पुलिस की रहती है ये डिमांड, जिसे पूरा करके बनता है लाठीचार्ज वाला डंडा!

राष्ट्रीय समाचार

पुलिस की रहती है ये डिमांड, जिसे पूरा करके बनता है लाठीचार्ज वाला डंडा!

12 अगस्त 2026 को 10:19 am बजे
पुलिस की रहती है ये डिमांड, जिसे पूरा करके बनता है लाठीचार्ज वाला डंडा!

रांची में विधानसभा घेराव कर रहे प्रदर्शनकारियों पर हुए पुलिस के लाठीचार्ज के बाद एक बार फिर पुलिस की लाठी चर्चा में है. 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा के बाहर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को हटाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया था. लेकिन, क्या आप जानते हैं पुलिस के हाथ में जो लाठी होती है, वो कोई नॉर्मल लाठी नहीं है. दरअसल, जब पुलिस इस लाठी के लिए टेंडर जारी करती है तो एक लंबी लिस्ट होती है, जिसे फॉलो करने के बाद इस लाठी को बनाया जाता है. कुछ वक्त पहले झारखंड  ऐसे में जानते हैं कि आखिर ये लाठी कितनी अलग है...

पहले पुलिस की ओर से बांस की लाठी का इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन अब पॉलीकार्बोनेट लाठी का इस्तेमाल किया जाता है. ये दिखने में प्लास्टिक के पाइप के जैसी लगती है. पुलिस की ओर से इसकी एक हाइट डिसाइड की गई है, जिसके हिसाब से इसे बनाया जाता है. इसे सिर्फ पुलिस के अलावा बीएसएफ, सीआईएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, एनएसजी और एसएसबी की ओर से भी इस्तेमाल की जाती है.

जब पुलिस इसका टेंडर जारी करती है तो इसकी हाइट, मैटेरियल आदि की लिस्ट भी जारी करती है. पुलिस की डिमांड के हिसाब से ये अल्ट्रा स्ट्रॉन्ग, स्क्रैच प्रूफ, जंग ना लगने वाली, फायर प्रूफ, ट्रांसपेरेंट और हाई इम्पैक्ट वाली होनी चाहिए. साथ ही पुलिस चाहती है कि इसकी लॉन्ग शेल्फ लाइफ भी होनी चाहिए. यानी ये 'प्लास्टिक की लाठी' कहने का मतलब कोई सामान्य प्लास्टिक का डंडा नहीं है.

पुलिस के अनुसार, ये करीब 1 मीटर लंबी होती है और इसका वजन 350 ग्राम तक होता है. इसका डाइमीटर 2.5 cm होता है और वॉल थिकनेस 4 एमएम होती है. साथ ही जहां से इस लकड़ी को पकड़ा जाता है, वो हिस्सा 5 इंच का होता है.ये भी टूटने वाला नहीं होता है. साथ ही इसकी ग्रिप सॉफ्ट होनी चाहिए ताकि लाठी पर पकड़ मजबूत रहे. वहीं, लाठी पर 6 इंच का रिस्ट बैंड होता है, जो कॉटन और नायलॉन से बना होता है. इसका मकसद लाठी को हाथ में सुरक्षित रखने में मदद करना है.

लाठी के नीचे वाले हिस्से में 2 इंच काफी खास होते हैं. लाठी के बॉटम के 2 इंच हिस्से पर एक रिंग लगी होती है, जो वाटरप्रूफ होती है.  ये हमेशा के लिए फीक्स रहती है.

जब पुलिस टेंडर जारी करती है तो इसे लचीली रखने की सलाह देती है. पुलिस के  अनुसार, बांस वाली लाठी ज्यादा रिजिड होती है और वाली लाठी फ्लेक्सिबल होती है. जब कोई टाइट डंडा यानी बांस वाला डंडा शरीर से टकराता है तो इम्पैक्ट एक एनर्जी पर जा सकती है. वहीं, फ्लैक्सिबल स्टिक टकराने पर थोड़ा बेंड होता है और इम्पैक्ट की कुछ एनर्जी को एब्जोर्ब करता है. दस्तावेज इसी वजह से फ्लैक्सिबल पाइप  को चोट की गंभीरता कम करने के लिहाज से बेहतर बताता है.

शेयर करें
हिंदी खबर नेटवर्क पर पढ़ें ताज़ा हिंदी समाचार।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Hyderabad News: 58 हजार करोड़ से बदलेगी मूसी नदी की सूरत, लंदन की टेम्स की तर्ज पर बनेगा रिवरफ्रंट

बॉक्स ऑफिस कलेक्शन: पहले दिन 100 करोड़ पार 'टॉक्सिक', शाहरुख और रणवीर सिंह की इन फिल्मों का तोड़ डाला रिकॉर्ड

Toxic Box Office Collection Day 1: यश की टॉक्सिक ने पहले दिन कमाए 140 करोड़, जवान और एनिमल को छोड़ा पीछे