40 साल से ‘सीता’ की छवि में कैद दीपिका, आई तंग!

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40 साल से ‘सीता’ की छवि में कैद दीपिका, आई तंग!

01 सितंबर 2026 को 08:30 am बजे
40 साल से ‘सीता’ की छवि में कैद दीपिका, आई तंग!

करीब चार दशक से एक किरदार दीपिका चिखलिया की पहचान का सबसे बड़ा हिस्सा बना हुआ है. ये किरदार है ‘रामायण’ की सीता का. रामानंद सागर की 1987-88 में आई ‘रामायण’ में सीता का किरदार निभाकर दीपिका चिखलिया घर-घर में पहचानी जाने लगी थीं. 

लोगों ने उन्हें खूब प्यार और सम्मान दिया. लेकिन इस एक किरदार की लोकप्रियता ने उनके करियर की दिशा भी काफी हद तक तय कर दी. आज दीपिका चिखलिया सीता की पहचान से दूर भागना नहीं चाहतीं, लेकिन वह चाहती हैं कि लोग उन्हें सिर्फ सीता के नाम से ही न जानें. 

अब उनकी नजर ऐसे मजबूत और दमदार किरदारों पर है, जिनसे उन्हें बतौर एक्टर कुछ नया करने और रचनात्मक संतुष्टि हासिल करने का मौका मिले. टाइम्स से बातचीत में दीपिका कहती हैं- मुझे लगता है कि हर कोई एक इमेज में फंस जाता है. लोकप्रियता के साथ ऐसा होता है. इसमें किसी की गलती नहीं है. आपको बस खुद को थोड़ा वक्त देना होता है और धीरे-धीरे लोग बदलाव को स्वीकार करने लगते हैं.

‘रामायण’ दीपिका के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट था, लेकिन इस शो से पहले वह फिल्मों में भी किस्मत आजमा रही थीं. हालांकि पहली फिल्म के बाद ही उन्हें समझ आ गया था कि फिल्म इंडस्ट्री में जिस तरह के ग्लैमर से उन्हें गुजरना पड़ रहा था, वह उनके लिए नहीं था.

वह पुरानी बात याद करते हुए कहती हैं- मैंने फिल्मों से शुरुआत की थी, लेकिन पहली फिल्म करने के बाद मुझे एहसास हुआ कि मैं लोगों के मेरे लिए सीटी मारने से सहज नहीं थी. वो चाहते थे कि मैं स्विमिंग कॉस्ट्यूम पहनूं और ग्लैमरस रोल करूं, लेकिन मेरी इसमें कोई दिलचस्पी नहीं थी.

'मैं हमेशा प्रार्थना करती थी कि मुझे ऐसा काम मिले जिससे मुझे सम्मान मिले. चीजें अपने आप जादुई तरीके से सही जगह बैठती गईं और ‘रामायण’ हो गया. अगर मैंने सीता का किरदार नहीं निभाया होता तो शायद मैं 80 के दशक के आखिर और 90 के दशक की शुरुआत की एक और हीरोइन होती और मेरा करियर बिल्कुल अलग होता.'

सीता ने उन्हें जो पहचान दी, दीपिका आज भी उसे बेहद खास मानती हैं. लेकिन अब वह चाहती हैं कि इस पहचान के साथ उनके काम की एक नई और बड़ी रेंज भी दिखाई दे. दीपिका साफ कहती हैं कि वह अभी रिटायर होने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं. उनका कहना है- जब तक मुझे कुछ मायने रखने वाला काम नहीं मिलता, मैं इसे खत्म नहीं करने वाली. मुझे मजबूत और दमदार किरदार चाहिए. मैं एक अच्छी एक्टर हूं, बस मुझे एक मौका दीजिए.

उनका मानना है कि आज के दौर में 50 से 70 साल की उम्र की एक्ट्रेस के लिए पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा मौके हैं. ऐसे में उन्हें सिर्फ मां या दादी के किरदारों तक सीमित करना सही नहीं है. वह कहती हैं- आज 50 से 70 साल की एक्ट्रेस के लिए बहुत सारे मौके हैं. हम सिर्फ मां और दादी का किरदार निभाने से कहीं ज्यादा कर सकती हैं.

दीपिका खुद भी बदलते वक्त के साथ कदम मिलाने की कोशिश कर रही हैं. वह कहती हैं- मैं धीरे-धीरे आज के समय के हिसाब से खुद को ढाल रही हूं. मैं बस चाहती हूं कि फिल्ममेकर भी मुझे अलग नजर से देखें.दीपिका कहती हैं- दुर्भाग्य से हमें ऐसा काम ऑफर नहीं किया जाता जो कलाकार के तौर पर संतुष्टि दे. इंडस्ट्री के लोग एक्सपेरिमेंट कर रहे हैं और मुझे उम्मीद है कि अब वे मेरे साथ भी एक्सपेरिमेंट करना शुरू करेंगे.

दीपिका चिखलिया अब फिल्मों और OTT पर ज्यादा ध्यान देना चाहती हैं.  वो बोलीं- मैं फिल्मों और OTT पर फोकस करना चाहती हूं. मुझे नहीं लगता कि अब मैं टीवी कर सकती हूं, क्योंकि यह बहुत ज्यादा समय लेता है. मुझे टीवी में अच्छे ऑफर मिले हैं, लेकिन महीने में 22 दिन और हर दिन 14 घंटे काम करना मेरे लिए ठीक नहीं है. मैंने कभी पैसे के लिए काम नहीं किया.

दीपिका की सबसे बड़ी चिंता यही है कि कहीं उनके करियर का सार सिर्फ ‘सीता’ बनकर न रह जाए. वह कहती हैं- मैं अपने करियर के अंत में यह महसूस नहीं करना चाहती कि मैंने सिर्फ एक किरदार निभाया और मेरी पूरी जिंदगी का सार वही बनकर रह गया. मैं इससे कहीं ज्यादा हूं.

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