रूसी तेल खरीदने पर भारत पर लगेगा 100% टैरिफ? US सीनेट ने पास किया नया बिल, जानिए पूरा मामला

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रूसी तेल खरीदने पर भारत पर लगेगा 100% टैरिफ? US सीनेट ने पास किया नया बिल, जानिए पूरा मामला

08 अगस्त 2026 को 10:30 am बजे
रूसी तेल खरीदने पर भारत पर लगेगा 100% टैरिफ? US सीनेट ने पास किया नया बिल, जानिए पूरा मामला
रूसी तेल खरीदने पर भारत पर लगेगा 100% टैरिफ? US सीनेट ने पास किया नया बिल, जानिए पूरा मामला
US Tariff On Russian Oil: इस बिल के निशाने पर रूस से सबसे ज्यादा कच्चा तेल खरीदने वाले शीर्ष देश हैं, जिनमें भारत और चीन भी शामिल हैं

US Tariff On India: क्या रूस से तेल खरीदना भारत के लिए फिर महंगा पड़ सकता है? अमेरिका में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर नए टैरिफ लगाने की तैयारी तेज हो गई है. अमेरिकी सीनेट ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर कार्रवाई से जुड़े एक नए बिल को भारी बहुमत से पास कर दिया है. इस बिल में रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले टॉप  देशों पर अधिकतम 100% तक इंपोर्ट ड्यूटी लगाने का प्रावधान है. ऐसे में भारत और चीन जैसे देशों पर भी इसका असर पड़ने की चर्चा है.

अमेरिकी सीनेट ने रूस से जुड़े नए प्रतिबंध वाले बिल (Russia Sanctions Bill) को 86-11 के भारी बहुमत से पास किया है. इस बिल को सीनेटर लिंडसे ग्राहम के साथ बातचीत के बाद तैयार किया गया था. इसका मकसद उन देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है, जो रूस से तेल, गैस और दूसरे उत्पाद खरीदते हैं और इस तरह रूस की अर्थव्यवस्था को मदद पहुंचाते हैं.

भारत पर 100% टैरिफ लगेगा या नहीं?

इस बिल में रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले टॉप देशों पर अधिकतम 100% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान रखा गया है. यही वजह है कि भारत के लिए भी इसे अहम माना जा रहा है. हालांकि, बिल पास होने का मतलब यह नहीं है कि भारत पर तुरंत 100% टैरिफ लागू हो गया है. यह एक ऐसा प्रावधान है, जिसके तहत रूस के प्रमुख खरीदार देशों पर आगे कार्रवाई की जा सकती है.

पहले 500% टैरिफ लगाने की थी बात

रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ का यह प्रस्ताव पहले और भी सख्त था. अप्रैल 2025 में लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने जो बिल पेश किया था, उसमें रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था.बाद में बिल के अपडेटेड में इस प्रावधान को कम किया गया. अब रूस के कच्चे तेल और गैस के टॉप पांच खरीदार देशों पर टैरिफ की अधिकतम सीमा 100% रखी गई है.

रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदार कौन हैं?

रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान रूस के कच्चे तेल के प्रमुख खरीदारों में शामिल हैं. यही वजह है कि नए अमेरिकी कानून का इन देशों पर खास असर पड़ सकता है.

भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है. इसलिए अमेरिकी सीनेट के इस कदम के बाद यह सवाल अहम हो गया है कि क्या आगे भारत पर भी अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है.

किन देशों को मिल सकती है राहत?

इस अमेरिकी बिल में कुछ देशों के लिए राहत का प्रावधान भी बताया गया है. इसके तहत ऐसे देशों को छूट मिल सकती है, जो रूस के नेचुरल गैस निर्यात का 15% से कम आयात करते हैं और साथ ही रूसी गैस की खरीद लगातार कम कर रहे हैं.इस प्रावधान से जापान, फ्रांस, हंगरी और बेल्जियम जैसे देशों को राहत मिलने की उम्मीद जताई गई है.

ईरान पर भी सख्त प्रावधान

यह बिल सिर्फ रूस तक सीमित नहीं है. इसमें 1996 के Iran Sanctions Act को 2031 तक जारी रखने का प्रावधान भी है. इसके तहत ईरान के साथ कारोबार करने वाली गैर-अमेरिकी कंपनियों पर भी सेकेंडरी आर्थिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं.

ट्रंप के पास 500% टैरिफ लगाने की ताकत 

नए कानून में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से अमेरिका आने वाले सामान पर 500% तक का ट्रेड टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रावधान भी है. यह नई टैरिफ अथॉरिटी पांच साल तक लागू रह सकती है.

पहले भी भारत पर लगाया जा चुका है टैरिफ

रूस से भारत की तेल खरीद को लेकर अमेरिका पहले भी सख्त रुख अपना चुका है. 2025 में ट्रंप प्रशासन ने रूस से तेस खरीदने को लेकर भारत पर 25% टैरिफ लगाया था, जिसे बाद में हटा लिया गया.अमेरिकी प्रशासन ने रूस पर प्रतिबंध लगाने की कोशिशें पहले भी की हैं. हालांकि, ईरान युद्ध के दौरान होमुर्ज (Strait of Hormuz) बंद होने के बाद तेल बाजार में आए संकट को देखते हुए ट्रंप प्रशासन ने रूसी तेल की बिक्री पर अस्थायी छूट भी दी थी.

नए बिल का भारत पर क्या होगा असर?

अमेरिकी सीनेट से बिल पास होने के बाद अब रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी दबाव बढ़ने की संभावना है. भारत के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर इस कानून के तहत कार्रवाई होती है, तो क्या नई टैरिफ नीति का असर भारतीय कारोबार और रूस से होने वाली तेल खरीद पर पड़ेगा. फिलहाल बिल में टॉप रूसी तेल खरीदार देशों के लिए 100% तक टैरिफ की सीमा रखी गई है.

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