क्या आपका घर आग से सुरक्षित है, एक्सपर्ट से जानें कैसे करें खतरे की पहचान

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क्या आपका घर आग से सुरक्षित है, एक्सपर्ट से जानें कैसे करें खतरे की पहचान

18 जून 2026 को 12:39 pm बजे
क्या आपका घर आग से सुरक्षित है, एक्सपर्ट से जानें कैसे करें खतरे की पहचान

गर्मी का मौसम आते ही देशभर से आग लगने की दुखद और डरावनी खबरें आने लगती हैं. पिछले कुछ सालों में कई लोगों ने आग की चपेट में आकर अपनी जान गंवाई है. ऐसे में यह सवाल उठाना लाजिमी है कि लोग इन हादसों से कैसे बचें और अपने घर को सुरक्षित कैसे बनाएं. आजतक रेडियो के विशेष शो 'प्रॉपर्टी से फायदा' में दिल्ली फायर सर्विस के पूर्व डायरेक्टर अतुल गर्ग ने इस गंभीर मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की और सुरक्षा के कई महत्वपूर्ण मंत्र साझा किए.

अतुल गर्ग ने  कहा कि ' हमारे समाज में लोग फायर सेफ्टी को लेकर बिल्कुल भी गंभीर या जागरूक नहीं हैं. अमूमन जब लोग किसी बैंक्वेट हॉल या होटल में कोई कार्यक्रम बुक करते हैं, तो वे वहां का खाना, एसी, सजावट और पार्किंग तो बहुत बारीकी से चेक करते हैं, लेकिन कोई भी यह नहीं देखता कि वहां आपातकालीन निकास की क्या व्यवस्था है या उस जगह के पास फायर सेफ्टी का वैध लाइसेंस है भी या नहीं. जब तक हम अपनी इस मानसिकता को बदलकर फायर सेफ्टी के प्रति सजग नहीं होंगे, तब तक हादसों को रोकना मुश्किल होगा.'

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दिल्ली फायर सर्विस के पिछले 15 सालों के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि घरों में आग लगने के दो ही मुख्य कारण होते हैं. पहला और सबसे बड़ा कारण इलेक्ट्रिक डिफॉल्ट यानी शॉर्ट सर्किट, ओवरलोडिंग और पुरानी वायरिंग का फटना है, जिससे लगभग 70% हादसे होते हैं. वहीं बाकी के 30% हादसे मानवीय लापरवाही की वजह से होते हैं, जैसे किचन में खाना बनाते समय फोन पर व्यस्त हो जाना, गैस ऑन छोड़ देना या फिर पूजा घर में जलता हुआ दीया या मोमबत्ती छोड़कर चले जाना, जिसे बाद में चूहे आदि गिरा देते हैं और लकड़ी के फर्नीचर के कारण पूरा घर आग की चपेट में आ जाता है.

अक्सर लोग दो-तीन कमरों का घर खरीदते हैं और उस समय की जरूरत के हिसाब से वायरिंग करवा लेते हैं, लेकिन जैसे-जैसे परिवार और आमदनी बढ़ती है, घर में नए एसी, फ्रिज और टीवी जैसे उपकरण जुड़ते चले जाते हैं. हम बिजली का लोड तो बढ़ा लेते हैं, लेकिन 20 साल पुरानी उस वायरिंग को बदलना भूल जाते हैं जिसका प्लास्टिक इंसुलेशन वक्त के साथ खराब हो चुका होता है. ऐसे में जब गर्मियों के दिनों में सारे हैवी गैजेट्स एक साथ चलते हैं, तो पुरानी वायरिंग दबाव नहीं झेल पाती और लाइट बस्ट या शॉर्ट सर्किट हो जाता है.

अतुल गर्ग के मुताबिक, घरों में सुरक्षा के लिए लगी एमसीबी एक तरह का सुरक्षा कवच है,  अगर आपके घर की एमसीबी बार-बार ट्रिप हो रही है, तो इसका सीधा मतलब है कि बिजली का सर्किट आपको संकेत दे रहा है कि अंदर कुछ गड़बड़ है और उसे तुरंत चेक कराने की जरूरत है, लेकिन आम तौर पर लोग किसी स्थानीय इलेक्ट्रीशियन को बुलाकर उसे डायरेक्ट करवा देते हैं या कोई अस्थाई तार लगवा देते हैं. यह लापरवाही सीधे तौर पर बड़े हादसे को दावत देने जैसी है.

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अतुल बताते हैं-  'गर्मियों में एसी  लगातार चलने के कारण कंप्रेसर पर दबाव बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, लोग अक्सर तापमान को 16 या 18 डिग्री पर सेट कर देते हैं, जो अत्यधिक गर्मी के कारण कभी अचीव नहीं होता और कंप्रेसर बिना रुके चौबीसों घंटे चलता रहता है. लगातार चलने से मशीनरी में अत्यधिक हीट पैदा होती है और पुराना कंप्रेसर या गैस लीक होने पर वह ब्लास्ट कर जाता है, इससे बचने के लिए एसी को लगातार चलाने के बजाय हर 2-3 घंटे बाद कम से कम 5 मिनट का रेस्ट दें ताकि वह कूल डाउन हो सके. साथ ही, आउटडोर यूनिट को सीधी धूप से बचाएं और हर 15-20 दिन में एसी का फिल्टर जरूर साफ करें.'

एक फायर ऑफिसर के रूप में अपने कार्यकाल के अनुभवों को साझा करते हुए अतुल ने बताया कि विभाग के सामने मैनपावर की कमी के अलावा सबसे बड़ी चुनौती अनप्लांड और अनऑथराइज्ड कॉलोनियां हैं, दिल्ली-एनसीआर की एक बड़ी आबादी ऐसे इलाकों में रहती है जहां गलियां बेहद संकरी हैं और ऊपर से लोग वहां गाड़ियां या ठेले पार्क कर देते हैं. कई बार हालात इतने खराब होते हैं कि दमकल की गाड़ी को मुख्य सड़क पर ही खड़ा करना पड़ता है और फायर फाइटर्स को आधा किलोमीटर तक भारी पाइप अपने कंधों पर बिछाकर ले जाना पड़ता है. इस प्रक्रिया में बहुत कीमती समय बर्बाद हो जाता है और आग तेजी से फैल जाती है, साथ ही इन इलाकों में पानी का कोई स्थानीय सोर्स भी उपलब्ध नहीं होता जो राहत कार्य में बड़ी बाधा बनता है.

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