पहलवानों के आरोपों पर आज कोर्ट का फैसला, बृजभूषण केस पर सबकी नजर

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पहलवानों के आरोपों पर आज कोर्ट का फैसला, बृजभूषण केस पर सबकी नजर

03 अगस्त 2026 को 09:32 am बजे
पहलवानों के आरोपों पर आज कोर्ट का फैसला, बृजभूषण केस पर सबकी नजर

देश की कई दिग्गज महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े चर्चित मामले में आज बड़ा फैसला आने वाला है. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार पूर्व भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) अध्यक्ष और पूर्व बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह तथा सह-आरोपी विनोद तोमर के खिलाफ अपना फैसला सुनाएंगे. अदालत ने 2 जुलाई को दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था.

यह मामला जनवरी 2023 में उस समय सुर्खियों में आया, जब ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक, बजरंग पुनिया और विनेश फोगाट समेत कई पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न और पद के दुरुपयोग के आरोप लगाते हुए दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना शुरू किया. सरकार के आश्वासन के बाद प्रदर्शन कुछ समय के लिए खत्म हुआ, लेकिन अप्रैल 2023 में कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए पहलवान फिर आंदोलन पर बैठ गए.

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बाद में पहलवान सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज कीं. इनमें सात महिला पहलवानों की शिकायतें शामिल थीं, जिनमें एक नाबालिग भी थी. हालांकि, नाबालिग से जुड़ा पॉक्सो मामला बाद में वापस ले लिया गया और वह केस बंद हो गया.

बृजभूषण सिंह के मामले में अदालत ने पहले ही तय किए आरोप

मौजूदा मामले में बृजभूषण शरण सिंह पर भारतीय दंड संहिता की धारा 354, 354A, 354D, 506 और 34 के तहत आरोप तय किए गए हैं. इन धाराओं में महिला की मर्यादा भंग करने, यौन उत्पीड़न, पीछा करने और आपराधिक धमकी जैसे आरोप शामिल हैं. वहीं, विनोद तोमर पर एक शिकायतकर्ता को कथित तौर पर धमकी देने का आरोप है. दोष सिद्ध होने पर बृजभूषण को अधिकतम 5 साल और तोमर को 2 साल तक की सजा हो सकती है.

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सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि बृजभूषण ने कई मौकों पर उनके साथ अनुचित व्यवहार किया, जिससे उनके खेल और मानसिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ा. दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि शिकायतकर्ताओं के बयानों में कई विरोधाभास हैं. बचाव पक्ष ने यह भी दावा किया कि कुछ कथित घटनाओं के समय बृजभूषण संबंधित स्थानों पर मौजूद ही नहीं थे और शिकायतें कई साल बाद दर्ज कराई गईं.

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