कट्टर समर्थक से आलोचक तक... वो 'गलती' जिसने बिगाड़े ट्रंप-मेलोनी के रिश्ते

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कट्टर समर्थक से आलोचक तक... वो 'गलती' जिसने बिगाड़े ट्रंप-मेलोनी के रिश्ते

20 जून 2026 को 06:54 am बजे
कट्टर समर्थक से आलोचक तक... वो 'गलती' जिसने बिगाड़े ट्रंप-मेलोनी के रिश्ते

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के रिश्तों में जबदस्त खटास आ गई है. इसकी वजह ट्रंप का वो बयान है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि G-7 में मेलोनी उनके साथ फोटो खिंचवाने की मिन्नतें कर रही थीं. इसके बाद मेलोनी ने पलटवार करते हुए कहा कि मैं और इटली कभी गिड़गिड़ाते नहीं. बात इतनी बढ़ गई कि इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो तायानी ने अपना अमेरिका दौरा रद्द कर दिया है.

लेकिन हालात हमेशा से ऐसे नहीं थे. ये वही मेलोनी हैं, जो 2025 में ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने वालीं एकमात्र यूरोपीय नेता थीं. लेकिन अब जानकारों का मानना है कि डेढ़ साल बाद मेलोनी के ट्रंप के साथ रिश्ते बुरी तरह बिगड़ चुके हैं.

वैसे तो ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध की शुरुआत के साथ ही दोनों दक्षिणपंथी नेताओं के बीच तनाव बढ़ गया था. इस युद्ध से यूरोप की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचा और इटली में युद्ध-विरोधी भावनाएं फिर से जोर पकड़ने लगीं.

फ्रांस में इस हफ्ते हुए G7 समिट के वीडियो से ऐसा लगा कि शायद दोनों ने अपने मतभेद सुलझा लिए हैं. लेकिन शुक्रवार को यह उम्मीद तब टूट गई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने इटली के एक टीवी चैनल को बताया कि मेलोनी ने उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए उनसे 'मिन्नत' की थी.

मेलोनी ने पलटवार करते हुए कहा कि ट्रंप ने यह कहानी मनगढ़ंत तरीके से बनाई है. उन्होंने आगे यह भी आरोप लगाया कि ट्रंप पुराने दोस्तों की तुलना में पश्चिमी देशों के दुश्मनों को ज्यादा सम्मान देते हैं. उन्होंने कहा, 'उन्हें एक बात याद रखनी चाहिए- न तो मैं और न ही इटली कभी किसी के आगे गिड़गिड़ाते हैं.'

सोशल मीडिया पर मेलोनी के कड़े जवाब का राजनीतिक जगत की ज्यादातर पार्टियों ने स्वागत किया है. उन्होंने ट्रंप की टिप्पणियों को इटली का अपमान माना है.

हालांकि, जानकारों का कहना है कि देश अब मेलोनी से उम्मीद करेगा कि वे अमेरिका के साथ ज्यादा एक जैसा रवैया अपनाएं और उस अस्थिर स्वभाव वाले राष्ट्रपति के साथ मेल-मिलाप की अपनी पिछली कोशिशें छोड़ दें, जिन्होंने पारंपरिक कूटनीतिक शिष्टाचार को ही बदल दिया है.

बोलोन्या यूनिवर्सिटी के पॉलिटिकल एनालिस्ट पिएरो इग्नाजी ने रॉयटर्स से कहा कि मेलोनी ट्रंप की अप्रिय टिप्पणियों के आधार पर अपना रवैया बदलती नहीं रह सकतीं. उन्हें तय करना होगा कि वे अपना रुख नरम रखें या फिर कनाडा जैसे दूसरे देशों की तरह ज्यादा सख्त रवैया अपनाएं.

विपक्षी नेताओं ने तुरंत इस बात पर जोर दिया कि इस अभूतपूर्व मनमुटाव ने मेलोनी की दोस्ती वाली शुरुआती रणनीति की विफलता को उजागर कर दिया है.

