डानुबे का पानी घटा, बिजली सप्लाई रुकी... हंगरी में एनर्जी क्राइसिस
डानुबे का पानी घटा, बिजली सप्लाई रुकी... हंगरी में एनर्जी क्राइसिस

हंगरी इस समय तेज गर्मी, सूखे और बिजली की कमी से जूझ रहा है. देश की सबसे बड़ी नदी डानुबे का पानी रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है. इसका असर सीधे देश के इकलौते न्यूक्लियर पावर प्लांट पर पड़ा है. यह प्लांट अपने रिएक्टरों को ठंडा रखने के लिए डानुबे नदी के पानी का इस्तेमाल करता है.
लेकिन अब पानी कम होने की वजह से बिजली बनाना मुश्किल हो गया है. इसलिए सरकार ने लोगों और कंपनियों से रोज शाम 5 बजे से रात 10 बजे तक कम बिजली इस्तेमाल करने की अपील की है. सरकार का कहना है कि लोग इस अपील का साथ भी दे रहे हैं और हर दिन अच्छी-खासी बिजली बच रही है.
यह भी पढ़ें: गर्मी बढ़ी, नदी सूखी और सामने आया 80 साल पुराना युद्धपोत
बुडापेस्ट में बुधवार और गुरुवार को तापमान 40 से 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है. लगातार पड़ रही गर्मी और सूखे की वजह से डानुबे नदी का पानी तेजी से घटा है. हालात ऐसे हैं कि कई जगह नदी के बीच रेत दिखाई देने लगी है. वहां रहने वाले लोगों का कहना है कि उन्होंने पहले कभी ऐसा नहीं देखा. उनका मानना है कि अब क्लाइमेट चेंज का असर साफ नजर आने लगा है.
हंगरी का इकलौता न्यूक्लियर पावर प्लांट देश की बिजली का बड़ा हिस्सा देता है. लेकिन इसे चलाने के लिए नदी का पानी जरूरी है. पानी कम होने की वजह से प्लांट को अपना उत्पादन काफी घटाना पड़ा है. जानकारी के मुताबिक, यह आने वाले कई हफ्तों तक अपनी पूरी क्षमता के सिर्फ 10 फीसदी से थोड़ा ज्यादा बिजली ही बना पाएगा. इसी वजह से हंगरी को दूसरे देशों से ज्यादा बिजली खरीदनी पड़ रही है.
सरकार ने बताया कि शाम 5 बजे से रात 10 बजे के बीच बिजली की सबसे ज्यादा जरूरत होती है. इसलिए लोगों से इसी समय बिजली कम इस्तेमाल करने की अपील की गई है. इसका असर भी दिख रहा है. सरकार के मुताबिक, हर दिन 600 से 700 मेगावाट तक बिजली बचाई जा रही है.
यह भी पढ़ें: जंगल की आग के बाद फ्रांस में मिला वर्ल्ड वॉर-2 का 400 से ज्यादा गोला-बारूद
प्रधानमंत्री पीटर माज्यार ने बताया कि 837 छोटे, मध्यम और बड़े उद्योगों ने अपनी बिजली की खपत कम की है. वहीं सरकारी रेलवे ने भी शाम के समय मालगाड़ियों का संचालन रोक दिया है. इससे हर दिन 60 से 90 मेगावाट तक बिजली बच रही है. बुडापेस्ट की कई मशहूर इमारतों की सजावटी लाइटें भी फिलहाल बंद कर दी गई हैं.
सरकार का कहना है कि सिर्फ उद्योग ही नहीं, आम लोग भी बिजली बचा रहे हैं. कई परिवार एसी कम चला रहे हैं और सिर्फ जरूरी बिजली के सामान का ही इस्तेमाल कर रहे हैं. ऊर्जा एक्सपर्ट्स के मुताबिक, 600 मेगावाट बिजली की बचत करीब 10 लाख सामान्य एयर कंडीशनर बंद करने के बराबर है.
ऑरगेनाइजेशन फॉर इकनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (OECD) ने हाल ही में कहा था कि हंगरी में सूखा और बाढ़ जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. इससे खेती, सड़क, बिजली और दूसरे जरूरी कामों पर असर पड़ सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले समय में क्लाइमेट चेंज की वजह से ऐसे हालात और बढ़ सकते हैं.
हंगरी का यह मामला दिखाता है कि अगर नदियों का पानी कम होता है तो उसका असर सिर्फ पानी की कमी तक सीमित नहीं रहता. बिजली, खेती, उद्योग और आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी भी इससे प्रभावित होती है. इसलिए एक्सपर्ट पानी और बिजली दोनों का सोच-समझकर इस्तेमाल करने की सलाह दे रहे हैं.
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें