दौड़ने का बढ़ता शौक कर ऐसे कर रहा कूल्हों को खराब

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दौड़ने का बढ़ता शौक कर ऐसे कर रहा कूल्हों को खराब

08 अगस्त 2026 को 08:44 am बजे
दौड़ने का बढ़ता शौक कर ऐसे कर रहा कूल्हों को खराब

दौड़ लगाना सेहत के लिहाज से बहुत ही अच्छा है. इससे शरीर फिट रहता है, वजन कम होता है ,लेकिन क्या दौड़ना सभी के लिए फायदेमंद है? यह सवाल इसलिए क्योंकि अब डॉक्टर एक दूसरी तस्वीर देख रहे हैं. एथलीटों को होने वाली कूल्हों  की एक समस्या ( फेमोरोएसेटाबुलर इम्पिंजमेंट) अब आम लोगों को भी हो रही है. देश के अस्पतालों में हड्डियों के डॉक्टरों के पास इस तरह के केस आ रहे हैं. इस समस्या वाले मरीजों में ऑपरेशन तक की जरूरत पड़ सकती है.

अब आपके मन में ये सवाल आ रहा होगा कि खिलाडियों को होने वाली फेमोरोएसेटाबुलर इम्पिंजमेंट ( FAI) की समस्या आम लोगों को क्यों हो रही है? इस बारे में डॉक्टरों का कहना है कि ऐसा रनिंग के बढ़ते ट्रेंड के कारण हो रहा है. .

दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर में डॉ. राहुल ग्रोवर भी इस बदलाव को देख रहे हैं. वह बताते हैं कि फेमोरोएसेटाबुलर इम्पिंजमेंट एथलीट्स में होने वाली जानी-पहचानी समस्या है. इसमें कूल्हों में दर्द होता है. चूंकि खिलाड़ी कई ऐसी एक्सरसाइज करते हैं जिससे कूल्हों पर प्रेशर पड़ता है तो उनको ये समस्या हो जाती है, लेकिन अब कुछ ऐसे लोग कूल्हे के दर्द की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं जो प्रोफेशनल खिलाड़ी नहीं हैं, लेकिन उन्होंने हाल के समय में रनिंग शुरू की है. इनमें से कुछ लोगों में जांच के दौरान फेमोरोएसेटाबुलर इम्पिंजमेंट यानी FAI की समस्या सामने आ रही है.

डॉ राहुल बताते हैं कि मान लीजिए किसी व्यक्ति ने सालों में कभी दौड़ ही नहीं लगाई. लेकिन अब उसने दोस्तों को देखकर वह कुछ महीने से रोज दौड़ लगा रहा है.कई बार वह तीन से 5 किलोमीटर तक दौड़ रहा है. यहीं गलती हो रही है. लोग बिना तैयारी और अपने शरीर की क्षमता को देखे दौड़ लगा रहे हैं, जबकि उन्होंने इसके लिए तैयारी या पर्याप्त प्रैक्टिस नहीं की होती है. ऐसे में अगर दौड़ लगाने वाले व्यक्ति को कूल्हे में पहले से FAI से जुड़ी बनावट मौजूद है तो रनिंग के दौरान उसके लक्षण सामने आ सकते हैं. ऐसा क्यों होता है ये जानने के लिए आपको कूल्हों के जोड़ को समझना जरूरी है.,

जांघ की सबसे बड़ी हड्डी का ऊपरी सिरा गोल होता है. यह कूल्हे की हड्डी में बने एक गोल खांचे के अंदर फिट रहता है. चलते, उठते-बैठते या दौड़ते समय यही जोड़ पैर को अलग-अलग दिशा में घुमाने में मदद करता है. फेमोरोएसेटाबुलर इम्पिंजमेंट में इस जोड़ की बनावट ऐसी होती है कि हड्डियों के बीच सामान्य से ज्यादा टकराव होने लगता है. परेशानी तब होती है जब पैर को बार-बार मोड़ने या घुमाने पर ये हिस्से एक-दूसरे से टकराते हैं. शुरुआत में व्यक्ति को इसका पता भी नहीं चलता. लेकिन बार-बार ऐसा होने पर जोड़ के अंदर मौजूद नरम परत को नुकसान पहुंच सकता है और दर्द शुरू हो सकता है. रनिंग के दौरान भी ये जोड़ आपस में टकराते हैं इससे ही कूल्हों में दर्द बढ़ता है.

डॉ राहुल कहते हैं कि यहां एक बात समझना बहुत जरूरी है कि सिर्फ दौड़ने या मैराथन में भाग लेने से किसी व्यक्ति को FAI हो जाएगी, यह कहना मेडिकल तौर पर सही नहीं है, क्योकि कई लोगों में कूल्हों की बनावट पहले से ही ऐसी होती है. वह नॉर्मल जिंदगी जीते हैं और उन्हें पता तक नहीं होता कि उनके हिप की बनावट थोड़ी अलग है. हां, ज्यादा एक्सरसाइजस करने या ज्यादा रनिंग करने से उनके लक्षण दूसरे लोगों की तुलना में पहले सामने आ सकते हैं.

