पुश्‍तैनी घर बेचा, ₹13000 में शुरू किया कारोबार... आज ₹20000Cr के मालिक!

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पुश्‍तैनी घर बेचा, ₹13000 में शुरू किया कारोबार... आज ₹20000Cr के मालिक!

10 जुलाई 2026 को 09:17 am बजे
पुश्‍तैनी घर बेचा, ₹13000 में शुरू किया कारोबार... आज ₹20000Cr के मालिक!

बिजनेस करने के लिए ज्‍यादा पैसों की जरूरत नहीं होती है, बल्कि सही जगह पर पैसा लगाकर काम करने की आवश्‍यकता होती है. फिर वह अपने कारोबार का बढ़ा बना सकता है. ऐसा ही कुछ करके दिखाया है आरजी चंद्रमोगन ने, जिन्‍होंने सिर्फ 13000 रुपये से कारोबार की शुरुआत की और आज उनकी कंपनी की वैल्‍यू 20,000 करोड़ रुपये हो चुकी है.

RG चंद्रमोगन के लिए कॉलेज की डिग्री कभी सफलता की अनिवार्य शर्त नहीं रही. मैथ सब्‍जेक्‍ट में फेल होने के बाद उन्होंने कॉलेज छोड़ दिया, 65 रुपये प्रति माह की मजदूरी पर काम किया और बाद में चेन्नई में एक छोटी सी दुकान से आइसक्रीम बेचना शुरू किया. पांच दशक से अधिक समय बाद, वे हैटसन एग्रो प्रोडक्ट्स के प्रमुख बन चुके हैं. मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह कंपनी लगभग 20,000 करोड़ रुपये के वैल्‍यू वाली एक लिस्‍टेड डेयरी कंपनी है.

कारोबारी परिवार में हुआ था जन्‍म, लेकिन...  तमिलनाडु के एक छोटे से गांव में एक साधारण परिवार में इनका जन्‍म हुआ था. बाद में उनके पिता 1956 में चेन्नई चले गए और चेन्नई सेंट्रल स्टेशन के पास एक किराने की दुकान खोली, लेकिन 1968 में कारोबार ठप हो गया, जिससे परिवार को खाली हाथ अपने होम टाउन वापस लौटना पड़ा.

कैसे मिली खुद का कारोबार शुरू करने की प्रेरणा जिस कारण उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हुई. चंद्रमोगन ने पलायमकोट्टई के सेंट जेवियर्स कॉलेज में प्री-यूनिवर्सिटी कोर्स में दाखिला लिया, लेकिन मैथ में फेल हो गए और कॉलेज की पढ़ाई कभी पूरी नहीं कर पाए. इसके बाद उनके पिता ने चेन्‍नई से करीब 160 किलोमीटर दूर विलुप्पुरम में एक लकड़ी के गोदाम में उन्‍हें काम दिलवाया. चंद्रमोगन को महीने में केवल 65 रुपये मिलते थे और उन्‍होंने एक साल तक ऑर्डर लेने और शारीरिक श्रम करने में बिताया. इस एक्‍सप्रीएंस ने उन्‍हें वो विश्‍वास दिलाया कि वे अपना खुद का कारोबार कर सकते हैं.

₹13,000 ने सब कुछ बदल दिया कारोबारी बनने के संकल्प के साथ, चंद्रमोगन बिना निवेशकों, सलाहकारों या औपचारिक व्यवसाय योजना के चेन्नई लौट आए. उनके पिता ने उनके कारोबार को फंडिंग करने के लिए परिवार की पुश्तैनी जमीन 13,000 रुपये में बेच दी. 1970 में, चंद्रमोगन ने चेन्नई के रॉयपुरम में 250 वर्ग फुट की एक छोटी सी जगह किराए पर ली, एक साधारण बर्फ बनाने की मशीन खरीदी और चार कर्मचारियों को काम पर रखा. यह यूनिट 'अरुण' ब्रांड के तहत हरदिन 10,000 आइसक्रीम का उत्पादन कर सकती थी.

शुरुआती वर्षों में, वह स्वयं उत्पादों को बेचते थे, अक्सर ग्राहकों तक पहुंचने के लिए चेन्नई की सड़कों पर एक ठेला धकेलते थे. करीब 10 साल तक आइसक्रीम बेचने के बाद, उन्‍हें यह एहसास हुआ कि मौसमी फ्रोज ट्रीट की तुलना में दूध में ज्‍यादा अवसर मौजूद हैं. भारत का डेयरी मार्केट बढ़ रहा था, लेकिन इसका ज्‍यादातर जगहों पर कोई संगठित कारोबार नहीं था.

कैसे आइस्‍क्रीम से डेयरी बिजनेस में हुई एंट्री?  फिर क्‍या था? 1980 के दशक में, उन्होंने दूध प्रोसेसिंग के क्षेत्र में विस्तार किया. कंपनी ने धीरे-धीरे मक्खन, घी और दही को भी शामिल किया, जिससे अरुण एक आइसक्रीम ब्रांड से एक व्यापक डेयरी व्यवसाय में बदल गया. तेजी से डेवलपमेंट के पीछे भागने के बजाय, चंद्रमोगन ने डिस्‍ट्रीब्‍यूशन को मजबूत करने, किसानों और खुदरा विक्रेताओं के साथ संबंध बनाने और आपूर्ति का विस्तार करने पर फोकस किया.

20 हजार करोड़ रुपये की कंपनी इस लॉन्‍गटर्म नजरिए ने हैटसन एग्रो प्रोडक्ट्स को भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट सेक्‍टर की डेयरी कंपनी बनने में मदद की. जुलाई 2020 तक, लिस्‍टेड कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन 20,000 करोड़ रुपये से अधिक था. फोर्ब्स के अनुसार, चंद्रमोगन की कुल संपत्ति 1.6 अरब डॉलर है. 2023 में भारत के सबसे धनी लोगों की सूची में वे 99वें स्थान पर और 2026 में वैश्विक अरबपतियों की सूची में 2,481वें स्थान पर थे. 2018 में, डेयरी क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें भारतीय डेयरी एसोसिएशन द्वारा संरक्षण पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

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