सेंट्रिस्ट विपक्षी गुट के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री माटेओ रेन्जी ने कहा, 'क्या आपको आखिरकार समझ आ गया है कि उन लोगों के साथ गठबंधन करने का मतलब इटली के खिलाफ जाना है? MAGA कैप और ट्रंप के साथ रिश्ते बनाने की बातें अब बहुत हो चुकी हैं.'

ईरान युद्ध ने मेलोनी को मुश्किल स्थिति में डाल दिया

ट्रंप की 2024 की चुनावी जीत से मेलोनी के लिए एक ऐसे राजनीतिक सहयोगी के साथ खास रिश्ते बनाने का रास्ता खुलता दिख रहा था, जिनकी विचारधारा उनसे मिलती-जुलती थी. इससे वह अमेरिका और काफी हद तक संशय में रहने वाले यूरोप के बीच एक पुल का काम कर सकती थीं.

शुरुआत में ट्रंप ने उनकी खूब तारीफ की. 2024 और 2025 में कई मौकों पर उन्होंने मेलोनी को 'शानदार नेता और इंसान', 'खूबसूरत महिला', 'बहुत सफल राजनेता' और 'सभी के लिए प्रेरणा' बताया.

जब ट्रंप ने यूरोपीय संघ पर भारी टैरिफ लगाए तो मेलोनी ने राष्ट्रपति के प्रति नरम रुख अपनाकर खुद को अलग दिखाया. उन्होंने कहा कि आम दुश्मनों के खिलाफ पश्चिमी मोर्चे को एकजुट रखना ज्यादा जरूरी है.

उन्होंने ट्रंप की सार्वजनिक रूप से कोई आलोचना भी नहीं की, जबकि यूरोप के अन्य नेता इस बात से परेशान थे कि ट्रंप ने रूस के साथ युद्ध में यूक्रेन का साथ नहीं दिया और गाजा संघर्ष को खत्म करने के लिए इजरायल पर दबाव बनाने में हिचकिचाहट दिखाई.

हालांकि, ईरान में चल रही लड़ाई ने मेलोनी को मुश्किल स्थिति में डाल दिया. अप्रैल में हालात तब और बिगड़ गए जब ट्रंप ने संघर्ष की आलोचना करने पर पोप लियो पर तीखा हमला किया. मेलोनी ने लियो का बचाव किया, जिसके बाद ट्रंप ने उन पर 'हिम्मत की कमी' का आरोप लगाया.

उन्होंने ईरान युद्ध के लिए हथियार ले जा रहे अमेरिकी सैन्य विमानों को सिसिली में एयरबेस का इस्तेमाल करने की इजाजत भी नहीं दी. उन्होंने कहा कि अमेरिकियों ने जरूरी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया था.

पॉलिटिकल रिस्क कंसल्टेंसी 'पॉलिसी सोनार' के फ्रांसेस्को गैलिएटी ने रॉयटर्स से कहा, 'ट्रंप की नजर में यही असली गलती थी.' गैलिएटी ने कहा कि कम समय में ट्रंप का विरोध करने से मेलोनी को घरेलू स्तर पर फायदा हो सकता है, क्योंकि इटली के ओपिनियन पोल में ट्रंप काफी अलोकप्रिय हैं. लेकिन उन्होंने कहा कि अगले साल होने वाले चुनावों से पहले उनके राजनीतिक नैरेटिव का एक अहम हिस्सा खोने का रिस्क भी है.

उन्होंने कहा, 'यह चेहरे पर एक जोरदार तमाचे जैसा है. इससे उनकी उस रणनीति को बड़ा खतरा पैदा हो गया है जिसके तहत चुनाव होने पर इटली के लोग उन्हें ही चुनेंगे क्योंकि उन्हें सबसे भरोसेमंद माना जाता है.'

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