CBSE विवाद में COEMPT को ठेका देने पर मांगी रिपोर्ट, हो सकती है कार्रवाई

राजनीति

CBSE विवाद में COEMPT को ठेका देने पर मांगी रिपोर्ट, हो सकती है कार्रवाई

02 जून 2026 को 07:49 am बजे
CBSE विवाद में COEMPT को ठेका देने पर मांगी रिपोर्ट, हो सकती है कार्रवाई
CBSE विवाद में COEMPT को ठेका देने पर मांगी रिपोर्ट, हो सकती है कार्रवाई
नई दिल्‍ली:

CBSE ने छात्रों की आंसर शीट्स बदले जाने और कम नंबर के विवाद में आखिरकार उस कंपनी के खिलाफ एक्‍शन लेना शुरू कर दिया है, जिसे टेंडर दिया गया था. शिक्षा मंत्रालय ने सीओईएमपीटी को ठेका देने के संबंध में सीबीएसई से रिपोर्ट मांगी गई है. टेंडर प्रोसेस की डिटेल जुटाई जा रही हैं. शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी. पिछले कुछ दिनों से छात्रों की आंसर शीट्स बदले जाने का विवाद सोशल मीडिया पर जमकर उठाया जा रहा है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी पिछले दिनों इस विवाद में कूद पड़े और शिक्षा मंत्रालय पर निशाना साधा.

COEMPT पर क्‍यों उठ रहे सवाल?

सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली के लिए सीबीएसई ने सीओईएमपीटी को ठेका दिया था. ऐसा दावा किया जा रहा है कि इस कंपनी का नाम पहले ‘ग्लोबरीना' था, जिसे तेलंगाना में साल 2019 में ब्‍लैकलिस्‍ट कर दिया गया था. राहुल गांधी ने इस मामले में एसआईटी जांच मांग की मांग की है.   

वेदांत ने सबसे पहले उठाई आवाज

सीबीएसई की कक्षा 12 की परीक्षा देने वाले कई छात्रों ने पोर्टल पर अपलोड की गई अपनी कॉपी की स्कैन कॉपी देखने के बाद गड़बड़ी का दावा किया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि ये कॉपियांप्रतियां उनकी आंसर शीट्स की नहीं हैं. कक्षा 12 के छात्र वेदांत ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि वैल्‍यूएशन प्रोसेस के तहत सीबीएसई की ओर से अपलोड की गई भौतिकी की आंसर शीट उसकी नहीं थी. इसके बाद कई अन्य छात्रों ने भी इसी तरह के दावे वाले सोशल मीडिया पोस्ट किए.

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IIT के एक्‍सपर्ट्स कर रहे सिस्‍टम की जांच

बाद में सीबीएसई ने इन छात्रों से संपर्क किया और उन्हें उनकी सही उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध कराईं. बोर्ड ने कहा कि उसने वैल्‍यूएशन प्रोसेस में छात्रों के सामने पेश आ रही समस्याओं से संबंधित मामलों को प्राथमिकता से सुलझाया है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास, आईआईटी कानपुर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (डीआईसीआई) के विशेषज्ञ मिलकर सिस्टम की जांच कर रहे हैं और पोर्टल तथा भुगतान प्रणाली के एकीकरण को मजबूत कर रहे हैं.

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