मुंह ढककर पहुंचे उपद्रवी, पुलिस से धक्का-मुक्की... जंतर-मंतर पर हाई-वोल्टेज ड्रामा

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मुंह ढककर पहुंचे उपद्रवी, पुलिस से धक्का-मुक्की... जंतर-मंतर पर हाई-वोल्टेज ड्रामा

23 जुलाई 2026 को 09:13 am बजे
मुंह ढककर पहुंचे उपद्रवी, पुलिस से धक्का-मुक्की... जंतर-मंतर पर हाई-वोल्टेज ड्रामा

दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के समर्थकों का धरना अब भी जारी है और बीती रात भी हालात तनावपूर्ण बने रहे. 22 और 23 जुलाई की दरमियानी रात संसद मार्ग रेड लाइट के पास प्रदर्शनकारियों ने जमकर हंगामा किया और पुलिस बैरिकेड पर चढ़कर भी हंगामा किया.

रातभर दिल्ली पुलिस के अधिकारी बैरिकेड पर मोर्चा संभालते नजर आए और भीड़ के बीच खड़े होकर प्रदर्शनकारियों पर नजर रखते रहे. देर रात कुछ प्रदर्शनकारी अपना चेहरा ढके हुए दिखे, किसी ने स्पाइडरमैन का मास्क पहन रखा था तो किसी ने रूमाल बांध रखा था ताकि पुलिस उन्हें पहचान न सके.

इसी रात स्पेशल सीपी लॉ एंड ऑर्डर देवेश चंद्र श्रीवास्तव आरएमएल अस्पताल पहुंचे और वहां भर्ती उन पुलिसकर्मियों का हालचाल जाना जो 22 जुलाई को जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन में गंभीर रूप से घायल हुए थे.

प्रदर्शनकारी परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों की जवाबदेही, शिक्षा व्यवस्था में सुधार, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं.

आज तड़के जंतर मंतर के हालात पर पुलिस की कड़ी नजर बनी रही. 22 और 23 जुलाई की रात स्पेशल सीपी देवेश चंद्र श्रीवास्तव खुद आरएमएल अस्पताल पहुंचे और घायल पुलिसकर्मियों से मुलाकात की. इसी दौरान संसद मार्ग रेड लाइट के पास प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच रातभर तनाव बना रहा और कुछ प्रदर्शनकारी चेहरा छिपाकर पुलिस बैरिकेड तक पहुंच गए.

बुधवार को सीजेपी ने आरोप लगाया कि जंतर मंतर के आसपास इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है. पार्टी संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक्स पर पोस्ट कर सवाल उठाया कि क्या सरकार एक और सख्त कार्रवाई की तैयारी कर रही है, और पुलिस और अर्धसैनिक बलों से गैरकानूनी आदेशों का पालन न करने की अपील की.

भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक ने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से जारी वीडियो संदेश में कहा कि अगर सरकार भरोसा दिलाए कि छात्रों के खिलाफ कोई एफआईआर या कार्रवाई नहीं होगी, तो वे आज ही अनशन तोड़ देंगे. उन्होंने बताया कि अनशन के 25वें दिन उनका वजन करीब 11 किलो कम हो चुका है, उनकी मांसपेशियां भी कमजोर पड़ गई हैं, लेकिन वे फिलहाल ठीक हैं और अपना काम फिर शुरू करना चाहते हैं.

उन्होंने बताया कि मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह मंगलवार रात अस्पताल में उनसे मिले और भरोसा दिलाया कि सरकार पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने पर विचार करेगी, संसद में चर्चा कराएगी और प्रधान के इस्तीफे पर भी विचार करेगी. इससे पहले वांगचुक ने मंत्रियों को लिखे पत्र में कहा कि छात्रों की एकमात्र गलती यह रही कि उन्होंने निष्पक्ष और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था के लिए आवाज उठाई.

कांग्रेस के विवेक तन्खा, सीपीआई एम के जॉन ब्रिटास और टीएमसी की सागरिका घोष समेत विपक्षी सांसदों का एक दल भी मेदांता अस्पताल पहुंचा और वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील की.

सांसदों ने पत्र में भरोसा दिलाया कि परीक्षा सुधार और शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही के मुद्दे संसद में उठाए जाएंगे. उसी शाम जंतर मंतर पर पथराव में कम से कम दो एसीपी समेत छह पुलिसकर्मी घायल हो गए.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, प्रदर्शन स्थल पर कई असामाजिक तत्व घुस आए हैं जो पुलिसकर्मियों पर पथराव कर रहे हैं. पंजाबी बाग में तैनात एसीपी जय प्रकाश शाम करीब साढ़े चार बजे घायल हुए और उनके माथे पर चोट आई, इसके बाद एक और पथराव में एक और एसीपी समेत चार पुलिसकर्मी घायल हुए.

सभी को पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां हालत स्थिर बताई जा रही है. इसी दिन शिवाजी पार्क में सीजेपी और अन्य संगठनों ने बिना अनुमति नीट के मुद्दे पर प्रदर्शन किया, जिसमें पुलिस ने करीब 200 लोगों को हिरासत में लिया. इसके बाद भी करीब 1500 प्रदर्शनकारी वहां जमा हो गए, जिन्हें पुलिस ने शांतिपूर्ण तरीके से तितर बितर कर दिया.

सीजेपी का धरना जंतर मंतर पर लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा. सोनम वांगचुक, जो 28 जून से भूख हड़ताल पर बैठे हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियों की जवाबदेही सहित कई मांगों को लेकर अनशन कर रहे हैं, अपनी मांगों पर अडिग रहे. उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल शिफ्ट किया गया, जहां वे अब भी भर्ती हैं.

20 जुलाई को दिन सीजेपी के 'संसद चलो' मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को संसद की ओर बढ़ने से रोकने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े. पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई प्रदर्शनकारियों के सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश के बाद की गई थी, जबकि सीजेपी ने बल के इस्तेमाल को जरूरत से ज्यादा बताया है.

वांगचुक ने कहा कि यह कार्रवाई काफी सख्त थी, इसलिए उन्होंने अपना अनशन जारी रखने का फैसला किया. उन्होंने उन छात्रों की तारीफ भी की जिन्होंने लाठियां खाईं पर पलटवार नहीं किया, जबकि उन्हें भड़काने और पथराव कराने की कोशिश की गई थी. इसी मार्च के बाद से प्रदर्शनकारी जंतर मंतर पर लगातार अपनी मांगों पर डटे हुए हैं.

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