मक्का पैक्ट में इस मुल्क की एंट्री पर सऊदी ने लगाया वीटो, सामने आई बड़ी वजह

राजनीति

मक्का पैक्ट में इस मुल्क की एंट्री पर सऊदी ने लगाया वीटो, सामने आई बड़ी वजह

12 अगस्त 2026 को 09:34 am बजे
मक्का पैक्ट में इस मुल्क की एंट्री पर सऊदी ने लगाया वीटो, सामने आई बड़ी वजह

सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच पिछले हफ्ते हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. चर्चा से परिचित सऊदी के तीन सूत्रों के मुताबिक, रियाद ने इस रक्षा गठजोड़ में मिस्र को शामिल करने का विरोध किया था. सऊदी शाही परिवार के करीबी और पूर्व वरिष्ठ सलाहकार के हवाले से कहा गया है कि कम से कम सऊदी अरब फिलहाल मिस्र को इस समझौते का हिस्सा नहीं बनाना चाहता.

7 अगस्त को मक्का में हुए समझौते के तहत सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने माना है कि तीनों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला, सभी पर हमला माना जाएगा. हालांकि, समझौते में यह साफ नहीं किया गया है कि संकट की स्थिति में सैन्य मदद किस तरह दी जाएगी और ऑपरेशनल स्तर पर यह व्यवस्था कैसे लागू होगी.

यह भी पढ़ें: सऊदी और पाकिस्तान संग रक्षा समझौते पर तोड़ी चुप्पी, तुर्की के मंत्री ने बताई पूरी बात

मिडिल ईस्ट आई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब की नाराजगी मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल सिसी की सरकार के रुख को लेकर बढ़ी है. सऊदी पक्ष को लगता है कि अहम क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों पर मिस्र ने उसे अपेक्षित समर्थन नहीं दिया. यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ लंबे संघर्ष में मिस्र की सीमित भूमिका और ईरान के खिलाफ हालिया युद्ध के दौरान उसके रुख को लेकर भी सऊदी निराश बताया जा रहा है.

एक पूर्व सऊदी सलाहकार ने आरोप लगाया कि मिस्र लंबे समय से सऊदी, अमेरिका और दूसरी बाहरी ताकतों पर निर्भर रहा है, लेकिन बदले में उतना सहयोग नहीं देता.

मिस्र को बाहर रखने के फैसले पर तुर्की का रुख अलग बताया जा रहा है. तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा था कि काहिरा, अंकारा का स्वाभाविक साझेदार है और तकनीकी मुद्दे सुलझने के बाद भविष्य में इस गठजोड़ का हिस्सा बन सकता है. तुर्की के सूत्रों के मुताबिक, अंकारा ने मिस्र को शामिल कराने की कोशिश भी की थी.

यह भी पढ़ें: हूतियों ने फिर दिखाई ताकत, सऊदी की सबसे बड़ी रिफाइनरी अरामको पर दनादन दागे ड्रोन

हालांकि, सऊदी सूत्रों का मानना है कि तुर्की और पाकिस्तान इस गठजोड़ को मिस्र की तुलना में ज्यादा सैन्य क्षमता दे सकते हैं. तुर्की का रक्षा उद्योग तेजी से बढ़ा है, जबकि पाकिस्तान के पास बड़ी स्थायी सेना और स्थापित रक्षा उत्पादन क्षमता है.

रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि मिस्र को लेकर सऊदी का मौजूदा रुख स्थायी फैसला नहीं है. भविष्य में काहिरा को शामिल करने का रास्ता खुला रह सकता है, लेकिन फिलहाल रियाद चाहता है कि मक्का रक्षा समझौते की संरचना तीन देशों तक ही सीमित रहे. यह फैसला ऐसे समय हुआ है जब चारों देश जून में क्षेत्रीय मुद्दों पर साथ बैठक कर चुके हैं.

शेयर करें
हिंदी खबर नेटवर्क पर पढ़ें ताज़ा हिंदी समाचार।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Hyderabad News: 58 हजार करोड़ से बदलेगी मूसी नदी की सूरत, लंदन की टेम्स की तर्ज पर बनेगा रिवरफ्रंट

बॉक्स ऑफिस कलेक्शन: पहले दिन 100 करोड़ पार 'टॉक्सिक', शाहरुख और रणवीर सिंह की इन फिल्मों का तोड़ डाला रिकॉर्ड

Toxic Box Office Collection Day 1: यश की टॉक्सिक ने पहले दिन कमाए 140 करोड़, जवान और एनिमल को छोड़ा पीछे