सितंबर में खतरनाक हो सकता है मॉनसून! कई राज्यों के लिए बड़ा संकेत

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सितंबर में खतरनाक हो सकता है मॉनसून! कई राज्यों के लिए बड़ा संकेत

13 अगस्त 2026 को 08:28 am बजे
सितंबर में खतरनाक हो सकता है मॉनसून! कई राज्यों के लिए बड़ा संकेत

सितंबर में देश के कई हिस्सों में मॉनसून कमजोर पड़ सकता है. यूरोप के मौसम मॉडल ECMWF के ताजा अनुमान में महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों में सामान्य से कम बारिश होने का संकेत मिला है. यह अनुमान सितंबर के लिए जारी किया गया है. अगर ऐसा होता है तो खेती, जलाशयों और पानी की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है. हालांकि यह सिर्फ एक मौसम मॉडल का अनुमान है. मौसम की स्थिति बदलने पर इसमें बदलाव भी हो सकता है.

सितंबर दक्षिण-पश्चिम मॉनसून का आखिरी महीना होता है. इसी दौरान कई राज्यों में खरीफ फसलों को आखिरी दौर की बारिश मिलती है. ऐसे में अगर इस महीने बारिश सामान्य से कम रहती है तो किसानों की चिंता बढ़ सकती है. मौसम वैज्ञानिक भी लगातार नए आंकड़ों और अलग-अलग मॉडल के आधार पर मॉनसून की स्थिति पर नजर रख रहे हैं.

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हाल के दिनों में कई मौसम एजेंसियों ने भी मॉनसून के दूसरे हिस्से में बारिश कमजोर रहने की संभावना जताई है. मौसम विभाग (IMD) ने भी अगस्त और सितंबर में देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश रहने का अनुमान जारी किया है. ऐसे में अब सितंबर के मौसम पर सभी की नजर बनी हुई है.

ECMWF यानी यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट्स दुनिया के सबसे भरोसेमंद मौसम मॉडल में गिना जाता है. यह मॉडल सैटेलाइट, मौसम केंद्रों, समुद्र और हवा से मिले लाखों आंकड़ों का विश्लेषण करके मौसम का अनुमान तैयार करता है. इसके ताजा मॉडल में पश्चिम, मध्य और उत्तर भारत के कई हिस्सों को सबसे कम बारिश वाले वर्ग (Lowest Percentile Category) में रखा गया है. इसका मतलब है कि इन इलाकों में सामान्य से काफी कम बारिश होने की संभावना दिखाई गई है.

मॉडल के मुताबिक महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में सितंबर के दौरान सामान्य से कम बारिश हो सकती है. अगर ऐसा होता है तो खेतों में खड़ी खरीफ फसलों, जलाशयों के जल स्तर और पीने के पानी की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है.

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भारत में सालाना बारिश का करीब 70 फीसदी हिस्सा दक्षिण-पश्चिम मॉनसून से मिलता है. सितंबर मॉनसून का आखिरी महीना होता है और इसी समय धान, सोयाबीन, कपास, मक्का जैसी कई खरीफ फसलों को अच्छी बारिश की जरूरत होती है. अगर इस महीने बारिश कम होती है तो फसलों की पैदावार पर असर पड़ सकता है. कई राज्यों में बांध और जलाशय भी इसी बारिश पर निर्भर रहते हैं.

मौसम एक्सपर्ट्स का कहना है कि लंबे समय के मौसम मॉडल केवल संभावनाएं बताते हैं. जैसे-जैसे सितंबर करीब आएगा, नए मौसम सिस्टम और ताजा आंकड़ों के आधार पर अनुमान बदल भी सकते हैं. इसलिए फिलहाल इसे शुरुआती संकेत के तौर पर देखा जाना चाहिए. सितंबर के लिए अंतिम और ज्यादा सटीक तस्वीर आने वाले दिनों में IMD और दूसरी मौसम एजेंसियों के नए पूर्वानुमानों से साफ होगी.

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