क्या पहली बार दुनिया के सामने आएंगे मोजतबा?

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क्या पहली बार दुनिया के सामने आएंगे मोजतबा?

29 जून 2026 को 08:15 am बजे
क्या पहली बार दुनिया के सामने आएंगे मोजतबा?

अमेरिकी और इजरायली हवाई हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के चार महीने बाद देश में भव्य राजकीय अंतिम संस्कार की प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. तेहरान में चार जुलाई से शुरू होने वाले इस पांच दिवसीय शोक कार्यक्रम की घोषणा की है. जब देश शोक के एक बड़े प्रदर्शन की तैयारी कर रहा है तो सबकी नजरें मोजतबा खामेनेई पर टिकी हैं जो लगभग पूरी तरह से गायब हैं. वो अली के बेटे और देश के नए सर्वोच्च नेता भी हैं. बताया जा रहा है कि देश के नए सुप्रीम लीडर और अली खामेनेई के छप्पन वर्षीय बेटे मोजतबा खामेनेई 28 फरवरी को हुए उसी हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे. उनके चेहरे और पैर में गंभीर चोट लगी है. इसके बाद से वह सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं और अभी भी उनके सार्वजनिक रूप से सामने आने को लेकर दुनिया भर में भारी संशय बना हुआ है. सरकारी मीडिया द्वारा उनके मानसिक रूप से स्वस्थ होने और सभी फैसलों में शामिल रहने के दावों के बीच अभी तक उनका कोई भी वीडियो या ऑडियो जारी नहीं किया गया है.

तेहरान से मशहद तक 5 दिन चलेगी अंतिम यात्रा ईरान के शीर्ष अधिकारियों के अनुसार, देश दशकों तक राज करने वाले अपने सर्वोच्च नेता के लिए एक बड़े विलाप प्रदर्शन की तैयारी कर रहा है. तय कार्यक्रम के मुताबिक, चार जुलाई को देश की राजधानी तेहरान में मुख्य समारोह की शुरुआत होगी. इसके बाद शोक जुलूस को धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण शहर कोम ले जाया जाएगा, जिसके बाद इसे पड़ोसी देश इराक के विभिन्न पवित्र स्थलों के दर्शन कराए जाएंगे. अंत में 9 जुलाई को मशहद शहर में दिवंगत सर्वोच्च नेता को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा.

हमले में घायल हुए थे मोजतबा ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के बारे में सरकारी मीडिया ने खुद इस बात की पुष्टि की थी कि तेहरान के केंद्रीय परिसर पर हुए हवाई हमले में वो बुरी तरह घायल हो गए थे. इस हमले में उनके पिता और कई शीर्ष सैन्य अधिकारियों की जान चली गई थी, जबकि मोजतबा के पैरों में गंभीर चोटें आई थीं और उनका चेहरा भी गंभीर रूप से बिगड़ गया था. लंबे समय से उनके सामने न आने के कारण करज जैसे शहरों में नागरिकों द्वारा उनके लापता होने के पोस्टर तक लगा दिए गए हैं.

मोजतबा ने जारी किए बयान वहीं, देश से सर्वोच्च नेता का पद संभालने के बाद से मोजतबा खामेनेई का कोई भी प्रामाणिक बयान सीधे उनकी आवाज में सामने नहीं आया है. इसके बजाय उनके नाम से जारी सभी बयान सरकारी टेलीविजन या सरकारी मीडिया वेबसाइटों पर समाचार एंकरों द्वारा पढ़े गए हैं. मार्च के मिड में जारी अपने पहले संदेश में उन्होंने देश के दुश्मनों पर दबाव बनाए रखने और होर्मुज को पूरी तरह से बंद रखने का संकल्प दोहराया था. उन्होंने साफ किया था कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन वह अपने वैध अधिकारों को भी कभी नहीं छोड़ेगा.

इसके अलावा बाद के बयानों में भी यही पैटर्न देखा गया था. अप्रैल महीने में जारी एक अन्य बयान में मोजतबा ने कहा था कि ईरान अब होर्मुज के प्रबंधन को एक नए चरण में लेकर जाएगा. उन्होंने दुनिया भर के तमाम प्रतिरोध मोर्चों को एक एकीकृत इकाई बताते हुए अमेरिका और इजरायल के सैन्य ठिकानों को सीधी चेतावनी दी थी. हालांकि, इन बयानों के साथ उन्होंने अपने पड़ोसी देशों के साथ मजबूत दोस्ती बनाए रखने और सीजफायर के दौर में भी देश की जनता से एकता बनाए रखने की अपील की थी.

रविवार को ईरान के राष्ट्रीय न्यायपालिका हफ्ते के अवसर पर जारी अपने नए लिखित बयान में मोजतबा खामेनेई ने देश की न्यायपालिका को सख्त निर्देश दिए हैं. उन्होंने जून 2025 के युद्ध और इस साल फरवरी से शुरू हुए नए युद्ध के दौरान हुए अपराधों के लिए जिम्मेदार ताकतों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने को कहा है. उन्होंने मीनाब और लामेरड में बच्चों की हत्या, अस्पतालों पर हुए हमलों और अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के मामले में अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों के बयानों को उनका कबूलनामा माना है.

अमेरिका के प्रति बढ़ा गुस्सा इस भीषण क्षेत्रीय लड़ाई के बीच आम जनता और वैश्विक राय में भी बड़ा बदलाव देखा गया है. प्यू रिसर्च सेंटर की एक हालिया रिपोर्ट (सर्वेक्षण के बीच युद्ध छिड़ने पर क्या होता है?) में ये बात सामने आई है कि संघर्ष के दौरान जैसे-जैसे फील्डवर्क आगे बढ़ा, कई देशों में अमेरिका के प्रति नकारात्मक काफी बढ़ गई और शांति व स्थिरता के साझेदार के रूप में अमेरिका के प्रति समर्थन में कमी आई. ईरान के इतिहास में ऐसे बड़े राजकीय अवसर हमेशा से ही देश के शीर्ष नेतृत्व के लिए अपनी ताकत और एकजुटता का प्रदर्शन करने का जरिया रहा है. खुद अली खामेनेई अपने पूर्ववर्ती रुहोल्लाह खुमैनी के स्मरणोत्सव कार्यक्रमों में सालों तक शामिल होते रहे थे. अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या मोजतबा अपनी शारीरिक दिक्कतों को पीछे छोड़कर दुनिया के सामने आएंगे. यदि वो सामने आते हैं तो इससे उनकी स्थिरता का संदेश जाएगा, और यदि वो अनुपस्थित रहते हैं तो शासन की संवेदनशीलता और गहरी हो जाएगी.

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