बारिश का मौसम और तन्हाई का आलम, 26 साल पुरानी वो गजल, जो आज भी खामोश आशिकों का दर्द करती है बयां, गुलाम अली ने बनाया यादगार
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बारिश का मौसम और तन्हाई का आलम, 26 साल पुरानी वो गजल, जो आज भी खामोश आशिकों का दर्द करती है बयां, गुलाम अली ने बनाया यादगार
19 अगस्त 2026 को 08:42 am बजे

एक गजल, जो 26 साल बाद भी लोगों के जख्म हरे कर देती है. बारिश भरी शामों में गुलाम अली की आवाज़ में सजी 'हम को किसके गम ने मारा' आज भी अधूरे इश्क और तन्हाई का दर्द महसूस करने वालों की पहली पसंद बनी हुई है.
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