क्या सच में आएगी महाप्रलय? नंदी की ये मूर्ति है कलयुग के अंत का संकेत

राजनीति

क्या सच में आएगी महाप्रलय? नंदी की ये मूर्ति है कलयुग के अंत का संकेत

04 अगस्त 2026 को 08:49 am बजे
क्या सच में आएगी महाप्रलय? नंदी की ये मूर्ति है कलयुग के अंत का संकेत

Hindu Dharam: कलयुग के अंत को लेकर आपने कई तरह की बातें सुनी होंगी. लेकिन क्या आप जानते हैं कि नंदी देव की एक ऐसी मूर्ति है, जिसे इस संसार में महाप्रलय का कारण माना जाता है? आखिर क्या है इसके पीछे का रहस्य, आइए जानते हैं. भगवान शिव के वाहन नंदी देव को लेकर यह मान्यता है कि वे कलयुग में आने वाली महाप्रलय की चेतावनी दे रहे हैं. जी हां, आपने बिल्कुल सही सुना. कहा जाता है कि नंदी देव कई वर्षों से प्रलय के संकेत दे रहे हैं. लेकिन सवाल यह है कि यह कैसे और कहां हो रहा है?

दरअसल, आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में स्थित उमा महेश्वरी मंदिर में नंदी देव की एक चमत्कारी मूर्ति है. इस मूर्ति की खास बात यह है कि इसका आकार लगातार बढ़ता जा रहा है. मान्यता के अनुसार, हर 20 वर्षों में इस मूर्ति का आकार लगभग एक इंच बढ़ जाता है. पहले इस प्रतिमा का आकार इतना छोटा था कि लोग आसानी से इसकी परिक्रमा कर लेते थे. लेकिन अब यह इतना बड़ा हो चुका है कि मंदिर परिसर भी इसके लिए छोटा पड़ने लगा है. इतना ही नहीं, इसके बढ़ते आकार के कारण मंदिर के स्तंभों में भी दरारें आने लगी हैं.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलयुग में एक दिन ऐसा आएगा जब यह नंदी की मूर्ति जीवित हो जाएगी और नंदी देव स्वयं प्रकट होंगे. कहा जाता है कि वह दिन कलयुग का अंतिम दिन होगा और उसी समय महाप्रलय आएगी. हालांकि, यह कब होगा, इसकी कोई निश्चित जानकारी नहीं है. वैज्ञानिकों ने भी इस मूर्ति पर कई बार शोध किया है. उनके अनुसार, यह मूर्ति एक विशेष प्रकार के पत्थर से बनी है, जो समय के साथ फैलता रहता है. यही कारण है कि इसका आकार धीरे-धीरे बढ़ रहा है.

इसके अलावा, इस मंदिर से जुड़ी एक और रोचक बात है. मंदिर परिसर में एक छोटा तालाब है, जिसे पुष्करणी कुंड कहा जाता है. मान्यता है कि इस कुंड में नंदी जी के मुख से लगातार जल गिरता रहता है. लेकिन आज तक कोई यह नहीं जान पाया कि यह पानी आता कहां से आता है. वैज्ञानिक भी इस रहस्य को सुलझा नहीं पाए हैं. यह भी कहा जाता है कि ऋषि अगस्त्य ने इसी कुंड में स्नान करने के बाद भगवान शिव की पूजा की थी और यहीं नंदी जी की स्थापना की गई थी.

एक और आश्चर्यजनक बात यह है कि इस मंदिर परिसर में कभी कौवे नहीं दिखाई देते हैं. अन्य सभी पक्षी यहां आते हैं, लेकिन कौवे नहीं. मान्यता के अनुसार, जब ऋषि अगस्त्य यहां तपस्या कर रहे थे, तब कौवों ने उनकी साधना में बाधा डाली थी. इससे क्रोधित होकर उन्होंने कौवों को श्राप दिया कि वे इस मंदिर परिसर में कभी प्रवेश नहीं कर पाएंगे.

केवल नंदी जी की यह मूर्ति ही नहीं, बल्कि एक और शिवलिंग भी है, जिसे कलयुग के अंत का संकेत माना जाता है. यह शिवलिंग गुजरात के मृदेश्वर मंदिर में स्थित है. मान्यता है कि इस शिवलिंग का आकार भी लगातार बढ़ रहा है और यह बढ़ते पापों का संकेत है. कहा जाता है कि जिस दिन यह शिवलिंग 80 फीट ऊंचा होकर मंदिर की छत को छू लेगा, उस दिन कलयुग अपने अंतिम चरण में होगा. हालांकि, यदि इसकी वृद्धि की गति को देखा जाए, तो यह हर साल केवल चावल के दाने जितना बढ़ता है. ऐसे में इसे 80 फीट तक पहुंचने में अभी लाखों साल लग सकते हैं.

इस शिवलिंग की एक और खास बात यह है कि इसमें से लगातार जलधारा निकलती रहती है. हैरानी की बात यह है कि इस जलधारा पर मौसम का कोई प्रभाव नहीं पड़ता, चाहे गर्मी हो या सर्दी. वैज्ञानिक भी इसके पीछे का कारण आज तक नहीं जान पाए हैं.

शेयर करें
हिंदी खबर नेटवर्क पर पढ़ें ताज़ा हिंदी समाचार।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Hyderabad News: 58 हजार करोड़ से बदलेगी मूसी नदी की सूरत, लंदन की टेम्स की तर्ज पर बनेगा रिवरफ्रंट

बॉक्स ऑफिस कलेक्शन: पहले दिन 100 करोड़ पार 'टॉक्सिक', शाहरुख और रणवीर सिंह की इन फिल्मों का तोड़ डाला रिकॉर्ड

Toxic Box Office Collection Day 1: यश की टॉक्सिक ने पहले दिन कमाए 140 करोड़, जवान और एनिमल को छोड़ा पीछे