NDA में सीट शेयरिंग पर संग्राम, जयंत की डिमांड कैसे पूरी करेगी BJP

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NDA में सीट शेयरिंग पर संग्राम, जयंत की डिमांड कैसे पूरी करेगी BJP

30 जुलाई 2026 को 08:45 am बजे
NDA में सीट शेयरिंग पर संग्राम, जयंत की डिमांड कैसे पूरी करेगी BJP

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर एनडीए गठबंधन के अंदर सीटों को लेकर सियासी खींचतान शुरू हो गई है. बताया जा रहा है कि  राष्ट्रीय लोक दल (RLD) ने गठबंधन में अपनी मजबूत स्थिति का हवाला देते हुए बीजेपी के सामने 33 से ज्यादा सीटों चुनाव लड़ने की दावेदारी पेश की है. साथ ही पार्टी ने अपने नेताओं को इन सीटों पर संगठन को मजबूत करने का निर्देश दिया है. जबकि बीजेपी फिलहाल आरएलडी को 20 से 25 सीटें देने के पक्ष में है. आरएलडी अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलावा प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी अपनी दावेदारी बढ़ा रही है. आरएलडी ने आधिकारिक तौर पर आजतक को बताया है कि पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं को चुनावी तैयारी के लिए निर्देश दे दिए हैं और संगठन को 33 से ज्यादा विधानसभा सीटों पर मजबूत करने का लक्ष्य दिया गया है. पार्टी का कहना है कि वह इस बार सिर्फ पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी अपनी दावेदारी पेश करेगी.RLD ने 2022 के प्रदर्शन को बनाया आधार

दरअसल, 2022 के विधानसभा चुनाव में आरएलडी ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा था. उस चुनाव में पार्टी ने 33 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जिसमें आरएलडी को 8 सीटों पर जीत मिली थी, जबकि करीब 15 सीटों पर पार्टी दूसरे नंबर पर रही थी. आरएलडी का मानना है कि सपा के साथ गठबंधन में उसे अपेक्षित राजनीतिक लाभ नहीं मिला और गठबंधन का फायदा ज्यादा समाजवादी पार्टी को हुआ. अब पार्टी बीजेपी के साथ गठबंधन में अपने प्रदर्शन और संगठन की ताकत के आधार पर ज्यादा सीटों की मांग कर रही है.

पश्चिम यूपी के समीकरण पर नजर आरएलडी नेताओं का मानना है कि पिछले कुछ सालों में बीजेपी सरकार के खिलाफ हुए किसान आंदोलन और अन्य विरोध प्रदर्शनों के दौरान पार्टी की भूमिका को वह अपनी "बर्गेनिंग पावर" के तौर पर इस्तेमाल कर सकती है. पार्टी का दावा है कि पश्चिमी यूपी में उसका सामाजिक आधार मजबूत है, जिसका फायदा गठबंधन को चुनाव में मिल सकता है. हालांकि, आरएलडी अब सिर्फ पश्चिमी यूपी की सीटों तक सीमित नहीं रहना चाहती. पार्टी पूर्वांचल में भी अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रही है. इसी के चलते आरएलडी वाराणसी, मिर्जापुर, जौनपुर, बलिया समेत कई जिलों में संगठन विस्तार और संभावित उम्मीदवारों के लिए सीटों की मांग की जा रही है.

वहीं, बीजेपी सूत्रों के मुताबिक पार्टी आरएलडी को 20 से 25 सीटों तक सीमित रखना चाहती है. बीजेपी का मानना है कि गठबंधन में उन्हीं सीटों पर आरएलडी को मौका दिया जाना चाहिए, जहां पार्टी की जमीनी पकड़ मजबूत है और जीत की संभावना ज्यादा है. बीजेपी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बाहर आरएलडी को ज्यादा सीटें देने के पक्ष में नहीं बताई जा रही है. पार्टी के सामने अपने अन्य सहयोगियों को भी सीटें देनी हैं, जिनमें निषाद पार्टी, अपना दल (सोनेलाल) और अन्य सहयोगी दल शामिल हैं.

2027 के चुनाव से पहले एनडीए के अंदर सीट बंटवारे को लेकर ये शुरुआती खींचतान मानी जा रही है. आरएलडी अपनी राजनीतिक हैसियत बढ़ाने के लिए ज्यादा सीटों पर दावा कर रही है, जबकि बीजेपी गठबंधन के सभी सहयोगियों के बीच संतुलन बनाकर चलना चाहती है. अब नजर इस बात पर होगी कि आने वाले महीनों में बीजेपी और आरएलडी के बीच सीटों को लेकर सहमति किस फॉर्मूले पर बनती है और यूपी की चुनावी राजनीति में यह गठबंधन किस नए समीकरण को जन्म देता है.

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