पहले अर्बन नक्सल, अब दिमागी नक्सल... PM मोदी का किस पर है निशाना

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पहले अर्बन नक्सल, अब दिमागी नक्सल... PM मोदी का किस पर है निशाना

15 अगस्त 2026 को 09:44 am बजे
पहले अर्बन नक्सल, अब दिमागी नक्सल... PM मोदी का किस पर है निशाना

15 अगस्त के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की आन-बान-शान के प्रतीक ऐतिहासिक लाल किले से राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया. लाल किले की प्राचीर से पीएम मोदी राष्ट्र को संबोधित करते हुए देश की नई दिशा, संकल्पों और विकास की भावी योजनाओं का खाका खींचा.

लाल किले से पीएम मोदी ने 'दिमागी नक्सल' शब्द का इस्तेमाल करके देश को सुरक्षा, वैचारिक स्थिरता और सामाजिक एकता से जुड़ा एक स्पष्ट और सख्त संदेश देने का प्रयास किया है. इस दौरान नरेंद्र मोदी ने युवाओं से हिंसा और अराजकता के रास्ते से दूर रहकर विकास, एकता और रचनात्मक कार्यों में योगदान देने की अपील की.

पीएम मोदी ने कहा कि जंगल से नक्सली खत्म लेकिन 'दिमागी नक्सल' मौके की तलाश में हैं, इन्हें पहचानना होगा. देशवासियों से उन्होंने इन 'दिमागी नक्सलियों' को अलग-थलग करने का भी आह्वान किया. बता दें कि पीएम मोदी अर्बन नक्सली टर्म का भी इस्तेमाल करते रहे हैं. पहली बार उन्होंने दिमागी नक्सली शब्द के जरिए निशाना साधा है.

देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समाज में हिंसा और अराजकता को बढ़ावा देने वाली मानसिकता के खिलाफ सतर्क रहने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि कुछ लोग समाज को गलत दिशा में ले जाने के लिए तरह-तरह के दांव चल रहे हैं और ऐसे तत्वों को पहचानना जरूरी है.

पीएम मोदी ने कहा कि हमने नक्सलवाद खत्म करने का संकल्प लिया था. 21वीं सदी में दशकों पुरानी चुनौतियों को खत्म करना अनिवार्य है. नक्सलवाद और माओवाद ने लाखों युवाओं के भविष्य को तबाह कर दिया. अनेक माताओं के दूधमय नवजातों को छीन लिया, मां-बाप के सपनों को चूर-चूर कर दिया.

उन्होंने कहा कि इस नक्सलवाद ने चार दशक तक हिंदुस्तान की बड़ी आबादी को बंदूक की नोक पर दबोच रखा था, संविधान की धज्जिया उड़ा दी थी. देश के नागरिकों की रक्षा में 3500 से ज्यादा सुरक्षाबल के जवान शहीद हो गए. युद्ध के अंदर जितने जवान मरते हैं, उतने जवानों को जान गंवानी पड़ी। नक्सलवाद ने धरती को लहूलुहान कर दिया था, लेकिन बंदूकों और जंगलों से होने वाला पारंपरिक नक्सलवाद और माओवादी हिंसा अब अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है और सुरक्षा बलों की वजह से काफी हद तक कमजोर हो चुका है. आज नक्सल क्षेत्र में नक्सल मुक्त होने के कारण विकास का तिरंगा लहरा रहा है.

उन्होंने कहा कि जंगल नक्सलियों की जगह अब शहरों, शिक्षण संस्थानों और बौद्धिक मंचों पर सक्रिय 'दिमागी नक्सल' ले रहे हैं. हमें सावधान रहने की जरूरत है. हथियारबंद नक्सल तो गए, लेकिन दिमागी नक्सल मौके की तलाश में हैं. इन दिमागी नक्सलों को पहचानना होगा. यह वर्ग सीधे हथियार नहीं उठाता, बल्कि अपनी विचारधारा से देश में अराजकता और भ्रम फैलाने की ताक में रहता है.

पीएम मोदी ने लाल किले से किस पर साधा निशाना पीएम मोदी ने कहा कि बरसों तक देश की सत्ता में माओवादी सोच के लोग गलियारों में जगह बनाकर बैठे रहे. सरकारी कमेटियों में सलाहकार के रूप में माओवादी सोच ने नीतियां प्रभावित कीं. जंगलों में हमें हथियारी नक्सलों का खात्मा करने में सफलता मिली है, लेकिन ये दिमागी नक्सल मौके की तलाश में है. हिंसा और अराजकता के रास्ते खोद रहे हैं.

