'सोनिया की किताब से PM, RSS और चीन से जुड़े पॉइंट्स हटवाना चाहता था पेंग्विन', गहलोत का दावा

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'सोनिया की किताब से PM, RSS और चीन से जुड़े पॉइंट्स हटवाना चाहता था पेंग्विन', गहलोत का दावा

29 अगस्त 2026 को 09:41 am बजे
'सोनिया की किताब से PM, RSS और चीन से जुड़े पॉइंट्स हटवाना चाहता था पेंग्विन', गहलोत का दावा

कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की किताब 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' प्रकाशन के पहले विवादों में घिर गई है. अब इसे लेकर पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया ने अपना पक्ष रखा है. उनका कहना है कि वह सोनिया गांधी की किताब को प्रकाशित करने के लिए उत्सुक था लेकिन लेखिका के तथ्यों की जांच करना उनकी जिम्मेदारी और अधिकार है.

पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया ने X पर पोस्ट करते हुए इस पूरे मामले पर अपना पक्ष रखा है. उनका कहना है कि वह भारत में इस किताब का प्रकाशक नहीं है. बता दें, पेंग्विन का यह बयान अमेरिकी प्रकाशक अल्फ्रेड ए नॉफ (जो पेंग्विन रैंडम हाउस का ही एक हिस्सा है) द्वारा इसे 10 नवंबर को रिलीज करने की घोषणा के कुछ दिनों बाद आया है.

मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि सोनिया गांधी ने इस किताब में संपादकीय बदलाव करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद प्रकाशक ने पीछे हटने का फैसला किया. इसी रिपोर्ट के बाद पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया ने इस पर सफाई पेश की.

कंपनी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि वह भारत में 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' का प्रकाशक नहीं है. साथ ही, कंपनी ने यह भी कहा कि यह दावा सही नहीं है कि लेखिका के संपादकीय बदलावों को स्वीकार न करने की वजह से किताब के प्रकाशन के लिए मना किया गया. कंपनी का कहना है कि एक प्रकाशक की जिम्मेदारी होती है कि वह किताब में दिए गए तथ्यों की अच्छे से जांच करे और किताब के संबंध में लेखिका को अच्छी सलाह दे. पेंग्विन ने इसे प्रकाशन प्रक्रिया का एक सामान्य हिस्सा बताया. कंपनी ने बयान में यह भी कहा कि वह आगे लेखिका के साथ हुई गोपनीय बातचीत पर कोई टिप्पणी नहीं करेगी.

यह भी पढ़ें: क्या एडिटोरियल बदलाव न मानने पर पेंगुइन ने वापस खींचे कदम? जानिए सोनिया गांधी के ऑटोबायोग्राफी पर पब्लिशर ने क्या दी सफाई

हालांकि, पेंग्विन के इस बयान के बाद कांग्रेस के तमाम नेताओं ने सरकारी दबाव और अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर सवाल खड़े किए. कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने दावा किया, "पेंग्विन पर पीएम मोदी, RSS और मोदी सरकार के दौरान चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र पर कब्ज़े से संबंधित हिस्सों को हटाने" का दबाव था. उन्होंने कहा कि जब सोनिया गांधी ने इस बदलाव से इनकार किया तो कंपनी भारत में इसका प्रकाशन करने से पीछे हट गई. उन्होंने इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताया है.

गहलोत समेत कांग्रेस के तमाम नेताओं ने पेंग्विन पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि जब दुनिया भर में उनके ही इम्प्रिंट के तहत यह किताब प्रकाशित हो रही थी तो फिर भारत में इसके प्रकाशन को क्यों रोका जा रहा है.

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी इसे गंभीर चिंता का विषय बताया है. उन्होंने X पर पोस्ट करते हुए लिखा, "क्या प्रकाशक तय करेगा कि श्रीमती गांधी जैसी वरिष्ठ हस्ती क्या लिखेंगी और क्या नहीं? यह सवाल भी उठता है कि क्या प्रकाशक यह बात खुद कह रहा है या उस पर किसी का दबाव है?"

भारत में किताब के प्रकाशन और डिस्ट्रीब्यूटर को लेकर स्थिति अब तक साफ नहीं है लेकिन अमेज़न पर इसका ई-बुक वर्जन 2615 रुपये में प्री-ऑर्डर के लिए उपलब्ध है. अमेज़न के मुताबिक, ई-बुक को हार्पर कॉलिन्स यूके के एक हिस्से विलियम कॉलिन्स ने प्रकाशित किया है.

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