Grok ने ईरान में बरसाए 2000 बम? खुली जंग की एक और मिस्ट्री
Grok ने ईरान में बरसाए 2000 बम? खुली जंग की एक और मिस्ट्री

ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के सैन्य अभियान को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है. दावा है कि अमेरिकी सेना ने एलॉन मस्क की AI कंपनी xAI के Grok आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करते हुए सिर्फ 96 घंटे में 2000 से ज्यादा मिलिट्री टारगेट्स पर हमले किए.
यह जानकारी अमेरिकी रक्षा विभाग के डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रमुख कैमरन स्टेनली द्वारा एक अमेरिकी अदालत में दाखिल लिखित बयान में सामने आई है. यह दस्तावेज उस मुकदमे का हिस्सा है, जिसमें अमेरिकी नागरिक अधिकार संगठन NAACP ने मस्क की कंपनी xAI के खिलाफ पर्यावरण कानूनों के उल्लंघन का आरोप लगाया है.
यह भी पढ़ें: न्यूक्लियर डील, पीस डील या MoU? ट्रंप के एक शब्द ने दुनिया को कर दिया कन्फ्यूज
स्टेनली ने अपने बयान में कहा कि अमेरिकी सरकार "Grok Gov Model" का इस्तेमाल करती है. यह मॉडल xAI के AI सिस्टम पर आधारित है और इसे Maven Smart Systems नाम के प्लेटफॉर्म में तैनात किया गया है. इसका इस्तेमाल टारगेटिंग, खुफिया जानकारी जुटाने, सैन्य तैयारी और भर्ती जैसे अहम राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों में किया जाता है.
दस्तावेज के मुताबिक, इसी AI-संचालित सिस्टम की मदद से "ऑपरेशन एपिक फ्यूरी" के दौरान अमेरिकी सेना ने महज 96 घंटे में 2000 से अधिक हथियारों और बमों का इस्तेमाल किया. हालांकि बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि ये हमले कब और किन-किन ठिकानों पर किए गए.
इस खुलासे की सबसे बड़ी अहमियत यह है कि पहली बार ट्रंप प्रशासन की तरफ से सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया गया है कि एलॉन मस्क के AI मॉडल का इस्तेमाल ईरान युद्ध के दौरान सैन्य अभियानों में किया गया.
हालांकि AI की भूमिका क्या थी, इस पर पूरी जानकारी सामने नहीं आई है. विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे सिस्टम आमतौर पर खुफिया डेटा का विश्लेषण, संभावित लक्ष्यों की पहचान और युद्धक्षेत्र में तेजी से फैसले लेने में मदद करते हैं. अंतिम हमला करने का फैसला अब भी सैन्य अधिकारियों के हाथ में रहता है.
28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों में हजारों लोग मारे गए. ईरानी अधिकारियों का दावा है कि इस दौरान करीब 3500 लोगों की मौत हुई. इस पूरे विवाद का दूसरा पहलू भी है. NAACP ने आरोप लगाया है कि xAI अपने विशाल डेटा सेंटर को चलाने के लिए मिसिसिपी में 27 मीथेन गैस टर्बाइन अवैध रूप से संचालित कर रही है. संगठन का कहना है कि इससे पर्यावरण और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है.
यह भी पढ़ें: 1971 में बंगाल की खाड़ी से खदेड़ा गया था, अब नई चीनी सबमरीन के दम पर कूद रहा पाकिस्तान
लेकिन अमेरिकी न्याय विभाग ने अदालत से इस मुकदमे को खारिज करने की मांग की है. सरकार का तर्क है कि xAI का सुपरकंप्यूटर और डेटा सेंटर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. अगर इनकी क्षमता प्रभावित हुई तो अमेरिकी सेना की AI आधारित सैन्य क्षमताओं पर असर पड़ सकता है.
आधुनिक युद्ध में AI की भूमिका लगातार बढ़ रही है. ड्रोन संचालन, खुफिया विश्लेषण, लक्ष्य की पहचान और युद्धक्षेत्र की निगरानी जैसे कई काम अब AI की मदद से किए जा रहे हैं. ऐसे में ग्रोक AI के इस्तेमाल को भविष्य के युद्धों की एक झलक के तौर पर देखा जा रहा है.
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें