Meta पर ₹5000 करोड़ का जुर्माना, इस नियम के तहत सुनाया फैसला

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Meta पर ₹5000 करोड़ का जुर्माना, इस नियम के तहत सुनाया फैसला

07 अगस्त 2026 को 07:05 am बजे
Meta पर ₹5000 करोड़ का जुर्माना, इस नियम के तहत सुनाया फैसला

Meta को एक बड़ा झटका लगा है और कोर्ट ने कंपनी पर भारी जुर्माना भी लगाया है. न्यू मैक्सिको की एक कोर्ट ने मेटा के खिलाफ फैसला सुनाया और भारी जुर्माना भरने का ऑर्डर दिया है. कोर्ट ने कहा है कि मेटा अपने प्लेटफॉर्म से युवाओं को नुकसान पहुंचा रहा था, जिसकी अब भरपाई करनी होगी.

इंस्टाग्राम और फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा अब अपने प्लेटफॉर्म की वजह से युवाओं को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए  567 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब ₹5,000 करोड़) के जुर्माने का ऑर्डर दिया है. कोर्ट ने यह ऑर्डर उस केस के दूसरे चरण में दिया गया है, जिसमें मार्च में Meta हार चुकी है. कोर्ट ने इस फैसले के पीछे अमेरिकी कानून COPPA का हवाला दिया है.

अदालत ने कहा कि अमेरिका का चिल्ड्रन ऑनलाइन प्राइवेसी प्रोटेक्शन एक्ट (COPPA) बच्चों की ऑनलाइन गोपनीयता की सुरक्षा करता है. यह कानून Meta को 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से उम्र सत्यापित करने के लिए पर्सनल जानकारी मांगने या उनकी ऑनलाइन गतिविधियों को ट्रैक करने की अनुमति नहीं देता.

गुरुवार देर रात जारी फैसले में जज ब्रायन बीडशाइड ने कहा कि इस रकम का बड़ा हिस्सा युवाओं के इलाज और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च किया जाएगा, जो रकम करीब 42 करोड़ डॉलर (420 मिलियन डॉलर) रुपये होगी. बाकी की रकम आने वाले अगले पांच साल में  जागरूकता और रोकथाम कार्यक्रमों, स्क्रीनिंग सेवाओं तथा अन्य संबंधित खर्चों पर इस्तेमाल होगी.

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मेटा के प्लेटफॉर्म बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रहे हैं

केस के पहले चरण में Meta पर 37.5 करोड़ डॉलर (375 मिलियन डॉलर) का सिविल जुर्माना लगाया था. कोर्ट ने माना कि कंपनी को यह जानकारी थी कि उसके प्लेटफॉर्म बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रहे हैं. साथ ही प्लेटफॉर्म ने  बच्चों के यौन शोषण से संबंधित जानकारी को छुपाने का काम किया.

Meta के प्लेटफॉर्म में बड़े बदलाव लागू करने की मांग

अभियोजन पक्ष ने अदालत से Meta के प्लेटफॉर्म में बड़े बदलाव लागू करने की मांग की थी. इन प्लेटफॉर्म की लत लगाने वाली सुविधाओं पर कंट्रोल, उम्र वेरिफिकेशन को बेहतर बनाना और डिफॉल्ट प्राइवेसी सेटिंग्स व कड़ी निगरानी के जरिए बच्चों के यौन शोषण को रोकने जैसे उपाय करने शामिल हैं.

अदालत ने यह भी कहा कि यदि केवल Meta को ही बच्चों की उम्र सत्यापित करने का आदेश दिया जाए और अन्य सोशल मीडिया कंपनियों पर ऐसी बाध्यता न हो, तो यह कंपनी के साथ गलत और नुकसानदेह होगा.

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