पानी पिलाने में कोई बुराई नहीं... अजिंक्य रहाणे का छलका दर्द

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पानी पिलाने में कोई बुराई नहीं... अजिंक्य रहाणे का छलका दर्द

07 अगस्त 2026 को 11:19 am बजे
पानी पिलाने में कोई बुराई नहीं... अजिंक्य रहाणे का छलका दर्द

टीम इंडिया के पूर्व बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे ने अपने करियर के उस मुश्किल दौर को याद किया है, जब टेस्ट स्क्वॉड में जगह मिलने के बावजूद उन्हें प्लेइंग इलेवन में मौका नहीं मिल रहा था. 38 वर्षीय रहाणे को टेस्ट डेब्यू के लिए करीब दो साल और 20 मैचों का इंतजार करना पड़ा. इस दौरान वह लगातार टीम के साथ रहे और ज्यादातर समय 12वें खिलाड़ी की भूमिका निभाई.

अजिंक्य रहाणे ने स्वीकार किया कि वह दौर उनके लिए आसान नहीं था. हालांकि उन्होंने निराश होने या सहानुभूति हासिल करने के बजाय इसे खुद को बेहतर बनाने के मौके के रूप में देखा. उनका मानना है कि उसी इंतजार ने उनके रवैये और मानसिकता को मजबूत किया, जिसका फायदा उन्हें आगे लंबे टेस्ट करियर में मिला.

अजिंक्य रहाणे ने अगस्त 2011 में भारत के लिए लिमिटेड ओवर्स क्रिकेट में इंटरनेशनल डेब्यू किया था. इसके बाद उन्हें टेस्ट टीम के साथ भी रखा जाने लगा, लेकिन प्लेइंग इलेवन का दरवाजा तुरंत नहीं खुला. अपने यूट्यूब चैनल पर रहाणे ने उस दौर को याद करते हुए कहा, 'शुरुआती दो साल, जब मैं 2011 में पहली बार टीम में आया था, मेरे लिए काफी चुनौतीपूर्ण थे. मुझे टेस्ट डेब्यू के लिए 20 मैचों का इंतजार करना पड़ा और दो साल तक मैं 12वां खिलाड़ी रहा.'

लगातार प्लेइंग इलेवन से बाहर रहने पर किसी भी युवा खिलाड़ी का निराश होना स्वाभाविक है. अजिंक्य रहाणे के मुताबिक, उस समय उनके सामने दो विकल्प थे. पहला, अपनी स्थिति को लेकर लोगों से सहानुभूति हासिल करना और दूसरा, इस समय का इस्तेमाल खुद को बेहतर बनाने में करना. उन्होंने कहा, "मेरे सामने दो विकल्प थे. या तो मैं सहानुभूति हासिल करता या फिर खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करता. 12वां खिलाड़ी होने, पानी पिलाने या अपने साथी खिलाड़ियों की मदद करने में कुछ भी गलत नहीं है. मैंने इसे सकारात्मक तरीके से लिया.'यह भी पढ़ें: 'सीनियर खिलाड़ियों को सम्मान और भरोसा मिलना चाहिए, अजिंक्य रहाणे का बड़ा बयान, क्या गौतम गंभीर पर साधा न‍िशाना

अजिंक्य रहाणे ने 12वें खिलाड़ी की भूमिका को सिर्फ इंतजार के तौर पर नहीं देखा. वह मैदान और ड्रेसिंग रूम में सीनियर खिलाड़ियों को करीब से देखते और उनसे सीखने की कोशिश करते थे. उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों को ऑब्जर्व करने से उनकी सोच और क्रिकेट के प्रति नजरिया बदला. रहाणे का मानना है कि इस अनुभव ने आगे चलकर उन्हें लंबे समय तक भारत के लिए खेलने में मदद की.

रहाणे के करियर का 'लोकल ट्रेन कनेक्शन' अजिंक्य रहाणे ने अपने करियर में धैर्य विकसित होने का एक दिलचस्प किस्सा भी बताया. उन्होंने इसका कनेक्शन मुंबई की लोकल ट्रेन से जोड़ा. रहाणे ने कहा, 'मैं यह नहीं कहूंगा कि शुरुआत से ही मेरे अंदर इतना धैर्य था. जब आप मुंबई की लोकल ट्रेन में सफर करते हैं तो वह चुनौतीपूर्ण होता है. कहीं न कहीं वहीं से आपके अंदर धैर्य विकसित होने लगता है.'यह भी पढ़ें: 'CAP नंबर 278 साइनिंग ऑफ...' मेलबर्न का हीरो, लॉर्ड्स का शतकवीर और करोड़ों दिलों का चैम्पियन

घरेलू क्रिकेट में लगातार रन बनाने के बाद अजिंक्य रहाणे को भी भारतीय टीम में जगह मिलने की उम्मीद रहती थी. उनके मुताबिक, अच्छा प्रदर्शन करने पर स्वाभाविक रूप से खिलाड़ी सोचने लगता है कि अब उसका नाम टीम इंडिया के लिए आना चाहिए. रहाणे ने बताया कि कुछ सीनियर क्रिकेटरों से बातचीत के बाद उन्होंने चयन को लेकर जरूरत से ज्यादा सोचने के बजाय उन चीजों पर ध्यान देना शुरू किया, जो उनके नियंत्रण में थीं.

उन्होंने कहा, 'समय के साथ मुझे एहसास हुआ कि जब होना होगा, तब होगा. जो आपके नियंत्रण में है, आप वही कर सकते हैं. अगर आपको लंबे समय तक खेलना है तो धैर्य बहुत जरूरी है.'

अजिंक्य रहाणे का यह इंतजार आखिरकार मार्च 2013 में खत्म हुआ, जब उन्हें टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू करने का मौका मिला. इसके बाद वह लंबे समय तक भारतीय टेस्ट टीम के मध्यक्रम का अहम हिस्सा रहे. रहाणे ने भारत के लिए 85 टेस्ट की 144 पारियों में 5,077 रन बनाए. उनका औसत 38.46 रहा और उनके बल्ले से 12 शतक के अलावा 26 अर्धशतक निकले.

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