NCLT में सुभाष चंद्रा मामले पर दोबारा सुनवाई, जानिए कहां फंसा पेंच

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NCLT में सुभाष चंद्रा मामले पर दोबारा सुनवाई, जानिए कहां फंसा पेंच

01 सितंबर 2026 को 09:48 am बजे
NCLT में सुभाष चंद्रा मामले पर दोबारा सुनवाई, जानिए कहां फंसा पेंच

मीडिया कारोबारी सुभाष चंद्रा के खिलाफ व्यक्तिगत दिवालियापन के मामले को सोमवार को NCLT की एक पीठ ने ट्रिब्यूनल चेयरपर्सन के पास नए सिरे से सुनवाई के लिए भेजा है. दरअसल, 22,000 करोड़ रुपये से अधिक के अप्रूव्ड क्लेम के मुकाबले प्रस्तावित 6.5 करोड़ रुपये की रीपेमेंट योजना पर बहुमत सहमति नहीं बनने के कारण पीठ ने ये फैसला लिया है. यानी इंसॉल्वेंसी कानून के तहत उन्हें मिले 99.97% 'हेयरकट' मामले में अब NCLT में दोबारा सुनवाई होगी.

कर्ज देने वाले सहमत नहीं बिजनेस टुडे पर छपी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, Subhash Chandra मामले में रीपेमेंट प्लान में 99.97% की भारी कटौती (हेयरकट) का प्रस्ताव है. इस प्लान को मंजूरी देने वाले तीसरे सदस्य के आदेश को चुनौती देते हुए लेंडर्स ने अपीलीय ट्रिब्यूनल NCLAT का रुख किया है. इससे पहले न्यायिक सदस्य अशोक कुमार भारद्वाज और टेक्निकल मेंबर रीना सिन्हा पुरी की दो सदस्यीय पीठ द्वारा रीपेमेंट प्लान पर फैसला सुनाए जाने के बाद इसे तीसरे सदस्य के पास भेजा गया था. जहां से बीते 26 अगस्त को दिए आदेश में कुल देनदारी पर 6.5 करोड़ रुपये की रीपेमेंट योजना का समर्थन किया गया था.

फिर NCLT चेयरमैन के पास मामला सुभाष चंद्रा के असंतुष्ट लेंडर्स ने एनसीएलएटी में याचिका दायर की थी, जो तीसरे सदस्य के उस आदेश पर आधारित थी, जिसमें एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन द्वारा अपने व्यक्तिगत दिवालियापन समाधान प्रक्रिया में लगभग 22,006.57 करोड़ रुपये के लेनदारों के दावों के मुकाबले 6.5 करोड़ रुपये के भुगतान को मंजूरी दी गई थी. अशोक कुमार भारद्वाज और रीना सिन्हा पुरी की पीठ ने इसे लेकर सोमवार को कहा कि ट्रिब्यूनल के तीसरे सदस्य की अलग राय के बाद मामले पर पुनर्विचार करने के बावजूद कोई बहुमत राय सामने नहीं आई है, जिसके चलते इस मामले को NCLT चेयरमैन के पास वापस भेज दिया गया.

रिपोर्ट के मुताबिक, तीसरे सदस्य शरद कुमार शर्मा ने रीपेमेंट प्लान को अनुमोदित तो कर दिया, लेकिन संहिता की धारा 115(1) को समान रूप से लागू करके सभी लेनदारों के अधिकार को समाप्त कर दिया है. अशोक कुमार भारद्वाज और रीना सिन्हा पुरी की पीठ ने कहा है कि तीसरे सदस्य ने जानबूझकर स्वतंत्र आदेश पारित किया है, इसलिए कोई बहुमत राय सामने नहीं आई और इस स्तर पर कोई आदेश पारित नहीं किया जा सकता है.

आज होगी मामले की सुनवाई! LIC हाउसिंग फाइनेंस की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कार्यवाहक अध्यक्ष योगेश खन्ना की अध्यक्षता वाली NCLT पीठ के सामने इस मामले का जिक्र किया और दिन के दूसरे भाग में तत्काल सुनवाई की मांग की. Canara Bank और Union Bank का प्रतिनिधित्व कर रहे तुषार मेहता ने कहा कि आदेश को जारी रखने की अनुमति देना दिवालियापन और दिवालिया संहिता के मूल उद्देश्य को ही विफल करने वाला है. बता दें कि राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLT) ने मामले की सुनवाई मंगलवार को करने पर सहमति जताई है.

कहां फंसा है मामले में पेंच? इस मामले के मूल आदेश पर नजर डालें, तो न्यायिक सदस्य अशोक कुमार भारद्वाज ने रीपेमेंट प्लान की मंजूरी को उन लेनदारों तक सीमित कर दिया था, जिन्होंने इसके पक्ष में मतदान किया था, जबकि असहमति जताने वाले वित्तीय संस्थानों और बैंकों को प्लान के बाहर सुभाष चंद्रा के खिलाफ स्वतंत्र रूप से अपने कर्ज की वसूली करने की अनुमति दी थी. लेकिन तीसरे सदस्य शरद कुमार शर्मा ने एक स्वतंत्र आदेश में धारा 115(1) को सभी लेनदारों पर समान रूप से लागू कर दिया, जिससे असहमति जताने वाले बैंकों और वित्तीय संस्थानों सहित सभी लेनदारों के व्यक्तिगत गारंटर के खिलाफ दावे समाप्त हो गए.

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