तमिलनाडु में SIR पर ‘सुप्रीम’ फैसला, चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई बंद

राजनीति

तमिलनाडु में SIR पर ‘सुप्रीम’ फैसला, चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई बंद

17 जुलाई 2026 को 04:31 am बजे
तमिलनाडु में SIR पर ‘सुप्रीम’ फैसला, चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई बंद
तमिलनाडु में SIR पर ‘सुप्रीम’ फैसला, चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई बंद

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 13 याचिकाओं पर कार्यवाही बंद कर दी, जिनमें डीएमके की वह याचिका भी शामिल है, जिसमें तमिलनाडु में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कराने के चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती दी गई थी. प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने डीएमके के संगठन सचिव आरएस भारती की ओर से पेश वकील विवेक सिंह की दलीलें सुनीं.

वकील ने कहा कि बिहार में एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर कोर्ट के फैसले को देखते हुए इन याचिकाओं पर सुनवाई या फैसले की जरूरत नहीं है. इसके बाद पीठ ने मुद्दे से जुड़ी सभी 13 याचिकाओं का निपटारा कर दिया.

SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला

सीजेआई के नेतृत्व वाली एक पीठ ने 27 मई को बिहार में एसआईआर को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाया था और इस प्रक्रिया को कराने का चुनाव आयोग का अधिकार बरकरार रखा था. पिछले साल तीन नवंबर को डीएमके ने एसआईआर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और इसे असंवैधानिक, मनमाना तथा लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए खतरा बताया था.

याचिका पर सुनवाई करने से इनकार

वहीं सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट को 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से संबंधित 54 चुनाव याचिकाओं का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने का निर्देश देने के अनुरोध वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया.अभिनेता से नेता बने जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) ने इस साल 23 अप्रैल को हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी.

गलत नजीर स्थापित होगी: सीजेआई

भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता के. वेंकटचलपति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डी. एस. नायडू ने दलील दी कि मद्रास हाईकोर्ट को चुनाव याचिकाओं के समयबद्ध निस्तारण के लिए एक विशेष पीठ गठित करने का निर्देश दिया जाए.इस पर सीजेआई ने कहा, इससे एक गलत नजीर स्थापित होगी. इसके साथ ही पीठ ने याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया.

मद्रास हाईकोर्ट का रुख करने की छूट

बहरहाल, पीठ ने याचिकाकर्ता को आवश्यक राहत के लिए मद्रास हाईकोर्ट का रुख करने की छूट प्रदान की. अधिवक्ता समीर मलिक के माध्यम से दायर याचिका में अनुरोध किया गया था कि मद्रास हाईकोर्ट में लंबित तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से संबंधित 54 चुनाव याचिकाओं का छह महीने की समय-सीमा के भीतर निस्तारण करने का निर्देश दिया जाए.

चुनाव परिणामों की वैधता को चुनौती

याचिका में कहा गया था कि यह अवधि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (आरपीए) की धारा 86(7) में निर्धारित है या फिर न्यायालय जिस अवधि को उचित समझे, उसके भीतर इन याचिकाओं का निपटारा कराया जाए.याचिका में कहा गया कि तीन जून से 18 जून के बीच दायर इन चुनाव याचिकाओं में चार मई को घोषित तमिलनाडु विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के चुनाव परिणामों की वैधता को चुनौती दी गई है. याचिका के अनुसार, इन विवादों के लंबे समय तक लंबित रहने से जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के पीछे की विधायी मंशा विफल हो जाती है.

शेयर करें
हिंदी खबर नेटवर्क पर पढ़ें ताज़ा हिंदी समाचार।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Hyderabad News: 58 हजार करोड़ से बदलेगी मूसी नदी की सूरत, लंदन की टेम्स की तर्ज पर बनेगा रिवरफ्रंट

बॉक्स ऑफिस कलेक्शन: पहले दिन 100 करोड़ पार 'टॉक्सिक', शाहरुख और रणवीर सिंह की इन फिल्मों का तोड़ डाला रिकॉर्ड

Toxic Box Office Collection Day 1: यश की टॉक्सिक ने पहले दिन कमाए 140 करोड़, जवान और एनिमल को छोड़ा पीछे