फ्लश का कचरा, कंक्रीट की ताकत! इंसानी पॉटी ने बढ़ाई 42% मजबूती

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फ्लश का कचरा, कंक्रीट की ताकत! इंसानी पॉटी ने बढ़ाई 42% मजबूती

10 सितंबर 2026 को 08:50 am बजे
फ्लश का कचरा, कंक्रीट की ताकत! इंसानी पॉटी ने बढ़ाई 42% मजबूती

इंसानी मल को आमतौर पर बेकार समझा जाता है. इसे साफ करके सही तरीके से खत्म किया जाता है. लेकिन वैज्ञानिकों ने इसी पॉटी से बनी एक सामग्री का इस्तेमाल कंक्रीट में करके एक दिलचस्प नतीजा पाया है. नई स्टडी में सामने आया कि सेप्टिक टैंक और सैनिटेशन सिस्टम से निकलने वाले इंसानी कचरे को ट्रीट करके बनाए गए बायोचार को सीमेंट की कुछ मात्रा की जगह इस्तेमाल किया जा सकता है. 10% बायोचार मिलाने पर 91 दिन बाद कंक्रीट की एक खास तरह की मजबूती 42% तक बढ़ गई.

इस रिसर्च में इंसानी कचरे को सीधे कंक्रीट में नहीं मिलाया गया. पहले कचरे को ट्रीट किया गया और उसे गर्म करके बायोचार बनाया गया. बायोचार एक तरह की कार्बन वाली सामग्री है. इसके बाद वैज्ञानिकों ने इसे सीमेंट की कुछ मात्रा की जगह कंक्रीट में मिलाया और अलग-अलग टेस्ट किए. उन्होंने देखा कि इससे कंक्रीट कितना मजबूत होता है, कितना पानी सोखता है और समय के साथ उसमें कितना बदलाव आता है.

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वैज्ञानिकों ने कंक्रीट में सीमेंट की जगह 5%, 10% और 15% तक बायोचार मिलाकर टेस्ट किया. इनमें 10% बायोचार वाले कंक्रीट में सबसे अच्छा नतीजा मिला. 91 दिन बाद इसकी कंप्रेसिव स्ट्रेंथ 21% बढ़ी. आसान भाषा में कहें तो यह कंक्रीट ज्यादा दबाव सह सका. वहीं इसकी फ्लेक्सुरल स्ट्रेंथ 42% बढ़ी. इसका मतलब है कि दबाव पड़ने या मुड़ने पर कंक्रीट के टूटने की क्षमता में सुधार हुआ.

रिसर्च में 15% बायोचार वाले कंक्रीट की भी जांच की गई. 28 दिन बाद इसमें पानी सोखने की क्षमता और कंक्रीट के अंदर मौजूद खाली जगह सामान्य कंक्रीट के करीब पाई गई. वैज्ञानिकों ने 10% बायोचार वाले मोर्टार को 120 दिन तक भी देखा. इस दौरान इसके सूखने के बाद सिकुड़ने की स्थिति सामान्य सीमेंट वाले मोर्टार जैसी रही. यानी समय के साथ इसके आकार में होने वाला बदलाव बहुत ज्यादा नहीं था.

रिसर्च में कंक्रीट में मौजूद भारी धातुओं की भी जांच की गई. स्टडी के मुताबिक, बायोचार की मात्रा बढ़ने के साथ कंक्रीट के सैंपल में भारी धातुओं की मात्रा कम हुई. इससे यह संभावना सामने आई कि बायोचार कंक्रीट से इन हानिकारक तत्वों के बाहर निकलने को कम करने में मदद कर सकता है. हालांकि, इस बात को पूरी तरह साबित करने के लिए आगे और जांच की जरूरत होगी.

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इस रिसर्च का एक फायदा यह हो सकता है कि इंसानी कचरे का इस्तेमाल किसी काम की चीज बनाने में हो सके और कंक्रीट में सीमेंट की कुछ मात्रा कम की जा सके. सीमेंट बनाने में काफी ऊर्जा लगती है और इससे कार्बन इमिशन भी होता है.

हालांकि, अभी इस तकनीक को बड़े स्तर पर इमारतों में इस्तेमाल करने की स्थिति नहीं आई है. इसके लिए लंबे समय तक और ज्यादा टेस्ट करने होंगे. साथ ही इंसानी कचरे को सही तरीके से ट्रीट करना भी जरूरी होगा. फिलहाल यह स्टडी बताती है कि सही तरीके से ट्रीट किया गया इंसानी कचरा भविष्य में कंक्रीट बनाने में काम आ सकता है.

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