प्रशांत किशोर ने क्यों बांकीपुर में खेला खुद उतरने का दांव, क्या नितिन नवीन की छोड़ी सीट पर टिकेंगे पांव?
प्रशांत किशोर ने क्यों बांकीपुर में खेला खुद उतरने का दांव, क्या नितिन नवीन की छोड़ी सीट पर टिकेंगे पांव?

जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव से खुद लड़ने का फैसला किया है. बिहार विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने 238 सीटों पर कैंडिडेट उतारे थे, लेकिन एक भी उम्मीदवार जीता नहीं था. इस नतीजे को उनके राजनीतिक डेब्यू के लिए करारा झटका माना गया था. यही नहीं प्रशांत किशोर ने तब खुद चुनाव नहीं लड़ा था. उनका कहना था कि मैं अपनी पार्टी के उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार में व्यस्त रहूंगा. फिर भी कोई कैंडिडेट नहीं जीता था. ऐसे में उनकी राजनीतिक यात्रा को लेकर भी कयास लगने लगे थे. अब उन कयासों से आगे बढ़कर प्रशांत किशोर ने नया दांव खेला है.
वह उस बांकीपुर सीट के उपचुनाव में उतरे हैं, जो भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने नितिन नवीन के इस्तीफे से खाली हुई है. राज्यसभा पहुंचे नितिन नवीन के इस्तीफे से खाली इस सीट पर भाजपा अपना पूरा जोर लगाना चाहेगी. जानकार मानते हैं कि प्रशांत किशोर ने इस सीट को इसलिए चुना है ताकि भाजपा के मुकाबले वह विपक्ष के तौर पर खुद को स्थापित कर सकें. यहां आरजेडी कभी ज्यादा मजबूत नहीं रही है. ऐसे में यदि प्रशांत किशोर चुनाव नहीं जीत सके, लेकिन दूसरे नंबर पर भी आ गए तो उनके लिए बड़ी सफलता होगी. वह खुद को विपक्ष के स्वाभाविक चेहरे के तौर पर स्थापित करने की ओर बढ़ेंगे. बांकीपुर सीट को भाजपा का गढ़ कहा जाता है.
ऐसे में बांकीपुर का नतीजा प्रशांत किशोर की राजनीतिक यात्रा में मील का पत्थर साबित हो सकता है. यहां 30 जुलाई को विधानसभा चुनाव होना है. पीके ने रविवार को कहा कि यह सीट बिहार में सबसे ज्यादा शिक्षित और आर्थिक तौर पर मजबूत लोगों की मानी जाती है. इसलिए मैं लोगों से अपील करूंगा कि वे अपने लिए सबसे सही व्यक्ति का चुनाव करें. मैं उनसे अपने लिए वोट की अपील करूंगा. उन्होंने कहा कि यदि मैं यहां से जीता तो अपनी पार्टी का इकलौता विधायक रहूंगा और जनता की आवाज को 242 अन्य विधायकों के मुकाबले मजबूती से उठाऊंगा.
आरजेडी और कांग्रेस के मुकाबले बढ़त चाहते हैं प्रशांत किशोर
प्रशांत किशोर ने अपनी दावेदारी भी इस दलील के साथ पेश कर दी है कि बांकीपुर में भाजपा को जनसुराज ही हरा सकती है. इस तरह उन्होंने भाजपा के मुकाबले विपक्ष की रेस में खुद को आगे रखने की कोशिश की है. भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के पहले साल में यह नतीजा मायने रखेगा. पीके ने कहा कि बांकीपुर से कांग्रेस और आरजेडी बड़े अंतर से हारते रहे हैं. इसलिए जनसुराज का मानना था कि यदि यहां नतीजा बदला है तो कोई मजबूत कैंडिडेट उतारना होगा. इसी रणनीति के तहत पीके खुद उतर गए हैं. जनसुराज से जुड़े लोगों का कहना है कि यह पीके के लिए खुद को स्थापित करने का एक और मौका है यानी उनके लिए यह मेक एंड ब्रेक वाला अवसर है.
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