ता शहरीकरण, बैराज, नहरें, तटबंध और इंसानी दखल है। उन्होंने बताया कि 1799 का नक्शा उस समय का है, जब यमुना पर कोई बड़ा बैराज नहीं बना था। इसलिए यह नदी की प्राकृतिक स्थिति को समझने का अहम आधार बनता है। 


बैराज बनने के बाद बहाव में आया बड़ा बदलाव 
प्रो. विमल सिंह के अनुसार, बाद के वर्षों में ताजेवाला, ओखला, वजीराबाद और आईटीओ बैराज बनने के बाद नदी के बहाव में बड़ा बदलाव आया। इन परियोजनाओं के जरिए बड़ी मात्रा में पानी दूसरी ओर मोड़ दिया गया, जिससे दिल्ली में यमुना का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित हुआ। अध्ययन में यह भी बताया गया है कि पिछले सौ साल से अधिक समय में यमुना के करीब 45 वर्ग किलोमीटर बाढ़ क्षेत्र (फ्लडप्लेन) को तटबंधों के कारण मुख्य नदी से अलग कर दिया गया। बाद में इन इलाकों का इस्तेमाल खेती और शहरी विकास के लिए होने लगा। इससे नदी की बाढ़ का पानी अपने आप फैलाने और संभालने की क्षमता कम हो गई।


नदी पहले की तुलना में काफी संकरी हुई
शोध में यह भी पाया गया कि नदी के बीच बनने वाले प्राकृतिक रेतीले टापुओं का क्षेत्रफल 1985 में करीब 20 वर्ग किलोमीटर था, जो 2020 तक घटकर सिर्फ चार वर्ग किलोमीटर रह गया। इनमें से कई स्थानों को खेती या दूसरे उपयोगों में बदल दिया गया। शोधकर्ताओं ने जुलाई 2023 में आई दिल्ली की बाढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि 1978 की तुलना में 2023 में यमुना में कम पानी छोड़ा गया था, फिर भी जलस्तर ज्यादा बढ़ गया। इसका कारण यह है कि अब नदी पहले की तुलना में काफी संकरी हो चुकी है और उसके बाढ़ क्षेत्र भी सीमित हो गए हैं।