कब से शुरू होगा चातुर्मास? जानें क्या है सही डेट, महत्व और नियम

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कब से शुरू होगा चातुर्मास? जानें क्या है सही डेट, महत्व और नियम

02 जुलाई 2026 को 06:47 am बजे
कब से शुरू होगा चातुर्मास? जानें क्या है सही डेट, महत्व और नियम

Chaturmas 2026: सनातन धर्म में चातुर्मास को आत्मिक शुद्धि, तप, साधना और स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण समय माना गया है. चातुर्मास का अर्थ है चार महीने का समय. यह अवधि आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से शुरू होकर कार्तिक मास की देवप्रबोधनी (देवउठनी) एकादशी तक चलती है.

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इन चार महीनों में भगवान विष्णु क्षीर सागर में शेषनाग की शय्या पर योग निद्रा में चले जाते हैं. इस दौरान सृष्टि के संचालन का कार्यभार भगवान शिव संभालते हैं. चूंकि भगवान विष्णु निद्रालीन होते हैं, इसलिए इस अवधि में सभी प्रकार के मांगलिक और शुभ कार्य वर्जित हो जाते हैं, लेकिन पूजा-पाठ और तप के लिए यह समय सर्वोत्तम माना गया है.

द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में चातुर्मास की शुरुआत 25 जुलाई 2026 (शनिवार) को देवशयनी एकादशी से हो रही है, और इसका समापन 20 नवंबर 2026 (शुक्रवार) को देवउठनी एकादशी के दिन होगा.

1. धार्मिक व आध्यात्मिक महत्व धार्मिक दृष्टिकोण से यह समय अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखने और ईश्वर की भक्ति में लीन होने का है. इन चार महीनों में किए गए जप, तप, दान और व्रत का फल आम दिनों की तुलना में कई गुना अधिक मिलता है. चूंकि इस समय भगवान शिव सृष्टि का संचालन करते हैं, इसलिए सावन के महीने में शिव आराधना और फिर भाद्रपद में श्री कृष्ण व गणेश जी की पूजा का विशेष विधान है.

2. वैज्ञानिक और स्वास्थ्य का महत्व चातुर्मास का समय पूरी तरह से वर्षा ऋतु के समकालीन होता है. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इस मौसम में सूर्य की रोशनी कम मिलती है, वातावरण में नमी के कारण कीड़े-मकोड़े और बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा रहता है. इस मौसम में इंसान की पाचन क्रिया भी धीमी हो जाती है. इसलिए चातुर्मास के नियमों में सात्विक भोजन और उपवास को महत्व दिया गया है ताकि शरीर स्वस्थ रहे.

- चातुर्मास के पहले महीने (सावन) में हरी पत्तेदार सब्जियां नहीं खानी चाहिए. - दूसरे महीने (भाद्रपद) में दही का त्याग करना चाहिए. - तीसरे महीने (आश्विन) में दूध का सेवन बंद या कम कर देना चाहिए. - चौथे महीने (कार्तिक) में दालें (विशेषकर उड़द और चना) और राई का त्याग करना चाहिए. - इस पूरे समय में तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा) से पूरी तरह परहेज करना चाहिए.

भूमि पर शयन  चातुर्मास के दौरान जमीन पर चटाई बिछाकर सोना बेहद शुभ और तप का हिस्सा माना जाता है.

ब्रह्मचर्य का पालन  इन चार महीनों में शारीरिक और मानसिक रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य माना गया है.

सत्य और मौन  किसी की निंदा न करें, झूठ न बोलें और हो सके तो दिन का कुछ समय मौन रहें.

विवाह संस्कार  इस दौरान शादी-ब्याह नहीं किए जाते हैं. माना जाता है कि देवों के शयन काल में किए गए विवाह में देवताओं का आशीर्वाद नहीं मिल पाता है.

गृह प्रवेश और भूमि पूजन  नए घर में प्रवेश करना या नए मकान की नींव रखना (भूमि पूजन) इस अवधि में अशुभ माना जाता है.

मुंडन और जनेऊ संस्कार  बच्चों का मुंडन (चूड़ाकर्म) और उपनयन (जनेऊ) संस्कार भी चातुर्मास में नहीं किए जाते हैं.

नया बिजनेस शुरू करना  किसी बड़े नए व्यापार या व्यावसायिक प्रतिष्ठान की शुरुआत करने से भी इस दौरान बचना चाहिए.

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