रनिंग करना बिलकुल गलत नहीं है, बिना तैयारी दौड़ना समस्या बन सकता है

डॉ राहुल कहते हैं कि रनिंग सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद है. डॉक्टर भी इसकी सलाह देते हैं, लेकिन बिना वॉर्मअप, प्रैक्टिस और अच्छी डाइट के रोज दौड़ना शरीर में FAI की परेशानी अगर है तो उसको और बढ़ा सकता है. आज कई लोग रनिंग या मैराथन शुरू कर रहे हैं, लेकिन हर व्यक्ति को दौड़ने का सही तरीका पता हो, यह जरूरी नहीं है. शरीर की क्षमता से ज्यादा दौड़ना और सही तैयारी न करना चोट का कारण बन सकता है.

दिल्ली के अपोलो अस्पताल में ऑर्थोपेडिक, जॉइंट रिप्लेसमेंट और स्पाइन सर्जरी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. यश गुलाटी इस मामले में एक दूसरी जरूरी बात बताते हैं. उानका कहना है कि रनिंग शुरू करने वाले कुछ लोगों के जोड़ों में पहले से परेशानी हो सकती है. किसी में शुरुआती आर्थराइटिस हो सकता है तो किसी को पहले से कूल्हे या घुटने की समस्या हो सकती है, लेकिन सामान्य जिंदगी में उसका पता नहीं चलता है.

इसके बाद व्यक्ति अचानक रनिंग शुरू करता है. शरीर की फिटनेस को समझे बिना दूरी बढ़ाता जाता है और मैराथन तक पहुंच जाता है. ऐसे में पहले से मौजूद समस्या के लक्षण सामने आ सकते हैं. इसलिए समस्या मैराथन नहीं है. समस्या तब शुरू होती है जब व्यक्ति अपनी तैयारी और शरीर की स्थिति को पीछे छोड़कर दूरी के पीछे भागने लगता है.

डॉ. गुलाटी के मुताबिक दौड़ना शुरू करनेसे पहले कई बातों का ध्यान रखना जरूरी है. खासतौर पर अगर पहले से घुटने, कमर या कूल्हे में दर्द रहता है तो उसे नजरअंदाज करके लंबी दूरी की रनिंग शुरू नहीं करनी चाहिए. और यही बात इस समय महत्वपूर्ण है.

साकेत के मैक्स हॉस्पिटल में आर्थोपेडिक्स और स्पाइन सर्जरी विभाग में प्रिंसिपल डायरेक्टर डॉ भावुक गर्ग ने भी इस बारे में बताया है. वह कहते हैं कि फेमोरोएसेटाबुलर इम्पिंजमेंट खिलाडियों में होने वाली एक आम समस्या है. उनको ये  परेशानी होती रहती है, हालांकि आम लोगों में केस कम ही आते हैं, लेकिन उनमें भी ये परेशानी हो सकती है.

डॉ भावुक कहते हैं कि फिट रहने के कई तरीके हैं. आप साइकिल चला सकते हैं, स्वीमिंग कर सकते हैं. जहां तक बात दौड़ लगाने की है तो अगर रनिंग करते समय या इसके बाद आपको पैरों, घुटनों या कूल्हों में तेज दर्द महसूस होता है तो रनिंग से बचें. पहले डॉक्टर से सलाह लें और देंखें की आपको हड्डियों से संबंधित कोई समस्या तो नहीं है.

डॉ राहुल बताते  हैं कि जिन लोगों में कूल्हों में दर्द की समस्या हो जाती है और जांच में FAI का पता चलता है तो कुछ मामलों में ऑपरेशन की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन सफदरजंग अस्पताल में हम ऐसे मरीजों की बड़ी सर्जरी नहीं कर रहे हैं. न ही कूल्हों के जोड़ों को बदलने की जरूरत पड़ रही है. हम बेहतर तकनीक की मदद से मरीजों का इलाज कर रहे हैं. इसमें दूरबीन या आर्थ्रोस्कोपी की मदद से जोड़ों की जांच करते हैं. इसे आम भाषा में दूरबीन विधि से होने वाली सर्जरी या कीहोल सर्जरी कहा जाता है. इसमें  डॉक्टर स्किन पर बहुत छोटा चीरा लगाकर एक पतली ट्यूब डालते हैं, जिसके आगे लाइट और छोटा कैमरा लगा होता है. इससे कूल्हों के अंदर की स्थिति साफ दिखती है और बिना बड़ा चीरा लगाए इलाज किया जाता है.

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