परमाणु-होर्मुज पर ठनी, इजरायल भी अलग... कब तक टलेगी जंग?

दुनिया

परमाणु-होर्मुज पर ठनी, इजरायल भी अलग... कब तक टलेगी जंग?

24 जून 2026 को 08:47 am बजे
परमाणु-होर्मुज पर ठनी, इजरायल भी अलग... कब तक टलेगी जंग?

पश्चिम एशिया में फिलहाल मिसाइल-ड्रोन शांत हैं, लेकिन शांति अब भी दूर दिखाई दे रही है. अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में शुरू हुई बातचीत को बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया जा रहा है, मगर हकीकत यह है कि जिन मुद्दों को लेकर युद्ध शुरू हुआ था, उन पर आज भी कोई स्पष्ट सहमति नहीं बन पाई है. कुछ मुद्दों पर बातचीत तो हो भी रही है लेकिन ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल को तो बातचीत की लिस्ट से ही बाहर कर दिया गया है जो नेतन्यहू का बड़ा मकसद था.

मसलन, सबसे बड़ा विवाद ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को लेकर है. युद्ध की शुरुआत में अमेरिका और इजरायल ने दावा किया था कि तेहरान की मिसाइल क्षमता क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है और इसे खत्म करना उनके प्रमुख मकसद में शामिल है. लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने साफ कहा है कि अमेरिका-ईरान समझौते में मिसाइल कार्यक्रम का कोई जिक्र नहीं है और यह मुद्दा कभी बातचीत की मेज पर था ही नहीं.

यह भी पढ़ें: होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा पर ईरान-ओमान एकजुट, नेविगेशन की आजादी को बताया जरूरी

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी दो टूक कहा कि उनका देश अपने मिसाइल कार्यक्रम पर किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा. उनका कहना है कि यही मिसाइलें ईरान की सुरक्षा की गारंटी हैं और अगर ये नहीं होतीं तो अमेरिका और इजरायल ईरान के साथ भी वही करते जो गाजा में हुआ.

दिलचस्प बात यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी अब अपने पुराने रुख से पीछे हटते दिखाई दे रहे हैं. अप्रैल में जहां वॉशिंगटन का लक्ष्य ईरान की मिसाइल क्षमता को नष्ट करना बताया गया था, वहीं अब ट्रंप कह रहे हैं कि अगर दूसरे देशों के पास मिसाइलें हैं तो ईरान के पास भी कुछ मिसाइलें होना गलत नहीं है. इससे यह सवाल और मजबूत हो गया है कि क्या अमेरिका अपने असल मकसद से पीछे हट रहा है.

परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा भी अब तक अनसुलझा है. अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु ठिकानों पर अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण की अनुमति दे और परमाणु हथियार विकसित न करने की गारंटी दे. दूसरी तरफ तेहरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है. दोनों पक्षों के बीच अविश्वास अब भी बरकरार है.

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं. अमेरिका इसे खुला और सुरक्षित रखना चाहता है क्योंकि दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. वहीं ईरान बार-बार यह संकेत देता रहा है कि वह इस रणनीतिक मार्ग पर अपना प्रभाव बनाए रखेगा.

यह भी पढ़ें: 'होर्मुज के खुलने से बेहतर होगी एनर्जी सप्लाई चेन', ब्रिक्स NSA की बैठक में बोले अजीत डोभाल, भारत ने US-ईरान शांति समझौते का किया स्वागत

इस पूरी तस्वीर में इजरायल सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है. अमेरिका क्षेत्रीय संघर्ष खत्म करने की बात कर रहा है, लेकिन इजरायल अब भी दक्षिणी लेबनान से सेना हटाने को तैयार नहीं दिख रहा. वह हिज्बुल्लाह के पूरी तरह निशस्त्रीकरण को अपनी शर्त बना चुका है. यानी वॉशिंगटन और तेल अवीव की प्राथमिकताओं में भी अंतर दिखाई दे रहा है.

स्विट्जरलैंड में अगले 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते की कोशिश होगी, लेकिन मौजूदा हालात बताते हैं कि न मिसाइल मुद्दे पर सहमति बनी है, न परमाणु विवाद सुलझा है, न होर्मुज को लेकर भरोसा कायम हुआ है और न ही इजरायल पूरी तरह अमेरिकी रणनीति के साथ खड़ा दिख रहा है. ऐसे में फिलहाल युद्ध टला जरूर है, लेकिन यह कहना मुश्किल है कि यह विराम कुछ हफ्तों का है, कुछ महीनों का या फिर किसी नई टकराव की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है.

शेयर करें

📌 संबंधित खबरें

हिंदी खबर नेटवर्क पर पढ़ें ताज़ा हिंदी समाचार।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Hyderabad News: 58 हजार करोड़ से बदलेगी मूसी नदी की सूरत, लंदन की टेम्स की तर्ज पर बनेगा रिवरफ्रंट

बॉक्स ऑफिस कलेक्शन: पहले दिन 100 करोड़ पार 'टॉक्सिक', शाहरुख और रणवीर सिंह की इन फिल्मों का तोड़ डाला रिकॉर्ड

Toxic Box Office Collection Day 1: यश की टॉक्सिक ने पहले दिन कमाए 140 करोड़, जवान और एनिमल को छोड़ा पीछे