नेपाल में त्रासदी के 8 दिन बाद भी मलबे से निकल रहे लोग, मौतों का आंकड़ा 1127 पहुंचा

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नेपाल में त्रासदी के 8 दिन बाद भी मलबे से निकल रहे लोग, मौतों का आंकड़ा 1127 पहुंचा

02 सितंबर 2026 को 07:07 am बजे
नेपाल में त्रासदी के 8 दिन बाद भी मलबे से निकल रहे लोग, मौतों का आंकड़ा 1127 पहुंचा

नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है. हादसे के आठवें दिन भी राहत और बचाव का काम जारी है. मलबे के बीच से अब भी लोगों को बाहर निकाला जा रहा है. नेपाल पुलिस के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अब तक इस आपदा में 1127 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं, चार हजार से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं.

नेपाल पुलिस के मुताबिक अब तक 1,126 शव बरामद किए जा चुके हैं. इनमें 31 बच्चे, 45 लड़कियां, 220 महिलाएं और 370 पुरुष शामिल हैं. इसके अलावा 460 मानव अवशेष भी मिले हैं. पुलिस के 7,572 जवान राहत और बचाव काम में लगे हैं. इनमें 65 पुलिसकर्मी भी प्रभावित हुए हैं, जबकि 25 पुलिसकर्मियों का अब तक पता नहीं चल पाया है.

राहत और बचाव अभियान में 580 लोगों को बचाया गया है या घायल हालत में निकाला गया है. अब तक 55 शव उनके परिवारों को सौंपे जा चुके हैं.

दरअसल, यह हादसा 26 अगस्त को उत्तरी नेपाल में हुआ था. तेज बारिश के बाद कई इलाकों में अचानक बाढ़ आ गई. इसके साथ ही बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ. देखते ही देखते पानी और मलबे ने गांवों और कस्बों को अपनी चपेट में ले लिया. कई जगहों पर घर, सड़कें और दूसरी इमारतें मलबे में दब गईं.

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नेपाल सरकार ने प्रभावित इलाके को कम से कम तीन महीने के लिए आपदा संकट क्षेत्र घोषित किया है. सरकार का कहना है कि इससे राहत और बचाव के लिए जरूरी संसाधन तेजी से पहुंचाए जा सकेंगे. साथ ही राहत टीमों की तैनाती भी बेहतर तरीके से की जा सकेगी.

सरकार अब बचाव के साथ राहत और पुनर्वास पर भी जोर दे रही है. प्रभावित इलाकों में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी और बचाव दल लगाए गए हैं. टीमें लगातार मलबे में लोगों की तलाश कर रही हैं. लापता लोगों के परिवार अभी भी अपनों के लौटने का इंतजार कर रहे हैं.

चीन मीडिया ग्रुप (CMG) के एक रिपोर्टर ने सोमवार को हेलीकॉप्टर से प्रभावित इलाके का जायजा लिया. यह इलाका चीन-नेपाल सीमा पर स्थित ग्यिरोंग-रसुवा सीमा चौकी के नेपाली हिस्से में है. आसमान से ली गई तस्वीरों में तबाही का बड़ा मंजर दिखाई दिया.

इस रिपोर्ट के मुताबिक, सीमा चौकी के पास नेपाल की तरफ कई गांव और छोटे कस्बे पूरी तरह तबाह हो गए हैं. कई गाड़ियां और इमारतें गहरे मलबे में दब गई हैं. जहां कभी लोगों की आवाजाही रहती थी, वहां अब चारों तरफ मिट्टी और मलबा नजर आ रहा है. कीचड़ से क्षेत्र में दलदल जैसे हालात बन गए हैं.

तबाही से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में स्याब्रुबेंसी भी शामिल है. यह शहर सीमा चौकी से सीधी दूरी में 10 किलोमीटर से भी कम दूर है. आपदा से पहले यहां काफी चहल-पहल रहती थी. लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं.

हेलीकॉप्टर से इलाके का जायजा लेने वाले रिपोर्टर का कहना है कि शहर में आम लोगों की मौजूदगी बेहद कम दिखाई दी. वहां सिर्फ राहत और बचाव दल के सदस्य नजर आए. ये टीमें मलबे में जिंदगी की तलाश कर रही हैं.

आठ दिन बीतने के बाद भी बचाव अभियान थमा नहीं है. मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश लगातार जारी है. हर गुजरते दिन के साथ चुनौती बढ़ रही है. इसके बावजूद रेस्क्यू टीम का सर्च ऑपरेशन जारी है. चार हजार से ज्यादा लोगों के लापता होने से उनके परिवारों की चिंता बढ़ी हुई है.

नेपाल बाढ़ में लापता पांच लोगों के शव भारत में मिले

नेपाल में आई अचानक बाढ़ में बहकर लापता हुए पांच नेपाली नागरिकों के शव उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में गंडक नदी से बरामद हुए. मंगलवार को सभी शवों को सोनौली बॉर्डर पर नेपाल पुलिस को सौंप दिया गया. मृतकों में दो महिलाएं और तीन पुरुष शामिल हैं. ये शव कुशीनगर के बरवा पट्टी और खड्डा इलाके से मिले थे. शवों को शाम करीब 4 बजे सोनौली लाया गया. इसके बाद नेपाल के बेलहिया थाने के प्रभारी सब-इंस्पेक्टर हरिराम डांगी को सौंप दिया गया.

अधिकारियों के मुताबिक, शवों को नेपाल के बुटवल ले जाया गया है. वहां नेपाल पुलिस मृतकों की पहचान करेगी. इसके बाद शवों को उनके परिवारों को सौंपा जाएगा. नेपाल में लगातार हो रही बारिश और अचानक आई बाढ़ के कारण कई लोग बह गए हैं. सीमा से लगे भारतीय इलाकों में भी इसका असर देखने को मिल रहा है.

नेपाल और उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश के कारण महाराजगंज में कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है. वाल्मीकिनगर के गंडक बैराज से 1,50,200 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है. महाराजगंज में पिछले 24 घंटे में 33.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है. जिले में अब तक कुल 655.5 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है.

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मंगलवार दोपहर 2 बजे गंडक नदी का अपस्ट्रीम जलस्तर 355.30 फीट और डाउनस्ट्रीम जलस्तर 352.60 फीट दर्ज किया गया. रोहिन नदी अभी खतरे के निशान से नीचे बह रही है. हालांकि महाव नाला खतरे के निशान से ऊपर है. इसका जलस्तर नौ फीट पहुंच गया है. खतरे का निशान पांच फीट है. राप्ती, चंदन और प्यास नदियों का जलस्तर भी बढ़ रहा है. हालांकि ये नदियां अभी खतरे के निशान से नीचे हैं.

अपर जिलाधिकारी प्रशांत कुमार ने बताया कि प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर रख रहा है. एसडीएम, तहसील अधिकारियों, सिंचाई विभाग और बाढ़ नियंत्रण अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं. निचले और संवेदनशील इलाकों में राहत और बचाव की तैयारी पूरी रखने को कहा गया है.महाराजगंज और नेपाल से लगे इलाकों में सभी तटबंध फिलहाल सुरक्षित हैं.

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