Flex Fuel से घटेगा माइलेज! क्यों कम हो रही छोटी कारें? क्या बोले टाटा के MD

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Flex Fuel से घटेगा माइलेज! क्यों कम हो रही छोटी कारें? क्या बोले टाटा के MD

31 मई 2026 को 02:08 pm बजे
Flex Fuel से घटेगा माइलेज! क्यों कम हो रही छोटी कारें? क्या बोले टाटा के MD

भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का टार्गेट लगातार बढ़ाया जा रहा है. सरकार इसे इंपोर्टेड तेल पर निर्भरता कम करने और किसानों की आय बढ़ाने का बड़ा हथियार मानती है. लेकिन इस पूरी कहानी का एक दूसरा पहलू भी है, जिस पर अब देश की बड़ी ऑटो कंपनियां खुलकर बात कर रही हैं. टाटा मोटर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) और सीईओ का कहना है कि ज्यादा इथेनॉल ब्लेंडिंग और फ्लेक्स फ्यूल तकनीक का असर सीधे गाड़ियों के माइलेज पर पड़ सकता है. वहीं दूसरी तरफ भारतीय बाजार में छोटी और सस्ती कारों की मांग भी लगातार घट रही है. आखिर ऐसा क्यों हो रहा है?

आम लोगों की इनकम, कार बाइंग बिहैवियर और नए फ्यूल ऑप्शन किस तरह से मिलकर ऑटो सेक्टर की तस्वीर बदल रहे हैं? आइए समझते हैं कि टाटा मोटर्स के एमडी ने इस पूरे मुद्दे पर क्या कहा और इसका आम कार खरीदार पर क्या असर पड़ सकता है.

टाटा मोटर्स ने बीते दिनों बाजार में अपनी सबसे किफायती कार Tata Tiago के नेक्स्ट जेनरेशन मॉडल को लॉन्च किया. इस कार के पेट्रोल, सीएनजी और इलेक्ट्रिक तीनों वर्जन को एक साथ बड़ा अपडेट दिया गया है. पेट्रोल वर्जन की शुरुआती कीमत 4.69 लाख रुपये, सीएनजी की कीमत 5.79 लाख रुपये और इलेक्ट्रिक वर्जन 6.99 लाख रुपये में पेश किया.

इस मौके पर कंपनी के एमडी और सीईओ शैलेष चंद्रा ने आजतक से खास बातचीत की. "उन्होंने पेट्रोल में बढ़ रहे इथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर कहा कि, मौजूदा कारें E20 फ्यूल के मुताबिक डिज़ाइन हैं इसलिए नई कारों में कोई समस्या नहीं आनी चाहिए. लेकिन अगर हायर इथेनॉल ब्लेंडिंग की जाती है तो पुरानी कारों में कुछ पार्ट फेल कर सकते हैं, हालांकि E20 तक कोई इशू नहीं है."

फ्यूल एफिशिएंसी यानी माइलेज पर शैलेष ने कहा कि, "चूंकि इथेनॉल की कैलोरिफिक (Calorific Value) कम है इसलिए थोड़ी फ्यूल एफिशिएंसी ड्रॉप होती है. लेकिन ARAI की स्ट्डी में सामने आया था कि, ये मामूली गिरावट है. लेकिन हायर इथेनॉल ब्लेंड्स में जाएंगे, जैसे मान लीजिए फ्लेक्स फ्यूल (Flex Fuel) है, तो इसमें कोई शक नहीं है कि, ड्रॉप तो काफी ज्यादा होगा. लेकिन मुझे लगता है कि, सरकार फ़्यूल प्राइसेस पर गौर जरूर करेगी ताकि ग्राहकों के बीच उसकी वैल्यू प्रोपोजिशन स्ट्रांग रहे."

चंद्रा ने कहा कि, देश में सरकार, ओएमसी और ओईएम (वाहन निर्माता) को एक साथ मिलकर इथेनॉल ब्लेंडिंग पर फैसला करना चाहिए कि, आखिर किस तारीख से हम यह बदलाव करने जा रहे हैं. तो कारें उस तरह से बनाई जाएंगी. कोई फेल्योर की बात नहीं होगी. लेकिन पुरानी कारों पर इस ब्लेंडिंग का असर जरूर पड़ेगा."

उन्होंने कि, हायर इथेनॉल ब्लेंडिंग पर हमारी (OEM), सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) और सरकार के बीच बातचीत चल रही है. इस पर जो निष्कर्ष निकलेगा या जो रोडमैप तैयार होगा उसके अनुसार हम काम करेंगी. चंद्रा ने कहा कि, हम पूरी तरह से तैयार हैं और अगले साल अपनी पहली फ्लेक्स फ्यूल कार भी ला रहे हैं जो मौजूदा मॉडल पर बेस्ड होगी.

छोटी कारों के घटते बाजार पर शैलेष चंद्रा ने कहा कि, "मैं समझता हूं कि इस सेगमेंट में लंबे समय से अपडेट नहीं मिल रही थी. इसके अलावा लोगों की पर्सनल डिस्पोजेबल इंकम (आय) तेजी से बढ़ रही है. जबकि कारों का इन्फ्लेशन रेट (कीमतों में बढ़ोतरी) धीमी गति से आगे बढ़ रही है." चंद्रा ने डाटा शेयर करते हुए कहा कि, "पिछले 10 सालों में कारों में तमाम नए फीचर्स को जोड़े जाने के बावजूद उनकी कीमत तकरीबन 3% की दर से बढ़ रही है, लेकिन देश में लोगों की आय तकरीबन 9 फीसदी की दर से बढ़ रही है. इसलिए ज्यादातर लोग महंगी, फीचर रिच और स्पेसियश कारें खरीद रहे हैं."

वीडियो में छोटी कारों पर बातचीत सुनने के लिए 2.22 मिनट पर क्लिक करें और फ्लेक्स-फ्यूल या इथेनॉल के लिए 4.29 मिनट पर क्लिक करें.

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