पीएम मोदी ने कहा कि समाज को गलत रास्ते पर घसीटने के लिए अलग-अलग दांव चल रहे हैं. इन दिमागी नक्सलियों को पहचानना होगा, इन्हें आइसोलेट करना होगा. राष्ट्र को विकसित देश बनाने की मुख्यधारा की ओर युवा पीढ़ी को जोड़ना होगा. सुरक्षित भारत बनना हम सबका दायित्व है। चुनौती सीमा के अंदर हो या सरहद के बाहर भारत हर परिस्थिति के लिए तैयार है.

पीएम मोदी ने देश के युवाओं दिया संदेश दिमागी नक्सली शब्द के जरिए पीएम मोदी ने देशवासियों से आह्वान किया है कि वे ऐसे तत्वों और नेटवर्क को पहचानें, बेनकाब करें और उनसे सतर्क रहें जो देश को जाति, भाषा या क्षेत्र के नाम पर विभाजित करने की कोशिश करते हैं. उनका संदेश यह है कि देश को अंदरूनी तौर पर अस्थिर करने और विकसित भारत के रास्ते में बाधा डालने की किसी भी वैचारिक साजिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. इसीलिए पीएम मोदी कहा कि समाज को बांटने या गलत राह पर धकेलने वाली मानसिकता के खिलाफ जागरूकता जरूरी है.

प्रधानमंत्री ने देश की प्रगति के लिए युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा देना और उन्हें विकास की यात्रा से जोड़ना महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि लंबे समय तक माओवादी सोच रखने वाले लोग सत्ता के प्रभावशाली केंद्रों में अपनी पैठ बनाए रहे. विभिन्न सरकारी समितियों में सलाहकारों की भूमिका निभाते हुए इस विचारधारा ने देश की राष्ट्रीय नीतियों और निर्णयों को भी प्रभावित किया.

सशस्त्र विद्रोह के कमजोर पड़ने के बावजूद प्रधानमंत्री ने आगाह किया कि 'वैचारिक या दिमागी नक्सली' अब भी मौजूद हैं. ऐसी मानसिकता वाले तत्व लगातार मौके की तलाश में रहते हैं और समाज में असंतोष, अशांति तथा हिंसा का माहौल बनाने के लिए नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं. पीएम ने राष्ट्र से आह्वान किया कि समाज को भ्रमित करने वाले इन 'वैचारिक नक्सलियों' की समय रहते पहचान की जाए और उन्हें पूरी तरह से अलग-थलग किया जाए. देश की युवा शक्ति को ऐसे बहकावों से बचाकर 'विकसित भारत' के राष्ट्रीय संकल्प और मुख्यधारा के विकास प्रयासों से जोड़ा जाए.

पीएम मोदी ने इससे पहले अक्सर अर्बन नक्सलियों का जिक्र किया करते थे. पीएम ने कई बार कांग्रेस के साथ अर्बन नक्सलियों को जोड़ते नजर आए थे. उन्होंने कहा था कि अर्बन नक्सलियों को भारत को आर्थिक रूप से कमजोर करने की साजिश रचने का आरोप लगाते रहे हैं. मोदी ने 2024 में चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि  ये लोग संविधान और लोकतंत्र की दुहाई देते हुए, भारत को इसके लोगों के बीच विभाजित करने का काम कर रहे हैं. हमें शहरी नक्सलियों के इस गठबंधन को पहचानना चाहिए.

हालांकि जंगलों में पनपने वाला नक्सलवाद, जिसने युवाओं को बंदूकों से लैस किया, धीरे-धीरे खत्म हो गया या कम हो गया है, लेकिन शहरी नक्सलवाद का नया मॉडल सामने आया है. हमें उन लोगों की पहचान करने और उनका मुकाबला करने की जरूरत है जो देश को तोड़ने का सपना देखते हैं और झूठे मुखौटे पहनकर इसे कमजोर करने वाले विचारों को बढ़ावा देते हैं. पीएम ने अब दिमागी नक्सल शब्द का इस्तेमाल करके निशाना साधा है.

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